मुंबई/वशिष्ठ वाणी। मलाड स्थित NLAIJANA Co-Op. Housing Society Ltd और उसी परिसर में संचालित SHOBHA Diagnostic Centre को लेकर पार्किंग विवाद अब कानूनी मोड़ लेता दिखाई दे रहा है। पार्किंग व्यवस्था और कमर्शियल अनुमति को लेकर उठे सवालों के बीच दोनों पक्षों के बीच तीखी बयानबाज़ी सामने आई है।
6 फरवरी को भेजा गया था कानूनी नोटिस
वशिष्ठ मीडिया हाउस प्राइवेट लिमिटेड एवं समूह दैनिक समाचार पत्र के स्वामी-प्रकाशक अभिषेक वशिष्ठ ने अपने लीगल सलाहकार ओम प्रकाश मिश्रा के माध्यम से 6 फरवरी को नोटिस जारी कर महत्वपूर्ण सवाल उठाए थे।
नोटिस में पूछा गया था कि—
- जिस सोसायटी में बाहरी वाहनों की पार्किंग पर रोक बताई जा रही है,
- उसी परिसर में संचालित SHOBHA Diagnostic Centre को अनुमति किसने दी..?
- बिना पार्किंग व्यवस्था के संचालन की अनुमति किस प्राधिकरण द्वारा दी गई?
जवाब में ‘बदनाम करने’ का आरोप
मीडिया हाउस के अनुसार, नोटिस के जवाब में डायग्नोस्टिक सेंटर के डॉक्टरों की ओर से कहा गया कि उन्हें बदनाम किया जा रहा है। साथ ही यह भी उल्लेख किया गया कि पार्किंग की वैकल्पिक व्यवस्था कहीं और उपलब्ध है। यह जवाब से साफ झलकता है कि तीनों डॉक्टर यह कहना चाहतें हैं कि “चित भी मेरी, पट भी मेरी।”
हालांकि, वशिष्ठ मीडिया हाउस का कहना है कि—
- कथित वैकल्पिक पार्किंग का स्थान स्पष्ट नहीं किया गया,
- और मौके पर आने वाले मरीजों को इसकी जानकारी नहीं दी जाती।
उनका आरोप है कि जब मरीजों और उनके परिजनों को सोसायटी गेट पर रोका जाता है, तब सेंटर की ओर से कोई प्रतिनिधि बाहर आकर वैकल्पिक पार्किंग की जानकारी देता हुआ नहीं दिखता।
वीडियो होने का दावा
अभिषेक वशिष्ठ ने दावा किया है कि उनके पास घटना से संबंधित वीडियो मौजूद है, जिसमें पार्किंग को लेकर पूछे गए सवालों पर सोसायटी प्रतिनिधियों की तीखी प्रतिक्रिया सुनी जा सकती है।
सोसायटी के रुख पर भी सवाल
विवाद के दौरान कथित तौर पर सोसायटी की ओर से यह कहा गया कि बाहरी वाहनों को प्रवेश नहीं दिया जाएगा। वशिष्ठ मीडिया का आरोप है कि सवाल उठाने पर बहस की स्थिति बन गई और उन्हें कोर्ट जाने तक की बात कही गई।
हालांकि, इस संबंध में सोसायटी प्रबंधन की आधिकारिक विस्तृत प्रतिक्रिया अभी सार्वजनिक नहीं हुई है।
कोर्ट जाने की तैयारी
अभिषेक वशिष्ठ ने कहा है कि मामला अब कानूनी लड़ाई की ओर बढ़ रहा है और उनके लीगल सलाहकार जल्द ही न्यायालय का रुख करेंगे।
उन्होंने कहा कि उनका मुख्य प्रश्न केवल इतना है कि—
यदि सोसायटी परिसर में पार्किंग उपलब्ध नहीं है,
तो बिना पार्किंग के डायग्नोस्टिक सेंटर संचालन की अनुमति किस आधार पर दी गई?
अब सबकी नजर आधिकारिक जवाब पर
फिलहाल मामला आरोप-प्रत्यारोप के दौर में है। यदि यह विवाद अदालत तक पहुंचता है तो—
- सोसायटी के नियम,
- कमर्शियल अनुमति,
- और पार्किंग व्यवस्था
तीनों बिंदुओं की कानूनी जांच संभव है।
समाचार पत्र इस मामले में दोनों पक्षों का आधिकारिक पक्ष सामने आने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित करेगा।
आपकी भी है ऐसी कोई समस्या?
यदि आपके साथ भी किसी हाउसिंग सोसायटी द्वारा पार्किंग या कमर्शियल गतिविधि को लेकर परेशानी हुई है, तो हमें अवश्य लिखें। आपकी आवाज़ को भी समाचार में स्थान दिया जाएगा।
— (जारी)

