वशिष्ठ वाणी: विशेष रिपोर्ट
मुंबई: मालाड वेस्ट के न्यू लिंक रोड की तस्वीर अब पूरी तरह बदल चुकी है—यह रास्ता अब आम जनता के चलने के लिए नहीं, बल्कि रसूखदार कार शोरूमों, बाइक डीलरों और बड़े रेस्टोरेंटों का ‘निजी पार्किंग लॉट’ बनकर रह गया है। गोरेगांव ट्रैफिक विभाग में नए वरिष्ठ अधिकारियों की ताजपोशी के बाद जनता को उम्मीद थी कि व्यवस्था सुधरेगी, लेकिन हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। नए साहबों के आने के बाद से कार्रवाई पूरी तरह ठप है और उनकी खास ‘मेहरबानी’ के चलते न्यू लिंक रोड पर अवैध पार्किंग का यह नासूर दिन-ब-दिन और गहराता जा रहा है।
‘वशिष्ठ वाणी’ पिछले कई महीनों से इस गंभीर मुद्दे को लगातार उठा रहा है, लेकिन गोरेगांव ट्रैफिक विभाग के इन जिम्मेदार अधिकारियों के कान पर जूँ तक नहीं रेंगती। आइए, आपको सिलसिलेवार तरीके से बताते हैं कि कैसे न्यू लिंक रोड पर नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं और कौन-कौन से प्रतिष्ठान इस अवैध खेल में शामिल हैं:
1. टाटा कार्स शोरूम (पुनीत कार्स), चारमूर्ति कंपाउंड, न्यू लिंक रोड (एवरशाइन मॉल के पास, चिंचोली बंदर)
इस शोरूम के मालिक ने फुटपाथ और मुख्य सड़क को अपनी बपौती मानकर पूरी तरह से निजी पार्किंग बना लिया है। हद तो तब हो जाती है जब सड़क के ठीक दूसरी तरफ ‘नो पार्किंग’ (No Parking) का बोर्ड लगा होने के बावजूद, टाटा मोटर्स की गाड़ियां लाइन से बेतरतीब खड़ी रहती हैं और ट्रैफिक पुलिस आँखें मूंदे निकल जाती है।
2. मोदी हुंडई शोरूम, चावड़ा कमर्शियल सेंटर (फायर ब्रिगेड के पास, न्यू लिंक रोड, चिंचोली बंदर)
इस बड़े शोरूम का हाल भी कुछ अलग नहीं है। बार-बार शिकायतों के बावजूद यहाँ सड़क पर गाड़ियां पार्क करने का सिलसिला कभी नहीं रुकता। कागजी कार्रवाई का नाटक करने के बाद हालात फिर जस के तस हो जाते हैं।
3. एमजी मोटर कार शोरूम, न्यू लिंक रोड
यहाँ नियमों की ऐसी धज्जियां उड़ाई जाती हैं कि मुख्य सड़क पर ‘नो पार्किंग’ का बोर्ड होने के बावजूद एमजी की गाड़ियां खुलेआम दो-दो लाइन (Double Line) में पार्क करवाई जाती हैं, जिससे पीछे का पूरा ट्रैफिक बाधित होता है।
4. विनफास्ट शोरूम (अमरकुंज), राजन पाड़ा, माइंडस्पेस
हाल ही में खुले इस नए शोरूम ने आते ही गोरेगांव ट्रैफिक विभाग के नए वरिष्ठ अधिकारी की मेहरबानी का पूरा फायदा उठाना शुरू कर दिया है। इन्होंने भी उद्घाटन के साथ ही न्यू लिंक रोड को अपनी प्राइवेट पार्किंग में तब्दील कर लिया है।
5. प्राइड रेस्टोरेंट, इनऑर्बिट मॉल के पास, माइंडस्पेस
इस रेस्टोरेंट के बाहर सड़क पर लगने वाले वाहनों के अंबार को हटाने में गोरेगांव ट्रैफिक विभाग के अधिकारी पूरी तरह नाकाम साबित हुए हैं। यहाँ आने वाले ग्राहकों की गाड़ियां मुख्य रास्ते को जाम कर देती हैं।
6. ग्रीन्स रेस्टोरेंट व आसपास की दुकानें, लिंकवे एस्टेट, माइंडस्पेस
यहाँ सड़क पर बेधड़क अवैध पार्किंग का बाजार सजा रहता है। स्पष्ट ‘नो पार्किंग’ बोर्ड होने के बावजूद यहाँ के स्थानीय दुकानदारों और रेस्टोरेंट के बाहर अवैध वाहनों का कब्जा रहता है, और ट्रैफिक विभाग के साहब कुंभकर्णी नींद सोए रहते हैं।
7. बीएम ऑटो गैरेज, न्यू लिंक रोड
इन्होंने गैरेज तो सड़क के किनारे खोल ही लिया है, साथ ही पूरे फुटपाथ पर भी अवैध कब्जा जमा लिया है। जब कभी शिकायत होती है, तो दिखावे के लिए एक आध बार खानापूर्ति कर दी जाती है, लेकिन उसके तुरंत बाद हालात फिर से पहले जैसे हो जाते हैं।
8. मारुति सुज़ुकी एरिना (एक्ससेल ऑटोविस्टा), सिद्धांचल आर्केड (इनऑर्बिट मॉल के पास, सुंदर नगर)
यहाँ सड़क पर इस कदर बेतरतीब ढंग से गाड़ियां पार्क की जाती हैं कि आए दिन भीषण ट्रैफिक जाम लग जाता है। इसके बावजूद ट्रैफिक विभाग के अधिकारी यहाँ से गाड़ियां हटवाने में पूरी तरह असमर्थ और नदारद नजर आते हैं।
9. फ्लैग रेस्टोरेंट, चिंचोली बंदर रोड
गोरेगांव ट्रैफिक विभाग के वरिष्ठ अधिकारी इस रेस्टोरेंट पर कुछ ज्यादा ही ‘मेहरबान’ हैं। स्थिति यह है कि आप शिकायत करते रह जाइए, लेकिन जब तक फ्लैग रेस्टोरेंट का मालिक खुद न चाहे, तब तक ट्रैफिक विभाग का कोई नुमाइंदा उधर झांकने भी नहीं आएगा। और जिस दिन इस रेस्टोरेंट में कोई बर्थडे पार्टी या बड़ा इवेंट हो, उस दिन तो आप भूल ही जाइए कि गोरेगांव ट्रैफिक विभाग का कोई भी अधिकारी इस इलाके में नजर आएगा!
10. ऑटोरेस टीवीएस शोरूम, पानाचे हाउस (क्लाउड नाइन अस्पताल के पास, राम नगर)
आप पूरे न्यू लिंक रोड पर देखेंगे कि ट्रैफिक पुलिस छोटी-छोटी बाइकों को तुरंत क्रेन से उठाकर ले जाती है—यह मुंबईकरों के लिए आम नजारा है। लेकिन जैसे ही पुलिस की नजरें टीवीएस शोरूम के पास पहुंचती हैं, उनकी आँखें बंद हो जाती हैं! यहाँ सड़क पर बाइकों की लंबी लाइनें पार्क रहती हैं, लेकिन ट्रैफिक पुलिस इन्हें छूने की हिम्मत भी नहीं जुटा पाती।
गोरेगांव ट्रैफिक विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की कार्यशैली पर गंभीर सवाल
इन तमाम सबूतों और धरातल की सच्चाई से साफ जाहिर है कि बिना ऊपर से लेकर नीचे तक की मिलीभगत और ‘मलाई’ के कोई भी शोरूम या रेस्टोरेंट संचालक इस तरह मुख्य सड़कों और फुटपाथों पर अवैध कब्जा नहीं चला सकता।
जनता अब खुलेआम सवाल पूछ रही है कि क्या गोरेगांव ट्रैफिक विभाग के नए वरिष्ठ अधिकारी सिर्फ एसी कमरों में बैठने और अपनी तिजोरी भरने के लिए आए हैं? आम जनता का सड़क पर चलना मुहाल हो चुका है, स्कूली बच्चों और बुजुर्गों की जान खतरे में है, लेकिन इन अधिकारियों को जनता की परेशानी से क्या लेना-देना? जब तक ऐसे लापरवाह और भ्रष्ट तंत्र के खिलाफ सख्त प्रशासनिक कार्रवाई नहीं होगी, तब तक न्यू लिंक रोड की सूरत नहीं बदलेगी।
‘वशिष्ठ वाणी’ प्रशासन की इस खुली मिलीभगत और पक्षपातपूर्ण रवैये को इसी तरह बेनकाब करता रहेगा!











