भोपाल/सिंगरौली/वशिष्ठ वाणी। मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले में धिरौली कोल ब्लॉक को लेकर राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अदाणी ग्रुप पर गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया कि धिरौली क्षेत्र में करीब 10 हजार एकड़ जमीन को ‘अदाणी देश’ में तब्दील कर दिया गया है, जहां स्थानीय लोगों, मीडिया और राजनीतिक दलों की एंट्री तक रोक दी गई है।
पटवारी का आरोप: “पूरा इलाका छावनी में, अंदर जाने की किसी को इजाजत नहीं”
एक वायरल वीडियो में पटवारी ने कहा—
“मोदी जी ने सिंगरौली में 10 हजार एकड़ जमीन पर ‘अदाणी देश’ बना दिया है। वहां कांग्रेस, मीडिया या आदिवासी—किसी को भी जाने नहीं दिया जा रहा। इलाके में 1500 पुलिस वाले तैनात हैं और सिर्फ अदाणी के लिए जंगल कटवाए जा रहे हैं।”
पटवारी ने इसे लोकतंत्र और आदिवासी अधिकारों पर सीधा हमला बताया है।
धिरौली कोल ब्लॉक: पेड़ कटाई की अनुमति से भड़का विवाद
अदाणी ग्रुप की कंपनी स्ट्रेटाटेक मिनरल रिसोर्सेज प्राइवेट लिमिटेड को मई 2025 में धिरौली कोल ब्लॉक क्षेत्र (2,672 हेक्टेयर) में 5 लाख 70 हजार से अधिक पेड़ काटने की अनुमति मिली थी।
इसके बाद से ही आदिवासी समुदाय और कांग्रेस पार्टी इस परियोजना का कठोर विरोध कर रहे हैं।
कांग्रेस के प्रमुख आरोप
कांग्रेस ने सरकार और कंपनी पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं:
- ग्राम सभाओं से जबरन सहमति दिलवाई गई
- PESA कानून का उल्लंघन
- आदिवासी भूमि और जंगलों को छीना जा रहा है
- पेड़ कटाई के दौरान बड़े पैमाने पर पुलिस बल तैनात कर लोगों को धमकाया जा रहा है
- मीडिया और विपक्ष को इलाके में प्रवेश नहीं दिया जा रहा
कांग्रेस ने मामले की न्यायिक जांच और तत्काल पेड़ कटाई रोकने की मांग की है।
सरकार का पक्ष: “सभी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी, विकास और रोजगार बढ़ेगा”
राज्य सरकार ने विपक्ष के सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि:
- परियोजना के लिए कानूनी मंजूरियां समय पर और नियमों के तहत दी गई हैं
- क्षेत्र में रोजगार सृजन, सड़क, इंफ्रास्ट्रक्चर, और विकास कार्यों को बढ़ावा मिलेगा
- पर्यावरणीय मंजूरी के साथ जितना पेड़ कट रहा है, उससे अधिक पौधरोपण किए जाने की योजना है
सरकार ने कहा कि विरोध केवल “राजनीतिक उद्देश्य” से प्रेरित है।
विरोध-प्रदर्शन जारी, इलाके में तनाव बरकरार
वर्तमान में सिंगरौली के धिरौली क्षेत्र में भारी पुलिस बल तैनात है और पूरा इलाका छावनी में तब्दील हो चुका है।
कई सामाजिक संगठनों, पर्यावरण कार्यकर्ताओं और आदिवासी समूहों ने भी इस परियोजना को “प्राकृतिक और मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन” बताया है।
आने वाले दिनों में यह मुद्दा और भी बड़ा राजनीतिक मसला बन सकता है।


