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राहुल गांधी का अमित शाह पर तीखा हमला: “चुनाव चोरी के सबूत हैं, गृह मंत्री जवाबों से भाग रहे हैं”

नई दिल्ली/वशिष्ठ वाणी। लोकसभा में आज चुनाव सुधारों पर हुई बहस के दौरान राजनीतिक टकराव अपनी चरम सीमा पर पहुंच गया। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने गृह मंत्री अमित शाह के भाषण को “झूठ, ध्यान भटकाने वाला” और “मुद्दों से बचने का प्रयास” करार देते हुए कड़ा प्रहार किया।

राहुल गांधी के आरोप: “हमने सबूत रखे, जवाब एक भी नहीं दिया गया”

संसद के बाहर मीडिया से बातचीत में राहुल गांधी ने कहा कि गृह मंत्री ने अपने पूरे भाषण में विपक्ष द्वारा उठाए गए “मुख्य और गंभीर” सवालों पर कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं दी।
उन्होंने कहा—

“हमने चार बुनियादी सवाल पूछे थे, लेकिन अमित शाह ने एक का भी जवाब नहीं दिया। क्या यह लोकतंत्र है?”

राहुल गांधी द्वारा उठाए गए चार प्रमुख सवाल इस प्रकार थे:

  1. वोटर लिस्ट को पूरी तरह पारदर्शी क्यों नहीं बनाया जा रहा?
  2. EVM की संपूर्ण संरचना व तकनीकी जानकारी सार्वजनिक क्यों नहीं की जा रही?
  3. कई राज्यों में एक ही व्यक्ति के नाम से कई बार वोटिंग के आरोपों की जांच क्यों नहीं हो रही?
  4. चुनाव आयोग को इतनी विस्तृत और असीमित शक्तियाँ क्यों दे दी गई हैं?

राहुल गांधी ने दावा किया कि हाल की प्रेस कॉन्फ़्रेंस में उन्होंने और विपक्ष ने “वोट चोरी” के गंभीर और दस्तावेज़ी सबूत प्रस्तुत किए थे, लेकिन सरकार “जवाब देने से लगातार बच रही है”।
उन्होंने इस स्थिति को “भारतीय लोकतंत्र के लिए सबसे बड़ा खतरा” बताया।


अमित शाह का पलटवार: “सबसे ज्यादा धांधली कांग्रेस ने कराई थी”

लोकसभा में अपने भाषण के दौरान गृह मंत्री अमित शाह ने राहुल गांधी के आरोपों को सिरे से खारिज किया।
अमित शाह ने कहा—

“चुनावी धांधली का इतिहास कांग्रेस का है, भाजपा का नहीं। इंदिरा गांधी के समय में सबसे ज्यादा चुनावी भ्रष्टाचार हुआ था।”

उन्होंने विपक्ष के सवालों को “राजनीतिक प्रोपेगैंडा” और “जनता को भ्रमित करने की कोशिश” बताया।


सत्ता पक्ष बनाम विपक्ष: सत्र में गर्मागर्मी जारी

  • विपक्ष EVM, वोटर लिस्ट और चुनाव सुधारों को लेकर निरंतर पारदर्शिता की मांग कर रहा है।
  • भाजपा इसे “हार का डर” और “राजनीतिक ड्रामा” बता रही है।
  • शीतकालीन सत्र में चुनाव सुधार सबसे बड़ा विवादित मुद्दा बन गया है।

राजनीतिक पंडितों के अनुसार, यह बहस आने वाले विधानसभा चुनावों की पृष्ठभूमि में और अधिक तेज़ हो सकती है।

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