- वशिष्ठ वाणी | ग्राउंड रिपोर्ट
मुंबई ब्यूरो: देश की आर्थिक राजधानी मुंबई के कांदिवली (पश्चिम) स्थित भूमि पार्क रोड और छत्रपति शिवाजी राजे कॉम्प्लेक्स के बाहर जनसुरक्षा से खिलवाड़ का एक खौफनाक खेल जारी है। ‘भारत गैस’ द्वारा मुख्य सार्वजनिक सड़क को ही खुला गोदाम बनाकर रोजाना दर्जनों एलपीजी सिलेंडरों से लदे ट्रकों की अवैध लोडिंग-अनलोडिंग की जा रही है। आसपास रहने वाले 20 से 25 हजार स्थानीय निवासियों की सांसें हर पल एक बड़े संभावित विस्फोट के मुहाने पर टंगी हैं, लेकिन जिम्मेदार ट्रैफिक विभाग और गृह मंत्रालय की नींद टूटने का नाम नहीं ले रही।
जब इस खतरनाक लापरवाही पर वशिष्ठ वाणी की टीम ने सूचना के अधिकार (RTI) के तहत कांदिवली ट्रैफिक विभाग से पिछले दो वर्षों में की गई कार्रवाई का ब्योरा मांगा, तो पुलिस प्रशासन की जो पोल खुली, वह सीधे तौर पर महाराष्ट्र के गृह विभाग और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के प्रशासनिक दावों पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
1. आरटीआई का ‘टालमटोल मॉडल’: “सूची और रिकॉर्ड हमारे बस की बात नहीं!”
सहायक पुलिस आयुक्त (ACP), उत्तर परिक्षेत्र कार्यालय द्वारा दिए गए आधिकारिक जवाब में प्रशासनिक पल्ला झाड़ने का शर्मनाक पैटर्न सामने आया:
- “रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं”: ट्रैफिक पुलिस ने लिखित रूप से कहा कि भूमि पार्क रोड पर लाइन से खड़ी भारत गैस की गाड़ियों पर हुई कार्रवाई का कोई अलग रिकॉर्ड उनके पास उपलब्ध ही नहीं है।
- “शिकायतकर्ता खुद दफ्तर आकर रिकॉर्ड खोजे”: RTI अधिनियम की धारा 2(झ)(एक) का हवाला देते हुए पुलिस ने शिकायतकर्ता को ही कांदिवली ट्रैफिक विभाग के दफ्तर आकर कंप्यूटर सिस्टम में रिकॉर्ड खंगालने का फरमान सुना दिया।
सड़क पर खुलेआम दर्जनों गाड़ियां खड़ी हैं, पूरा रोड लॉक किया जा रहा है, लेकिन अधिकारियों के पास रिकॉर्ड तक नहीं है। यह साफ दर्शाता है कि आम जनता को दफ्तरों के चक्कर कटवाकर इस अवैध धंधे पर पर्दा डालने का काम किया जा रहा है।
2. ग्राउंड रियलिटी: 266 चालान काटने के बाद भी पुलिस का खौफ ‘शून्य’
RTI के दूसरे पन्ने पर पुलिस ने खुद माना कि वर्ष 2026 में नागरिकों की शिकायतों पर 266 ई-चालान (E-Challans) काटे गए हैं।
लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि 266 चालान कटने के बावजूद सड़क पर अवैध गैस गोदाम और गाड़ियों का जमावड़ा जस का तस बना हुआ है, तो इसका सीधा मतलब है कि पुलिस का खौफ पूरी तरह खत्म हो चुका है। चालान सिर्फ कागजी खानापूर्ति बनकर रह गया है और अवैध काम करने वालों के हौसले बुलंद हैं।
3. ‘वरिष्ठों को अवगत कराएंगे’ कहने के बजाय सीधा इनकार!
RTI जवाब की सूचना देने के लिए जब एसीपी (ACP) कार्यालय से एक अधिकारी का फोन आया, तो वशिष्ठ वाणी की टीम ने उन्हें मौके की गंभीर स्थिति से अवगत कराते हुए कड़ा सवाल पूछा:
वशिष्ठ वाणी:“आपने आरटीआई का कागजी जवाब तो दे दिया, लेकिन मौके पर भूमि पार्क रोड पर आज भी भारत गैस द्वारा खुलेआम गोदाम बनाकर अवैध काम चलाया जा रहा है। वहां कई हजार परिवारों और 20-25 हजार लोगों की जान से खिलवाड़ हो रहा है। आप लोग इस पर कड़ी कार्रवाई क्यों नहीं करते?”
ACP कार्यालय की अधिकारी:“अभी मैं इस विषय में आपसे कोई बात नहीं कर सकती। हमारा काम सिर्फ आरटीआई के बारे में आपको सूचित करना है और मैं सिर्फ इसी बारे में बात कर सकती हूं। इसके अलावा मैं किसी विषय पर बात नहीं कर सकती, मेरा सिर्फ यही काम है।”
एक जिम्मेदार अधिकारी चाहतीं तो यह भी कह सकती थीं कि “हम मामले का संज्ञान लेकर अपने सीनियर अधिकारियों और कमिश्नर साहब को अवगत कराएंगे।” लेकिन इसके बजाय उन्होंने जनसुरक्षा के इतने संवेदनशील मुद्दे को सिरे से खारिज कर दिया।
इस गैर-जिम्मेदाराना रवैये पर वशिष्ठ वाणी की टीम ने भी तंत्र को आईना दिखाते हुए कहा:
“बहुत अच्छी बात है! अगर आपका यही काम है तो बहुत अच्छी बात है।”
संपादकीय दृष्टिकोण: मुख्यमंत्री जी, क्या किसी बड़े हादसे के बाद ‘जांच का नाटक’ होगा?
यह पूरा घटनाक्रम सोच और सिस्टम के निकम्मेपन पर सोचने को मजबूर करता है:
- कार्रवाई का कोई डर नहीं: अधिकारियों को भली-भांति पता है कि मीडिया में खबर छपने या जनता के चिल्लाने से उनका कुछ नहीं बिगड़ने वाला। ज्यादा से ज्यादा क्या होगा? एक तबादला (Transfer)! और वह भी अपने नियत समय पर ही होगा, तुरंत कोई कार्रवाई नहीं होगी। इसी बेफिक्री की वजह से अधिकारी खुलेआम चल रहे अवैध कामों पर आंखें मूंदे रहते हैं।
- हादसे के बाद का घड़ियाली आंसू: अगर आज इस अवैध गैस गोदाम में एक छोटी सी चिंगारी से बड़ा विस्फोट हो जाए और सैकड़ों बेकसूरों की जान चली जाए, तो यही मंत्री और बड़े अधिकारी मौके पर पहुंचेंगे, मुआवजे का ऐलान करेंगे और “जांच कमेटी” बैठाने का नाटक करेंगे। सवाल यह है कि समय रहते कार्रवाई करने से अधिकारी और मंत्री क्यों कतराते हैं?
- मीडिया की सीमा और सिस्टम का फायदा: मीडिया का काम सच दिखाना और अपनी कलम से व्यवस्था पर सवाल उठाना है। मीडिया के पास बुलडोजर चलाने या निलंबित करने की पुलिसिया पावर नहीं है। इसी लाचारी का फायदा नेता और अधिकारी मिलकर उठाते हैं—उन्हें पता है कि मीडिया लिखेगी और शांत हो जाएगी, कुर्सी तो उन्हीं की सुरक्षित है।
‘वशिष्ठ वाणी’ का सीधा सवाल मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से:
गृह विभाग आपके पास है, प्रशासन आपका है। कांदिवली के 25 हजार नागरिकों की जान पर लटक रही इस तलवार पर आपकी पुलिस ‘पल्ला झाड़ो नीति’ अपना रही है। क्या आप समय रहते इन बेखौफ अधिकारियों और अवैध गैस चालकों पर कठोर और दंडात्मक कार्रवाई करेंगे, या फिर मुंबई किसी और बड़े हादसे का इंतजार करेगी?
















