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क्या किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है प्रशासन? छत्रपति शिवाजी राजे कॉम्प्लेक्स के बाहर 24 घंटे खड़े एलपीजी सिलेंडरों के टैंकर, कांदिवली ट्रैफिक विभाग मौन!

मुंबई/कांदिवली/वशिष्ठ वाणी: कांदिवली वेस्ट, एकता नगर स्थित छत्रपति शिवाजी राजे कॉम्प्लेक्स के बाहर का नजारा देखकर किसी भी आम नागरिक की रूह कांप जाएगी। सड़क के किनारे भारत गैस (Bharat Gas) के सिलेंडरों से भरे कई व्यावसायिक वाहन और ट्रक कतार से 24 घंटे खड़े रहते हैं।

यह कोई साधारण अवैध पार्किंग नहीं है, बल्कि यह एकता नगर के हजारों रहवासियों की जिंदगी के साथ सीधा खिलवाड़ है! सिलेंडरों से लदे ये वाहन किसी ‘चलते-फिरते बारूद के ढेर’ से कम नहीं हैं। अगर यहाँ छोटी सी भी लापरवाही या एक चिंगारी भड़की, तो पूरा एकता नगर तबाह हो जाएगा।

लेकिन बड़ा सवाल यह है कि कांदिवली ट्रैफिक विभाग, मुंबई पुलिस और BMC (P/North/R/South वार्ड) को इस भयानक खतरे से कोई फर्क क्यों नहीं पड़ रहा?

“शिकायत नहीं तो कार्रवाई नहीं”— कांदिवली ट्रैफिक विभाग का अजीबोगरीब फॉर्मूला!

‘वशिष्ठ वाणी’ पिछले कई महीनों से लगातार इस गंभीर मुद्दे पर रिपोर्टिंग कर रही है और लिखित शिकायतें भेज रही है। लेकिन प्रशासन का रवैया पूरी तरह ‘सुस्त और लाचार’ बना हुआ है।

हाल ही में जब ‘वशिष्ठ वाणी’ ने कुछ दिनों के लिए शिकायतें भेजना बंद किया, तो कांदिवली ट्रैफिक विभाग की पोल पूरी तरह खुल गई!

  • ट्रैफिक पुलिस का सीधा फॉर्मूला दिखता है: “जब तक मीडिया या जनता शिकायत करेगी, तब तक थोड़ा नाटक करेंगे; शिकायत बंद, तो कार्रवाई बंद!”
  • क्या कांदिवली ट्रैफिक विभाग के अधिकारियों की खुद की कोई जिम्मेदारी नहीं बनती?
  • क्या सरकारी गाड़ियों में राउंड मारकर अवैध कब्जे हटाना और सुरक्षा सुनिश्चित करना अधिकारियों का फर्ज नहीं है?

भारी-भरकम पढ़ाई, बड़ी-बड़ी डिग्रियां… और जनता की जान जोखिम में!

लाखों रुपये खर्च करके और प्रतियोगी परीक्षाएं पास करके प्रशासनिक पदों पर बैठने वाले अफसरों का दावा होता है कि वे जनता की सेवा करेंगे। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि इन पढ़े-लिखे अफसरों ने पूरी जनता को मौत के मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया है।

‘वशिष्ठ वाणी’ के सीधे और तीखे सवाल:

  1. क्या अफसरों को सिर्फ आँख बंद करके ‘मलाई’ छानना है? जब 24 घंटे एलपीजी सिलेंडरों से लदी गाड़ियाँ गैर-कानूनी तरीके से आवासीय परिसर के बाहर खड़ी रहती हैं, तो कांदिवली ट्रैफिक पुलिस को यह अवैध कब्जा क्यों नहीं दिखता?
  2. अगर कोई ब्लास्ट या हादसा होता है, तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? कांदिवली ट्रैफिक विभाग के वरिष्ठ अधिकारी या मुंबई पुलिस?
  3. बिना डिपो या सुरक्षित गोदाम के, खुली सड़क पर भारत गैस की गाड़ियों से लगातार सप्लाई किस कानून के तहत चल रही है?

लाचार सिस्टम में जनता कहाँ जाए?

जब लगातार कई महीनों तक जिम्मेदार मीडिया संस्थान ‘वशिष्ठ वाणी’ द्वारा शिकायतें करने के बावजूद हालात जस के तस बने रहें, तो यह साबित होता है कि सिस्टम पूरी तरह लाचार और संवेदनशील मुद्दों के प्रति अंधा हो चुका है।

भारत गैस के वाहन चालकों और एजेंसी मालिकों को अच्छी तरह पता है कि कांदिवली ट्रैफिक पुलिस उन पर कोई कड़ा चाबुक नहीं चलाएगी, इसीलिए वे बेखौफ होकर पूरी सड़क पर कब्जा जमाए बैठे हैं।

‘वशिष्ठ वाणी’ की अंतिम चेतावनी:

कांदिवली ट्रैफिक विभाग, BMC और मुंबई पुलिस ध्यान दे!

“अगर छत्रपति शिवाजी राजे कॉम्प्लेक्स के बाहर से इन एलपीजी सिलेंडर वाले वाहनों को तुरंत टो (Tow) करके जब्त नहीं किया गया और इस अवैध डिपो को बंद नहीं कराया गया, तो ‘वशिष्ठ वाणी’ इस जानलेवा लापरवाही का पूरा दस्तावेज मुंबई पुलिस कमिश्नर, फायर ब्रिगेड और माननीय उच्च न्यायालय (High Court) के समक्ष प्रस्तुत करेगी। जनता की सुरक्षा से खिलवाड़ अब किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं होगा!”

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