मुंबई / नई दिल्ली: क्या महाराष्ट्र में म्हाडा (MHADA) के बड़े अधिकारी अब पीड़ितों को न्याय देने के बजाय अपराधियों और घोटालेबाजों के ‘रक्षक’ बन चुके हैं? कई मुकदमों की जद में होने के बावजूद एक वरिष्ठ अधिकारी का रसूखदार कुर्सी पर बैठे रहना और खुलेआम दोषियों को बचाना, हमारे प्रशासनिक तंत्र पर सबसे बड़ा कलंक है।
इसी सनसनीखेज गठजोड़ का पर्दाफाश करते हुए ‘वशिष्ठ वाणी’ सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के सामने पुख्ता सबूतों के साथ म्हाडा के एक और बड़े अधिकारी के काले कारनामों का कच्चा चिट्ठा खोल रहा है, जो यह साबित करने के लिए काफी है कि ‘वशिष्ठ वाणी’ जिस सख्त कानून की मांग कर रहा है, वह शत-प्रतिशत जायज और समय की मांग है।
🚨 मुख्य किरदार: म्हाडा उपनिबंधक के वरिष्ठ अधिकारी बी.एस. कटरे
‘वशिष्ठ वाणी’ प्रधानमंत्री जी को अवगत कराना चाहता है कि म्हाडा उपनिबंधक (Deputy Registrar) कार्यालय के वरिष्ठ अधिकारी बी.एस. कटरे के रहते न्याय की उम्मीद करना बेमानी है। मामला मालवणी स्वप्नपूर्ति सोसाइटी का है, जहां ‘वशिष्ठ वाणी’ की मुहिम के बाद अधिकारी बी.एस. कटरे ने जांच तो बैठाई और जांच में सोसाइटी का चेयरमैन दोषी भी पाया गया।
लेकिन इसके बाद कटरे ने अपनी मेज के नीचे से ऐसा खेल खेला कि कई सुनवाइयों का नाटक करने के बाद दोषी चेयरमैन को क्लीन चिट देकर निर्दोष साबित कर दिया!
⚠️ ‘क्लीन चिट’ मिलते ही बढ़ा ऑटो रिक्शा चालक से ‘लखपति’ बने चेयरमैन का हौसला
बी.एस. कटरे के इस संरक्षण का नतीजा यह हुआ कि दोषी चेयरमैन का मनोबल सातवें आसमान पर पहुंच गया।
- जान से खिलवाड़ और अवैध पार्किंग: इस चेयरमैन ने म्हाडा की खाली पड़ी जमीन पर, सड़क के दोनों तरफ अवैध पार्किंग का धंधा शुरू कर दिया, जिससे स्थानीय लोगों और बच्चों की जान खतरे में पड़ गई है।
- धोखे से अवैध वसूली: वहां रहने वाले निर्दोष वाहन मालिकों को धोखे में रखकर पार्किंग के नाम पर अवैध रसीदें फाड़ी जा रही हैं और मोटी रकम वसूली जा रही थी।
- 15 साल से कब्जा और अकूत संपत्ति: आपको जानकर हैरानी होगी कि जिस सोसाइटी अध्यक्ष की हम बात कर रहे हैं, वह मूल रूप से एक ऑटो रिक्शा चालक है। उसका कोई अन्य व्यापार या बिजनेस नहीं है, लेकिन पिछले 15 वर्षों से सोसाइटी की कुर्सी पर कुंडली मारकर बैठे रहने के कारण आज वह कई फ्लैट्स (Rooms) का मालिक बन चुका है!
🛑 5 साल से जनता की लिखित शिकायतें और हस्ताक्षर अभियान रद्दी की टोकरी में!
इस तानाशाही और अवैध वसूली के खिलाफ स्वप्नपूर्ति सोसाइटी के दर्जनों कमरा मालिकों ने लिखित शिकायतें दीं और बकायदा हस्ताक्षर अभियान (Signature Campaign) चलाकर सबूत सौंपे। लेकिन अधिकारी बी.एस. कटरे ने पिछले 5 वर्षों में इस भ्रष्ट अध्यक्ष पर कोई कार्रवाई नहीं की। कतरे को इस पूरे काले धंधे की पल-पल की जानकारी है, लेकिन दोषियों को बचाना ही उनका मुख्य कर्तव्य बन चुका है।
🔥 पीएम मोदी जी, अब आप ही बताइए— क्या ‘वशिष्ठ वाणी’ का मांगा हुआ कानून जायज नहीं है?
प्रधानमंत्री जी, जब म्हाडा के बी.एस. कटरे जैसे वरिष्ठ अधिकारी खुद जांच रिपोर्टों को बदलकर दोषियों को बचाने लगें, जनता की 5 साल की शिकायतों को रद्दी समझने लगें, तो ‘वशिष्ठ वाणी’ की यह मांग कैसे नाजायज हो सकती है?
हम जो कानून मांग रहे हैं, वह इन भ्रष्ट अफसरों के काल के रूप में जरूरी है:
- सबूत मिलने पर २ दिन में कार्रवाई का नियम हो।
- लापरवाही या दोषियों को बचाने पर ट्रांसफर नहीं, सीधे पद से बर्खास्तगी और जेल हो।
‘वशिष्ठ वाणी’ का ऑन-रिकॉर्ड संकल्प: हम इस ऑटो रिक्शा चालक से लखपति बने चेयरमैन और उसे पालने वाले अधिकारी बी.एस. कटरे के इस गठजोड़ को तब तक बेनकाब करेंगे, जब तक दिल्ली से आपकी सरकार इस पर कड़ा चाबुक नहीं चला देती!













