📍 वाराणसी |
प्राचीन संस्कृति, आध्यात्मिक चेतना और ऐतिहासिक विरासत से समृद्ध काशी—जिसे दुनिया ‘वाराणसी’ और ‘बनारस’ के नाम से भी जानती है—आज एक बार फिर अपने पुराने वैभव की ओर लौटती दिखाई दे रही है। बीते 9 वर्षों में योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में काशी का समग्र, सतत और सुव्यवस्थित विकास हुआ है, जिसने इस शहर को न केवल धार्मिक बल्कि वैश्विक पर्यटन और निवेश के मानचित्र पर भी मजबूती से स्थापित किया है।
इन वर्षों में बुनियादी ढांचे से लेकर धार्मिक स्थलों के पुनरुद्धार तक, विकास की एक व्यापक तस्वीर सामने आई है। लगभग 35,156 करोड़ रुपये की लागत से 486 से अधिक परियोजनाएं पूरी कर आम जनता को समर्पित की गई हैं, जबकि 17,915 करोड़ रुपये की परियोजनाएं अभी निर्माणाधीन हैं। इसके साथ ही करीब 53,071 करोड़ रुपये की योजनाओं का शिलान्यास किया गया, जिनमें से कई पूरी हो चुकी हैं और कई तेजी से आगे बढ़ रही हैं।
काशी में विकास का सबसे बड़ा प्रभाव पर्यटन पर देखने को मिला है। बेहतर कनेक्टिविटी, सड़कों का चौड़ीकरण, फ्लाईओवर, रिंग रोड, जल परिवहन और एयरपोर्ट विस्तार जैसे कार्यों ने शहर को देश-विदेश के यात्रियों के लिए अधिक सुलभ बना दिया है। इसका परिणाम यह रहा कि बीते 9 वर्षों में 46 करोड़ से अधिक पर्यटक काशी पहुंचे, जो अपने आप में एक बड़ा रिकॉर्ड है।
धार्मिक और सांस्कृतिक पुनरुद्धार के क्षेत्र में काशी विश्वनाथ मंदिर का विस्तार एक ऐतिहासिक उपलब्धि माना जा रहा है। लगभग 400 करोड़ रुपये की लागत से 3 हजार स्क्वायर फीट से बढ़ाकर 5 लाख स्क्वायर फीट में विकसित किया गया काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर आज विश्वभर के सनातन श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बन चुका है। इसके साथ ही पावन पथ, पंचकोसी परिक्रमा, अंतर्गृही यात्रा और विभिन्न धार्मिक मार्गों का विकास भी किया गया है।
काशी के घाटों और गलियों का भी व्यापक कायाकल्प हुआ है। दशाश्वमेध से गोदौलिया तक पर्यटन विकास, घाटों का सौंदर्यीकरण, स्वच्छता, प्रकाश व्यवस्था और श्रद्धालुओं के लिए बेहतर सुविधाओं ने गंगा तट को अधिक व्यवस्थित और आकर्षक बना दिया है। निर्मल और अविरल गंगा की दिशा में भी निरंतर प्रयास हुए हैं, जिससे धार्मिक आस्था और पर्यावरण दोनों को बल मिला है।
धार्मिक विविधता को ध्यान में रखते हुए सारनाथ, कबीर प्राकट्य स्थल, रविदास मंदिर, तथा जैन तीर्थंकर चंद्रप्रभु की जन्मस्थली चंद्रावती जैसे स्थलों का भी विकास किया गया है। विशेष रूप से सारनाथ में विश्व बैंक के सहयोग से लगभग 72.63 करोड़ रुपये की लागत से टूरिस्ट फ्रेंडली इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया गया है, जिसमें लाइट एंड साउंड शो, बुद्ध थीम पार्क और अन्य सुविधाएं शामिल हैं।
इसके अलावा काशी में क्रूज बोट संचालन, पर्यटन सूचना केंद्र, आधुनिक संग्रहालय, घाटों पर चेंजिंग रूम, ग्रामीण क्षेत्रों में मंदिरों, तालाबों और कुंडों का पुनरुद्धार जैसे कार्यों ने विकास को शहर से गांव तक पहुंचाया है। इससे स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और आय के नए अवसर भी सृजित हुए हैं।
कुल मिलाकर, बीते 9 वर्षों में काशी का विकास केवल इंफ्रास्ट्रक्चर तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और आर्थिक पुनर्जागरण का प्रतीक बनकर उभरा है। आज काशी न केवल अपनी प्राचीन पहचान को संजोए हुए है, बल्कि आधुनिकता के साथ कदम मिलाकर विश्व स्तर पर अपनी एक नई पहचान बना रही है।














