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मालाड में न्याय की नई किरण: सम्राट बागुल ने SRA के सीईओ महेंद्र कल्याणकर की कार्यशैली की खुलकर की तारीफ।

मुंबई (वशिष्ठ वाणी): आज के दौर में जब सरकारी फाइलों के अंबार और प्रशासनिक देरी के कारण अक्सर आम जनता और प्रशासन के बीच दूरियां देखी जाती हैं, तब कुछ अधिकारियों की कार्यशैली उम्मीद की एक नई किरण लेकर आती है। मालाड मालवणी गेट नंबर ८ स्थित स्टैंस बिल्डटेक रियलिटी (Stans Buildtech Realty) मामले में एसआरए (SRA) के सीईओ महेंद्र कल्याणकर द्वारा दिखाई गई संवेदनशीलता और तत्परता ने न केवल जटिल समस्या को सुलझाया, बल्कि जनता के बीच एक ईमानदार अधिकारी की छवि को भी और मजबूत किया है।

सम्राट बागुल ने की सीईओ की सराहना

मामले की गंभीरता को समझते हुए, जैसे ही ‘वशिष्ठ वाणी’ ने इस मुद्दे को सीईओ महेंद्र कल्याणकर के संज्ञान में लाया, उन्होंने बिना किसी देरी के न केवल फाइल को आगे बढ़ाया, बल्कि कानूनी बाधाओं को दूर करते हुए बीएमसी को स्पष्ट निर्देश भी जारी किए। इस त्वरित कार्रवाई पर सामाजिक कार्यकर्ता सम्राट बागुल ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए सीईओ महेंद्र कल्याणकर का आभार जताया।

सम्राट बागुल ने कहा, “प्रशासन जब संवेदनशील हो, तो बड़ी से बड़ी समस्या का हल निकलना संभव है। सीईओ महेंद्र कल्याणकर जी ने जिस तरह से इस मामले को प्राथमिकता दी और कानून का सम्मान करते हुए तुरंत कदम उठाया, वह काबिल-ए-तारीफ है। जब तक महेंद्र कल्याणकर जैसे अधिकारी पद पर हैं, तब तक आम जनता को न्याय की उम्मीद बनी रहेगी।”

‘वशिष्ठ वाणी’ का मानना: प्रशासन और पत्रकारिता का तालमेल है जरूरी

‘वशिष्ठ वाणी’ हमेशा से निष्पक्ष पत्रकारिता में विश्वास रखती है। हमारा उद्देश्य केवल गलतियों को उजागर करना नहीं, बल्कि उन अधिकारियों का मनोबल बढ़ाना भी है जो जनता की भलाई के लिए तत्पर रहते हैं। सीईओ महेंद्र कल्याणकर द्वारा फाइल पर की गई त्वरित कार्रवाई यह साबित करती है कि वे अपनी जिम्मेदारियों के प्रति पूरी तरह सजग हैं।

‘वशिष्ठ वाणी’ भी इस कदम की दिल से सराहना करती है। जब कोई अधिकारी जनता की समस्याओं को अपनी समस्या समझकर उसका निवारण करता है, तो उससे न केवल सिस्टम में सुधार आता है, बल्कि लोकतंत्र के प्रति लोगों का भरोसा भी बढ़ता है।

सुशासन का एक उदाहरण

महेंद्र कल्याणकर साहब, आपकी यह कार्यशैली न केवल आपके विभाग के अन्य अधिकारियों के लिए एक प्रेरणा है, बल्कि यह संदेश भी देती है कि यदि नीयत साफ हो, तो सरकारी दफ्तरों से भी न्याय की गंगा बह सकती है। ‘वशिष्ठ वाणी’ की टीम आपकी इस जनहितैषी पहल का स्वागत करती है और उम्मीद करती है कि मालाड की जनता को भविष्य में भी आपके मार्गदर्शन में ऐसे ही सहयोग मिलता रहेगा।

हम मानते हैं कि—“जहाँ सवाल ईमानदार हों और अधिकारी संवेदनशील, वहाँ न्याय की राहें हमेशा आसान होती हैं।”

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