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आध्यात्मिकता वैश्विक कल्याण की कुंजी: भारत का संतुलित विकास मॉडल दुनिया के लिए प्रेरणादायक – BHU कुलपति

वाराणसी/ वशिष्ठ वाणी: स्कूल ऑफ मैनेजमेंट साइंसेज वाराणसी (SMS) में “आध्यात्मिकता: वैश्विक कल्याण, सततता और डिजिटल सजगता के लिए एक सिद्ध प्रतिमान” विषय पर आयोजित तेरहवें दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का भव्य शुभारंभ हुआ। उद्घाटन सत्र में देश-विदेश के कई ख्यातिलब्ध विद्वानों की उपस्थिति ने कार्यक्रम को विशेष गरिमा प्रदान की।

मुख्य अतिथि अजित कुमार चतुर्वेदी, कुलपति काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, ने कहा कि आध्यात्मिकता किसी एक धर्म या परंपरा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हर मानव जीवन का मूलभूत आयाम है। उन्होंने कहा कि वर्तमान वैश्विक चुनौतियों के दौर में भारत का संतुलित विकास मॉडल पूरी दुनिया के लिए प्रेरणादायक बनकर उभर रहा है।

उन्होंने कहा, “सच्ची आध्यात्मिक समझ तब विकसित होती है जब हम विभिन्न संस्कृतियों और परंपराओं का अध्ययन करते हैं। केवल एक परंपरा तक सीमित रहने से ज्ञान संकुचित हो जाता है।”

विशिष्ट अतिथि विक्रम सिंह, पूर्व डीजीपी उत्तर प्रदेश एवं कुलाधिपति नोएडा इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी, ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि अनुशासन, संतुलन और आध्यात्मिक दृष्टि ही सफलता की असली कुंजी है। उन्होंने युवाओं से इच्छाओं को सीमित रखने और विवेक व वैराग्य अपनाने की सलाह दी।

अन्य विशिष्ट अतिथियों में गिरिश्वर मिश्रा, पूर्व कुलपति महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा तथा राजाराम शुक्ल, पूर्व कुलपति संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय, ने भी अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने भारतीय संस्कृति, महात्मा गांधी के विचारों तथा महाभारत और रामायण जैसे ग्रंथों के जीवन मूल्यों पर प्रकाश डाला।

कार्यक्रम में पी. एन. झा, निदेशक SMS वाराणसी ने कहा कि संस्थान शैक्षणिक उत्कृष्टता के साथ-साथ सामाजिक दायित्व भी निभा रहा है और ऐसे सम्मेलन भारतीय ज्ञान परंपरा तथा आधुनिक विज्ञान के बीच सेतु का कार्य करते हैं।

इस अवसर पर सम्मेलन की स्मारिका का विमोचन किया गया तथा पिछले वर्ष आयोजित बारहवें अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन की पुस्तक का भी अनावरण किया गया। पहले दिन देश-विदेश से आए 300 से अधिक प्रतिभागियों ने विभिन्न तकनीकी सत्रों में अपने शोध-पत्र प्रस्तुत किए।

कार्यक्रम का संचालन प्रो. पल्लवी पाठक ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन प्रो. अमिताभ पांडेय ने दिया। इस मौके पर डॉ. एम. पी. सिंह, संजय गुप्ता, प्रो. संदीप सिंह, प्रो. अविनाश चंद्र सुपकर सहित संस्थान के शिक्षक एवं कर्मचारी मौजूद रहे।

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