मुंबई, मालाड: मुंबई की सड़कों पर चलना अब किसी चुनौती से कम नहीं है, लेकिन मालाड (वेस्ट) के न्यू लिंक रोड पर जो नज़ारा दिख रहा है, वह प्रशासन की नाकामी और भ्रष्टाचार की जीती-जागती मिसाल है। यहाँ पैदल चलने वालों के लिए बनाए गए फुटपाथ अब “बैनर माफिया” के कब्जे में हैं।
फुटपाथ नहीं, अब यह ‘बैनर का फ्रेम’ है
स्थानीय नागरिकों ने शिकायत की है कि फुटपाथ पर बाकायदा लोहे के बड़े-बड़े फ्रेम ठोक दिए गए हैं ताकि उन पर विज्ञापन और राजनीतिक बैनर लगाए जा सकें। आलम यह है कि राहगीरों को सड़क पर चलने को मजबूर होना पड़ रहा है। सबसे खतरनाक बात यह है कि ट्रैफिक सिग्नल्स पर भी बैनरों ने कब्जा कर लिया है, जिससे गाड़ी चलाने वालों को सिग्नल दिखाई नहीं देते और दुर्घटना का खतरा हर पल बना रहता है।
‘मलाईखोर’ अधिकारियों की चुप्पी पर सवाल
लोगों का सीधा आरोप है कि BMC (P-North Ward) के अधिकारी सब कुछ जानते हुए भी “तमाशबीन” बने हुए हैं। जनता का पूछना है:
- क्या फुटपाथ पर फ्रेम ठोकने की अनुमति BMC के Licence Department ने दी है?
- अगर यह अवैध है, तो अब तक इन पर बुलडोजर क्यों नहीं चला?
- क्या अधिकारियों की जेबें गरम की जा रही हैं, इसलिए जनता की सुरक्षा को ताक पर रख दिया गया है?
जनता की मांग: कार्रवाई हो या इस्तीफा दें!
हाईकोर्ट के स्पष्ट आदेश हैं कि फुटपाथ और सार्वजनिक जगहों पर अवैध होर्डिंग नहीं होनी चाहिए। लेकिन मालाड में कानून को ठेंगे पर रखा जा रहा है। लोगों का कहना है कि अगर जल्द ही ये लोहे के फ्रेम और बैनर नहीं हटाए गए, तो वे सड़क पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करेंगे।
मुख्य बिंदु जो प्रशासन को चुभेंगे:
- सिग्नल पर कब्जा: क्या किसी बड़े हादसे का इंतज़ार कर रहा है प्रशासन?
- फुटपाथ की घेराबंदी: बुजुर्गों और बच्चों के चलने की जगह को विज्ञापन का अड्डा बना दिया गया है।
- BMC की भूमिका: “मलाईखोरी” के चक्कर में आम आदमी की जान खतरे में।













