आज 11:00 बजे जब पीड़िता मालवणी पुलिस चौकी के कार्यालय पहुंची, तो इस ‘टेक्निकल सोच’ का क्या मतलब था?
मुंबई/वशिष्ठ वाणी: आज सुबह लगभग 11:00 बजे जब पीड़िता मालवणी पुलिस चौकी के कार्यालय पहुंची और उसने रो-रोकर आरोपियों की गिरफ्तारी की गुहार लगाई, तो आपका जवाब था— “हम टेक्निकल सोचेंगे।” रानीपुरी जी, जब एफआईआर में BNS 118 (1) जैसी गंभीर और गैर-जमानती (Non-Bailable) धारा दर्ज है, प्रत्यक्षदर्शियों (गवाहों) के बयान सामने हैं, तो ऐसी कौन सी ‘टेक्निकल पढ़ाई’ या नियम है जो आरोपियों की गिरफ्तारी पर रोक लगा रहा है? क्या एक बर्बरता की शिकार महिला को इंसाफ देने के बजाय ‘टेक्निकल बहानों’ की आड़ ली जा रही है?
वशिष्ठ वाणी सीधे मालवणी पुलिस की वरिष्ठ अधिकारी रानीपुरी जी और मुंबई पुलिस प्रशासन के सामने यह गंभीर सवाल रखती है:
1. प्रत्यक्षदर्शियों के बयान के बावजूद महिला अधिकारी की भूमिका पर सवाल!
पीड़िता के अनुसार, जब मालवणी पुलिस स्टेशन से एक महिला जांच अधिकारी घटनास्थल पर पहुंचीं, तो वहां मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों (गवाहों) ने साफ शब्दों में पुष्टि की कि पीड़िता और उनके पति के साथ बर्बरता से मारपीट की गई है, और आरोपी पक्ष अक्सर इसी तरह लड़ाई-झगड़ा व मारपीट करता है। लेकिन हैरान करने वाली बात यह है कि वही महिला अधिकारी जब मालवणी पुलिस चौकी पहुंचीं, तो उन्होंने गवाहों के बयान पर कार्रवाई करने के बजाय एक अनजान शख्स को फोन करके चौकी में बुला लिया।
2. पुलिस चौकी में बिचौलिए को बुलाकर 30-35 हजार के खर्चे से डराने वाला खेल!
पीड़िता ने सनसनीखेज खुलासा करते हुए बताया कि मौके पर जांच करने वाली उसी महिला अधिकारी द्वारा बुलाए गए अनजान व्यक्ति ने मालवणी पुलिस चौकी के भीतर पीड़िता पर सीधा दबाव बनाते हुए कहा:
“कोर्ट-कचहरी में 30,000 रुपये तुम्हारा खर्चा होगा और 30,000 रुपये मेरा खर्चा होगा। इससे बेहतर है कि आप मामले को यहीं रफा-दफा करो और समझौता कर लो।”
रानीपुरी, जवाब दीजिए: जिस महिला अधिकारी को निष्पक्ष जांच का जिम्मा सौंपा गया था, उसने गवाहों के कबूलनामे के बावजूद आरोपी को पकड़ने के बजाय एक बिचौलिए को फोन करके पुलिस चौकी में क्यों बुलाया? क्या मालवणी पुलिस स्टेशन में पीड़ितों को न्याय दिलाने के बजाय ‘समझौता’ कराने की नई कार्यशैली चल रही है?
3. गिरफ्तारी की मांग पर क्रॉस-केस और पति को उठाने का डर क्यों?
जब पीड़िता ने स्पष्ट रूप से कहा कि उसे न्याय चाहिए और आरोपी सलाखों के पीछे होना चाहिए, तो उल्टा उसे क्रॉस-एफआईआर का हवाला देकर डराने की कोशिश क्यों की गई? आपने कहा कि “एफआईआर तो तुम्हारे पति पर भी दर्ज है, फिर दोनों को उठाना पड़ेगा।” जब पीड़िता ने साफ कहा कि उनके पति निर्दोष हैं और पुलिस निष्पक्ष जांच के लिए स्वतंत्र है, फिर भी आरोपियों को गिरफ्तार न करने की जिद क्यों?
4. क्या मालवणी पुलिस की कार्यशैली कभी नहीं बदलेगी?
क्या मालवणी पुलिस चौकी का यह तय ढर्रा बन चुका है कि अधिकारी बदलते रहें, सीनियर बदलते रहें, लेकिन पीड़ितों को टहलाने और आरोपियों को बचाने का तरीका वही रहेगा?
सवालों पर सीनियर PI रानीपुरी का मौन!
वशिष्ठ वाणी मीडिया का खुलासा:
इस पूरे घटनाक्रम, गवाहों के बयानों को नजरअंदाज करने, महिला जांच अधिकारी द्वारा अनजान व्यक्ति को बुलाकर समझौते का दबाव बनाने के आरोपों पर जब वशिष्ठ वाणी की टीम ने वरिष्ठ पुलिस अधिकारी रानीपुरी को लिखित सवाल भेजकर आधिकारिक पक्ष जानना चाहा, तो उन्होंने पूरी तरह चुप्पी साध ली और कोई जवाब नहीं दिया।
आमतौर पर हर विषय पर प्रतिक्रिया देने वाली अधिकारी का इन सीधे सवालों पर मौन हो जाना यह साफ इशारा करता है कि मालवणी पुलिस के पास अपनी इस संदिग्ध कार्यप्रणाली का कोई कानूनी जवाब नहीं है।















