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‘वशिष्ठ वाणी’ का बड़ा प्रहार: उप-निबंधक बी.एस. कटरे के खिलाफ फाइल की RTI, अब जवाबदेही तय करने की बारी!

मुंबई: मालवणी और मलाड क्षेत्र की को-ऑपरेटिव सोसायटियों में चल रहे भ्रष्टाचार और अवैध निर्माण के खिलाफ ‘वशिष्ठ वाणी’ ने अपनी मुहिम को और तेज कर दिया है। इसी कड़ी में, ‘वशिष्ठ वाणी’ के मालिक और प्रकाशक अभिषेक वशिष्ठ ने सहकारिता विभाग के उप-निबंधक (Sub-Registrar) बी.एस. कटरे के खिलाफ एक अत्यंत महत्वपूर्ण RTI दाखिल की है।

लंबे समय से मिल रही शिकायतों के बावजूद बी.एस. कटरे द्वारा की जा रही संदिग्ध चुप्पी और कार्रवाई न करने की नीति पर अब ‘वशिष्ठ वाणी’ ने कड़े सवाल खड़े किए हैं।

RTI के माध्यम से पूछे गए तीखे सवाल:

‘वशिष्ठ वाणी’ ने इस RTI के जरिए सहकारिता विभाग से निम्नलिखित चार बिंदुओं पर जवाब मांगा है:

  1. कार्रवाई का विवरण: समाना नगर गेट नंबर 8 स्थित सोसायटियों और डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम फेडरेशन के विरुद्ध अवैध निर्माण, ₹1,08,000 का जुर्माना और अवैध पार्किंग की शिकायतों पर विभाग अब तक क्या कर रहा है?
  2. बालासाहेब भगत को संरक्षण क्यों? स्वप्नपूर्ति सोसाइटी के अध्यक्ष बालासाहेब भगत के खिलाफ पिछले 4 वर्षों से मिल रही शिकायतों पर कोई कार्रवाई क्यों नहीं हुई? ‘वशिष्ठ वाणी’ ने इस मामले की फाइल नोटिंग्स की प्रमाणित प्रति मांगी है।
  3. फेडरेशन की वैधता पर सवाल: शुखसागर सोसाइटी द्वारा नाम वापस लेने के बाद भी फेडरेशन का पंजीकरण अभी तक रद्द क्यों नहीं किया गया?
  4. सुरक्षा से खिलवाड़: 300 किलो वजनी बोर्ड, जो पहले भी गिरकर दुर्घटना को न्योता दे चुका है, उस पर कोई कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

क्या बोले ‘वशिष्ठ वाणी’ के संपादक?

मालिक और प्रकाशक अभिषेक वशिष्ठ ने कहा, “सहकारिता विभाग के अधिकारी बी.एस. कटरे का रवैया यह दर्शाता है कि वे भ्रष्ट पदाधिकारियों को संरक्षण दे रहे हैं। 4 वर्षों तक एक ही व्यक्ति के खिलाफ शिकायतों को ठंडे बस्ते में डालना उनकी कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिन्ह लगाता है। अब RTI के जरिए सारा सच सामने आएगा और जवाबदेही तय होगी।”

अदालत के बाद RTI का डंडा:

गौरतलब है कि यह मामला पहले से ही सिविल कोर्ट में लंबित है। अब इस RTI ने उप-निबंधक के कार्यालय में खलबली मचा दी है। ‘वशिष्ठ वाणी’ ने स्पष्ट कर दिया है कि जनहित और निवासियों की सुरक्षा से खिलवाड़ करने वाले किसी भी अधिकारी को बख्शा नहीं जाएगा।

क्या बी.एस. कटरे RTI के जरिए पूछे गए इन कड़े सवालों का जवाब दे पाएंगे, या सहकारिता विभाग अपनी पुरानी परंपरा निभाते हुए इसे भी दबाने की कोशिश करेगा? ‘वशिष्ठ वाणी’ इस लड़ाई को निर्णायक मोड़ तक ले जाने के लिए प्रतिबद्ध है।


[वशिष्ठ वाणी]सच के साथ, जनता के साथ।

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