- प्रहलाद पाण्डेय की स्पेशल रिपोर्ट
वाराणसी/वशिष्ठ वाणी। यूपी के वाराणसी स्थित बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) में मंगलवार देर रात बड़ा तनाव फैल गया। एक मामूली सड़क दुर्घटना से शुरू हुआ मामला अचानक हिंसक टकराव में बदल गया, जिसमें छात्रों और सुरक्षाकर्मियों के बीच तीन घंटे तक पथराव, मारपीट और लाठीचार्ज हुआ। पुलिस को मौके पर पहुंचकर बल प्रयोग करना पड़ा, जिसके बाद भारी संख्या में सुरक्षा बल तैनात कर दिए गए।
हालांकि फिलहाल स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है, लेकिन कैंपस में तनाव अभी भी बना हुआ है।
विवाद कैसे शुरू हुआ?
घटना की शुरुआत राजा राम मोहन राय हॉस्टल के पास वाहन से एक छात्र के टकरा जाने से हुई। घायल छात्र के साथियों ने प्रॉक्टोरियल कार्यालय में शिकायत दर्ज कराने की कोशिश की, लेकिन कथित रूप से संज्ञान न लेने पर विवाद बढ़ गया।
प्रॉक्टोरियल बोर्ड के अनुसार, इससे पहले कुछ नकाबपोश छात्रों ने एक अन्य छात्र पर हमला किया था, जिसे सुरक्षाकर्मियों ने पकड़ा। इसी बीच बिरला हॉस्टल और अन्य हॉस्टलों के सैकड़ों छात्र जुट गए और सुरक्षाकर्मियों पर डंडे, रॉड व पत्थरों से हमला कर दिया।
हंगामा और हिंसा का दौर
एक प्रत्यक्षदर्शी के मुताबिक —
“शुरुआत मामूली बहस थी, लेकिन देखते ही देखते 300 से अधिक छात्रों की भीड़ ने गमले तोड़ दिए, कुर्सियां फेंकी और पोस्टर-बैनर फाड़ दिए। अफरा-तफरी का माहौल बन गया।”
रात करीब 11 बजे शुरू हुआ पथराव, तोड़फोड़ और लाठीचार्ज का सिलसिला सुबह 2 बजे तक चलता रहा। पुलिस के पहुंचने पर कुछ छात्रों ने पुलिस वाहनों को भी निशाना बनाया।
एसीपी भेलूपुर गौरव कुमार ने बताया—
“कई थानों की फोर्स और पीएसी को बुलाना पड़ा। हल्का बल प्रयोग कर स्थिति संभाली गई।”
सूत्रों के अनुसार घायलों की संख्या 100 से अधिक है, जिनमें छात्र, सुरक्षाकर्मी और पुलिसकर्मी शामिल हैं। सर सुंदरलाल अस्पताल में बड़ी संख्या में युवक इलाज के लिए पहुंचे — कई को सिर में चोटें आईं, हालांकि किसी की मौत की सूचना नहीं है।
सांस्कृतिक कार्यक्रम से भी जुड़ गया मामला
यह विवाद ऐसे समय में हुआ जब कैंपस में ‘काशी-तमिल संगमम्’ कार्यक्रम की तैयारियां चल रही थीं।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बुधवार को इस समारोह में शामिल होने वाले थे।
हिंसा के दौरान छात्रों ने कार्यक्रम के पोस्टर-बैनर फाड़ दिए और सजावट को नुकसान पहुंचाया।
छात्रों का आरोप है कि सुरक्षाकर्मियों ने अनावश्यक बल प्रयोग किया, जबकि प्रशासन इसे छात्रों की उग्रता का परिणाम बता रहा है।
प्रशासनिक कार्रवाई और आगे की चिंता
रातभर के बवाल के बाद कैंपस को छावनी में तब्दील कर दिया गया।
जिलाधिकारी और एसएसपी ने छात्र प्रतिनिधियों से मुलाकात कर शांति बहाल करने का आश्वासन दिया। कई छात्रों पर FIR दर्ज की गई है, लेकिन नाम सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।
विपक्षी दलों ने इसे “प्रशासनिक विफलता” बताते हुए उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
बीएचयू प्रशासन ने बुधवार को आपात बैठक बुलाई है, जिसमें छात्रों की मांगों और सुरक्षा व्यवस्था पर चर्चा होगी।
विशेषज्ञों की राय
विशेषज्ञों का मानना है—
अगर बढ़ते असंतोष को जल्द नहीं सुलझाया गया, तो यह बड़े छात्र आंदोलन का रूप ले सकता है।
फिलहाल कई छात्र सोशल मीडिया पर अपनी शिकायतें और चोटों की तस्वीरें साझा कर रहे हैं, जो तेजी से वायरल हो रही हैं।
बीएचयू के इतिहास में छात्र आंदोलनों का हिंसा में बदलना नया नहीं है, लेकिन यह घटना प्रशासन के लिए फिर से सवाल खड़े कर रही है —
सुरक्षा के साथ संवाद भी जरूरी है, ताकि स्थिति दोबारा न बिगड़े।


