- वशिष्ठ वाणी: विशेष रिपोर्ट
मुंबई: मालाड वेस्ट के जन कल्याण नगर रोड (सेंट जूड स्कूल के सामने, दिव्या पार्क और बफिरा नगर) का यह मामला अब सिर्फ एक स्थानीय अतिक्रमण तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह बीएमसी के प्रशासनिक तंत्र, भ्रष्टाचार और अधिकारियों की जवाबदेही पर एक बड़ा राष्ट्रीय सवाल बन चुका है। ‘वशिष्ठ वाणी’ द्वारा तमाम पर्दाफाश करने और जमीनी हकीकत उजागर करने के बावजूद, बीएमसी अतिक्रमण विभाग के वरिष्ठ निरीक्षक प्रवीण वाघेला (Praveen Vaghela) की कार्यशैली में एक तिनके भर का भी सुधार नहीं आया है।
खबर छपने और पोल खुलने के बाद भी अधिकारी प्रवीण वाघेला ने उस क्षेत्र को पूरी तरह अतिक्रमण मुक्त कराने के बजाय अपनी ‘मेहरबानी’ का सिलसिला जारी रखा है। अब वक्त आ गया है कि इस मामले की गूंज बीएमसी कमिश्नर, नगर प्रशासन मंत्रालय और महाराष्ट्र सरकार के दरबार तक पहुँचे, ताकि इन बेलगाम अधिकारियों की मनमानी पर कानूनी शिकंजा कसा जा सके।
मंत्रालय और बीएमसी के वरिष्ठ अधिकारियों के सामने खड़े गंभीर सवाल
जब एक जिम्मेदार सरकारी अधिकारी मीडिया के सामने बड़े-बड़े दावे करे, “प्रतिदिन कार्रवाई” का झूठा आश्वासन दे और धरातल पर अपराधियों व अवैध कब्जाधारियों को खुला संरक्षण दे, तो यह सीधे तौर पर प्रशासनिक भ्रष्टाचार और पदीय दुरुपयोग की श्रेणी में आता है। बीएमसी के उच्चाधिकारियों और शासन को यह समझना होगा कि:
- कागजी दावे बनाम धरातल का सच: मीडिया को फोटो-सेशन के लिए दिखावटी कार्रवाई दिखाना और उसके महज 30 मिनट के भीतर सांठगांठ के जरिए उसी फुटपाथ पर दोबारा कब्जा करवा देना—यह किस नियम के तहत सही है?
- किसके इशारे पर चल रहा है यह खेल?: स्थानीय जनता और राहगीर रोज जान जोखिम में डालकर बीच सड़क पर चलने को मजबूर हैं, स्कूली बच्चों की सुरक्षा दांव पर है, लेकिन प्रवीण वाघेला की नींद तब भी नहीं टूटती। क्या बीएमसी के वरिष्ठ अधिकारी यह देखना चाहते हैं कि यहाँ कोई बड़ा हादसा हो, तब जाकर विभागीय जाँच बैठाई जाए?
- मलाई का गठजोड़: जब जनता खुलेआम यह सवाल पूछ रही है कि इस अवैध कब्जे से मिलने वाली ‘मलाई’ का हिस्सा ऊपर तक पहुँच रहा है, तब तक बीएमसी प्रशासन इस पर खामोश क्यों है?
‘वशिष्ठ वाणी’ की सीधी और अंतिम ललकार
‘वशिष्ठ वाणी’ अपनी इस ग्राउंड रिपोर्ट के माध्यम से बीएमसी के शीर्ष अधिकारियों, स्थानीय निकाय के प्रमुखों और महाराष्ट्र सरकार के प्रशासनिक तंत्र से यह स्पष्ट माँग करता है कि:
- वरिष्ठ निरीक्षक प्रवीण वाघेला की इस संदिग्ध और संदेहास्पद कार्यशैली की उच्चस्तरीय (High-Level) विभागीय जाँच बैठाई जाए।
- जन कल्याण नगर के इस फुटपाथ को तत्काल प्रभाव से हमेशा के लिए स्थायी रूप से अतिक्रमण मुक्त किया जाए और यदि दोबारा कब्जा हो, तो संबंधित अधिकारी पर सीधे अनुशासनात्मक कार्रवाई हो।
जब तक भ्रष्ट और लापरवाह अधिकारियों की कुंभकर्णी नींद नहीं टूटेगी, तब तक ‘वशिष्ठ वाणी’ अपनी तीखी कलम और बेबाक पहरे से इन चेहरों को बेनकाब करता रहेगा। शासन और प्रशासन को अब यह तय करना होगा कि वे जनता के साथ हैं या इन मलाईखोर अधिकारियों के साथ!














