- वशिष्ठ वाणी: विशेष रिपोर्ट
मुंबई: मालाड वेस्ट के जन कल्याण नगर रोड (सेंट जूड स्कूल के सामने, दिव्या पार्क और बफिरा नगर) की बदहाली अब बीएमसी के शीर्ष नेतृत्व की कार्यप्रणाली पर सीधा सवालिया निशान खड़ा कर रही है। ‘वशिष्ठ वाणी’ द्वारा पिछले करीब 1 महीने से इस गंभीर मुद्दे पर लगातार ग्राउंड रिपोर्ट्स और खुलासे किए जा रहे हैं। हर बार कागजी कार्रवाई का ढोंग रचा जाता है, लेकिन बीएमसी अतिक्रमण विभाग के वरिष्ठ निरीक्षक प्रवीण वाघेला (Praveen Vaghela) की कथित ‘मेहरबानी’ के चलते हालात आज भी जस के तस बने हुए हैं।
शायद अधिकारी प्रवीण वाघेला को इस बात का पूरा भरोसा और अहंकार हो चुका है कि मीडिया चाहे जितनी खबरें छाप ले, बीएमसी कमिश्नर महोदया उन्हें नौकरी से थोड़ी न हटा देंगी! यही वजह है कि उनकी मनमानी और अवैध कब्जाधारियों को संरक्षण देने का खेल आज भी बेखौफ जारी है।
बीएमसी कमिश्नर अश्विनी भिड़े से ‘वशिष्ठ वाणी’ के सीधे और तीखे सवाल
अब जब स्थानीय स्तर के अधिकारी अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहे हैं, तो ‘वशिष्ठ वाणी’ सीधे बीएमसी कमिश्नर अश्विनी भिड़े (Ashwini Bhide) की टेबल पर यह मामला रखते हुए तीखे सवाल पूछ रहा है:
- दिखावे की कार्रवाई कब तक?: जब भी मीडिया या जनता आवाज उठाती है, तो खानापूर्ति के लिए एक दिन का नाटक कर दिया जाता है, लेकिन समस्या को जड़ से खत्म क्यों नहीं किया जाता? क्या बीएमसी प्रशासन सिर्फ शिकायतों को फाइलों में दबाने के लिए बैठा है?
- अधिकारी के हौसले इतने बुलंद क्यों?: जब एक महीने से लगातार सबूतों के साथ एक अधिकारी की मिलीभगत और लापरवाही सामने आ रही है, तो अब तक प्रवीण वाघेला के खिलाफ कोई अनुशासनात्मक या कड़ी विभागीय कार्रवाई क्यों नहीं की गई? क्या कमिश्नर कार्यालय के स्तर पर ऐसे लापरवाह अधिकारियों को खुली छूट प्राप्त है?
- क्या किसी बड़े हादसे का इंतजार है?: जन कल्याण नगर के फुटपाथ पर पूरी तरह कब्जा होने के कारण स्कूली बच्चे और आम नागरिक जान जोखिम में डालकर बीच सड़क पर चलने को मजबूर हैं। यदि यहाँ कोई दुर्घटना होती है, तो इसकी जवाबदेही किसकी होगी?
जनता का आक्रोश और अंतिम चेतावनी
प्रवीण वाघेला जैसे अधिकारियों की कार्यशैली ने साबित कर दिया है कि उन्हें जनता की सुरक्षा या शहर की सुंदरता से कोई लेना-देना नहीं है, उन्हें सिर्फ अपनी तिजोरी भरने से मतलब है।
‘वशिष्ठ वाणी’ अब इस भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी इस मुहिम को बीएमसी कमिश्नर के दरबार तक ले गया है। जनता यह देखना चाहती है कि क्या प्रशासनिक मुखिया इस भ्रष्ट सांठगांठ पर कोई ठोस कदम उठाती हैं या यह खेल यूं ही चलता रहेगा। जब तक जन कल्याण नगर का एक-एक इंच फुटपाथ अतिक्रमण मुक्त नहीं होता, तब तक हमारा यह तीखा पहरा जारी रहेगा!
















