लोकप्रिय विषयमहाराष्ट्रसम्पादकीयकवितास्वास्थ्यअपराधअन्यवीडियो

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, क्या आपकी नाक के नीचे बेखौफ हो चुके हैं अफसर? न्यू लिंक रोड बना कार शोरूमों और रेस्टोरेंटों का ‘निजी पार्किंग साम्राज्य’, गोरेगांव ट्रैफिक विभाग की चुप्पी पर बड़े सवाल!

  • वशिष्ठ वाणी | विशेष ग्राउंड रिपोर्ट

मुंबई ब्यूरो: महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री और गृह मंत्री देवेंद्र फडणवीस के कानून-व्यवस्था और सुशासन के दावों के बीच मुंबई की सड़कों से एक बेहद गंभीर स्थिति सामने आ रही है। मालाड वेस्ट से लेकर माइंडस्पेस तक फैले न्यू लिंक रोड की तस्वीर आज इस कदर बदल चुकी है कि यह सार्वजनिक सड़क आम नागरिकों, बुजुर्गों और स्कूली बच्चों के चलने के लिए नहीं, बल्कि रसूखदार कार शोरूमों, बाइक डीलरों और बड़े रेस्टोरेंटों की ‘निजी पार्किंग’ बनकर रह गई है।

गोरेगांव ट्रैफिक विभाग में नए वरिष्ठ अधिकारियों की तैनाती के बाद जनता को उम्मीद थी कि इस बेहाली से राहत मिलेगी, लेकिन ज़मीनी हकीकत इसके बिल्कुल विपरीत है। नए अधिकारियों के आने के बाद से न्यू लिंक रोड पर सड़कों और फुटपाथों पर अवैध कब्ज़े की समस्या और ज्यादा गहराती जा रही है, जिससे पूरे सिस्टम की मंशा और कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

1. मुख्य सड़क पर अवैध कब्ज़ा जमाने वाले 10 प्रमुख प्रतिष्ठान:

वशिष्ठ वाणी की पड़ताल में न्यू लिंक रोड के उन 10 स्थानों की सूची सामने आई है, जहाँ खुलेआम नियमों की अवहेलना हो रही है:

  1. टाटा कार्स शोरूम (पुनीत कार्स), चिंचोली बंदर: सड़क के ठीक दूसरी तरफ ‘नो पार्किंग’ (No Parking) का बोर्ड लगा होने के बावजूद, टाटा मोटर्स की गाड़ियां फुटपाथ और मुख्य सड़क पर लाइन से खड़ी रहती हैं।
  2. मोदी हुंडई शोरूम, चावड़ा कमर्शियल सेंटर: बार-बार की जन शिकायतों के बावजूद सड़क पर वाहन पार्क करने का सिलसिला जारी है; विभाग की कार्रवाई केवल कागजी खानापूर्ति तक सीमित दिखती है।
  3. एमजी मोटर कार शोरूम, न्यू लिंक रोड: ‘नो पार्किंग’ ज़ोन होने के बावजूद मुख्य सड़क पर खुलेआम दो-दो लाइन (Double Line) में गाड़ियां खड़ी करवाई जाती हैं, जिससे पूरा यातायात ठप हो जाता है।
  4. विनफास्ट शोरूम (अमरकुंज), माइंडस्पेस: नए खुले इस शोरूम के बाहर आते ही मुख्य मार्ग को निजी पार्किंग में तब्दील कर दिया गया है।
  5. प्राइड रेस्टोरेंट, इनऑर्बिट मॉल के पास: रेस्टोरेंट के बाहर ग्राहकों के वाहनों का अंबार लगा रहता है, जिससे मुख्य रास्ता पूरी तरह से बाधित हो जाता है।
  6. ग्रीन्स रेस्टोरेंट व दुकानें, लिंकवे एस्टेट: स्पष्ट ‘नो पार्किंग’ बोर्ड के नीचे बेधड़क वाहनों की पार्किंग जारी रहती है और स्थानीय प्रशासन मूकदर्शक बना रहता है।
  7. बीएम ऑटो गैरेज, न्यू लिंक रोड: सड़क किनारे गैरेज चलाने के साथ-साथ पूरे फुटपाथ पर अवैध कब्ज़ा जमा लिया गया है।
  8. मारुति सुज़ुकी एरिना (एक्ससेल ऑटोविस्टा), सुंदर नगर: बेतरतीब ढंग से पार्क की गई गाड़ियों के कारण आए दिन भीषण ट्रैफिक जाम की स्थिति पैदा होती है।
  9. फ्लैग रेस्टोरेंट, चिंचोली बंदर रोड: रेस्टोरेंट के बाहर कार्यक्रमों और वीकेंड पर लगने वाले भारी जमावड़े के बावजूद इलाके में यातायात प्रबंधन पूरी तरह नदारद नजर आता है।
  10. ऑटोरेस टीवीएस शोरूम, राम नगर: आम नागरिकों की छोटी-छोटी बाइकों पर कड़ा रुख अपनाने वाला ट्रैफिक विभाग, इस शोरूम के बाहर सड़क पर खड़ी बाइकों की लंबी कतारों पर कार्रवाई करने से कतराता दिखता है।

2. सिस्टम का दोहरा मापदंड: आम नागरिक पर तुरंत क्रेन, रसूखदारों को छूट क्यों?

इस पूरे मामले में सबसे चिंताजनक पहलू प्रशासन का दोहरा रवैया है। एक तरफ जहाँ आम मुंबईकर यदि गलती से अपनी गाड़ी सड़क किनारे कुछ मिनट के लिए खड़ी कर दे, तो ट्रैफिक पुलिस की क्रेन तुरंत पहुँचकर भारी जुर्माना लगा देती है। वहीं दूसरी तरफ, न्यू लिंक रोड पर बड़े-बड़े कमर्शियल शोरूम और रेस्टोरेंट जब मुख्य सड़क की पूरी लेन पर अपनी दर्जनों गाड़ियां खड़ी कर देते हैं, तब जिम्मेदार अधिकारियों की नज़रें अचानक बंद हो जाती हैं।

3. गृह मंत्रालय और ट्रैफिक विभाग के शीर्ष नेतृत्व पर तीखे सवाल:

  1. मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से सवाल: गृह विभाग सीधा आपके नियंत्रण में है। जब राज्य की राजधानी की प्रमुख सड़कों पर खुलेआम सार्वजनिक ज़मीन पर कब्ज़ा हो रहा है और 20-25 हजार नागरिकों की आवाजाही प्रभावित हो रही है, तो अधिकारियों की इस संवेदनहीनता पर आपकी सरकार कड़ा संज्ञान क्यों नहीं ले रही?
  2. गोरेगांव ट्रैफिक विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से सवाल: क्या ट्रैफिक विभाग की जिम्मेदारी केवल दफ़्तरों में बैठकर फाइलों का निपटारा करना है या ज़मीन पर उतरकर सड़कों को अतिक्रमण मुक्त कराना भी है? बार-बार शिकायतों के बावजूद इन 10 स्थानों पर स्थायी कार्रवाई क्यों नहीं की जाती?
  3. एसीपी (उत्तर परिक्षेत्र, वाहतूक) से सवाल: जब मातहत विभागों के अंतर्गत आने वाले इलाकों में ट्रैफिक व्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी है, तो उच्च अधिकारियों द्वारा इसका प्रभावी निरीक्षण (Supervision) क्यों नहीं किया जा रहा?

जनता को जवाब चाहिए:

सड़क पर चलने वाले राहगीर, स्कूल जाने वाले बच्चे और बुजुर्ग रोज़ाना इस अवैध पार्किंग के कारण अपनी सुरक्षा को जोखिम में डाल रहे हैं। यदि समय रहते इन मुख्य मार्गों से अवैध कब्ज़ों को नहीं हटाया गया और सड़कों को सुचारू नहीं किया गया, तो वशिष्ठ वाणी इस जनहित के मुद्दे को और अधिक उच्च स्तर पर उठाता रहेगा।

Join WhatsApp

Join Now

और पढ़ें

25 हज़ार जिंदगियों पर मंडरा रहा बारूद, एसीपी दफ्तर की अधिकारी बोलीं—”हमारा काम सिर्फ फोन करना है!”: मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस जी, आपके राज में बेखौफ अफसरों की यह ‘कागजी मेहरबानी’ कब तक?

म्हाडा के तत्कालीन अधिकारी माकणे का ‘काला चिट्ठा’ उजागर: ‘वशिष्ठ वाणी’ की खबर का बड़ा असर, अब शिवधाम कॉम्प्लेक्स के पीड़ितों ने खोली पोल!

मंत्रालय तक गूंजेगी प्रवीण वाघेला की करतूत! ‘वशिष्ठ वाणी’ के खुलासे के बाद भी जन कल्याण नगर फुटपाथ पर अवैध कब्जा जारी

गृह मंत्री देवेंद्र फडणवीस दें जवाब… कानून का राज या ‘खाकी’ की मनमानी? BNS 118 (1) में आरोपी खुलेआम, पीड़िता पर पुलिस चौकी में ‘डील’ का दबाव!

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस जी, जवाब दीजिए! क्या मालाड न्यू लिंक रोड को शोरूम्स और होटलों के हवाले गिरवी रख दिया गया है?

खाकी की खामोशी और BMC की बेबसी: ‘ग्रीन्स रेस्टोरेंट’ में रात 2:30 बजे तक सर्विस जारी, क्या बांगुर नगर पुलिस की ‘सेटिंग’ से टूट रहे नियम?

Leave a Comment