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प्रतापगढ़/वशिष्ठ वाणी: कानूनी दांव-पेंच और आपसी कड़वाहट के बीच गुरुवार को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण प्रतापगढ़ के मध्यस्थता केंद्र में खुशियों की नई शुरुआत हुई। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशानुसार चल रहे विशेष मध्यस्थता अभियान के तहत दो बिछड़े परिवारों को फिर से एक कर दिया गया।

जनपद न्यायाधीश राजीव कमल पाण्डेय के आदेश और सचिव (सिविल जज सी.डि.) शाम्भवी के कुशल निर्देशन में चली काउंसलिंग के बाद दोनों जोड़ों ने साथ रहने का संकल्प लिया।

बच्चों के भविष्य ने जोड़े दिल

पहले मामले में खुशबू और इंद्रजीत सिंह के बीच कई वर्षों से कानूनी विवाद चल रहा था। इसका प्रभाव उनके बच्चों पर भी पड़ा था—16 वर्षीय बेटा मां के साथ ननिहाल में और 14 वर्षीय बेटी पिता के साथ रह रही थी।
एडवोकेट/मीडिएटर विश्वनाथ प्रसाद त्रिपाठी के प्रयासों से दोनों पक्षों ने बच्चों के उज्ज्वल भविष्य और आपसी स्नेह को प्राथमिकता देते हुए साथ रहने का निर्णय लिया। वर्षों बाद यह परिवार अब एक ही छत के नीचे जीवन की नई शुरुआत करेगा।

संवाद से सुलझा वैवाहिक विवाद

दूसरे मामले में गुफरान और साबिया बानो के बीच वैचारिक मतभेदों के कारण ‘विदाई’ का मुकदमा परिवार न्यायालय में लंबित था। लंबी काउंसलिंग और समझाइश के बाद दोनों ने अपनी-अपनी गलतियों को स्वीकार किया और आपसी सहमति से वैवाहिक संबंधों को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया। समझौते के बाद साबिया अपने पति गुफरान के साथ ससुराल विदा हुईं।

“संवाद ही हर विवाद का समाधान”

इस भावुक अवसर पर सचिव शाम्भवी ने दोनों जोड़ों को माला पहनाकर उनके सुखद भविष्य की कामना की। उन्होंने कहा, “संवाद ही हर विवाद का समाधान है।”

कार्यक्रम के दौरान जफर उल्ला, राजेश प्रताप सिंह, राम कांत द्विवेदी, जीतेन्द्र पाण्डेय और पीएलवी ज्योत्सना दूबे सहित अनेक अधिवक्ता उपस्थित रहे।

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