मुंबई / नई दिल्ली: क्या सरकारी पदों पर बैठे अधिकारी अब खुद को कानून और जनता से ऊपर समझने लगे हैं? मुंबई में म्हाडा (MHADA) के एक जिम्मेदार पद पर बैठे अधिकारी की तानाशाही इसका जीता-जागता सबूत है। जब रक्षक ही व्यवस्था को ठेंगा दिखाने लगे, तो देश की कानून व्यवस्था किस दिशा में जाएगी?
इसी गंभीर तानाशाही को उजागर करते हुए ‘वशिष्ठ वाणी’ सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी का ध्यान मुंबई के एक ऐसे मामले की तरफ खींच रहा है, जहां एक सरकारी अफसर ने न सिर्फ अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ लिया, बल्कि सच्चाई दिखाने वाले मीडिया का नंबर तक ब्लॉक कर दिया।
🚨 मुख्य आरोपी अधिकारी: संतोष कांबले (म्हाडा, क्षेत्र निर्माण, गोरेगांव)

‘वशिष्ठ वाणी’ प्रधानमंत्री जी को बताना चाहता है कि म्हाडा (क्षेत्र निर्माण, गोरेगांव) के पद पर तैनात अधिकारी संतोष कांबले पूरी तरह निरंकुश हो चुके हैं। जब मालवणी सामना नगर, गेट नंबर 8 पर स्थित आपातकालीन (Emergency) रास्ते को अवैध पार्किंग में तब्दील करने
और वहां की ‘ओम सिद्धिविनायक सोसाइटी’ के चेयरमैन व सचिव द्वारा 15 वर्ष पुराने पानी के टैंक को इवेंट स्पॉट (अवैध निर्माण) बना देने की गंभीर शिकायत लेकर मीडिया ने इन्हें फोन किया, तो इनका गैर-जिम्मेदाराना जवाब था— “मीडिया के कहने पर हम कुछ नहीं करेंगे।”

बात सिर्फ इतनी नहीं है, सच्चाई और सबूतों का सामना करने से डरकर इस अधिकारी ने जांच करने के बजाय मीडिया का नंबर ही ब्लॉक कर दिया। यह सीधे तौर पर लोकतंत्र के चौथे स्तंभ का अपमान और अपने कर्तव्यों की घोर अवहेलना है।
⚠️ उच्च अधिकारी और सरकार भी मूकदर्शक!

जनता और मीडिया की इस गंभीर आवाज को सिर्फ म्हाडा के निचले अधिकारी ही नहीं, बल्कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और म्हाडा के वाइस प्रेसिडेंट (VP) संजीव जायसवाल भी लगातार अनदेखा कर रहे हैं। जब राज्य के मुखिया और विभाग के सबसे बड़े अधिकारी ही खबरों और सबूतों से आंखें मूंद लेंगे, तो संतोष कांबले जैसे अधिकारियों के हौसले बुलंद होना स्वाभाविक है। इन्हें मंत्रियों और उच्च अधिकारियों की इस चुप्पी का पूरा भरोसा है, इसीलिए इन्हें किसी कार्रवाई का डर नहीं है।
⚡ पीएम मोदी जी से ‘वशिष्ठ वाणी’ की पुरजोर मांग:
प्रधानमंत्री जी, आपकी ‘ना खाऊंगा, ना खाने दूंगा’ और ‘भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस’ की नीति को ये अधिकारी मुंबई में मटियामेट कर रहे हैं। इसीलिए ‘वशिष्ठ वाणी’ आपसे ऐसे सख्त कानून की मांग करता है:
- सीधे पद से बर्खास्तगी का कानून: अधिकारियों के मन में केवल तबादले का नहीं, बल्कि नौकरी जाने का खौफ होना चाहिए। कानून ऐसा हो कि अगर प्रमाण देने के बाद भी कोई अधिकारी २ दिन में कार्रवाई नहीं करता या शिकायतकर्ता का नंबर ब्लॉक कर भागता है, तो उसे सस्पेंड नहीं, सीधे नौकरी से बर्खास्त (Dismiss) किया जाए।
- अधिकारियों की सीधी जवाबदेही: चाहे सिर पर किसी भी मंत्री या वीपी का हाथ हो, जनता के आपातकालीन रास्तों और सरकारी संपत्तियों से खिलवाड़ करने वाले अधिकारियों को जेल की सलाखों के पीछे भेजा जाना चाहिए।
‘वशिष्ठ वाणी’ का यह ऑन-रिकॉर्ड शंखनाद है: हम इस तानाशाही के खिलाफ झुकेंगे नहीं। पीएम मोदी जी, अब समय आ गया है कि संतोष कांबले जैसे बेलगाम अधिकारियों पर ऐसा हंटर चलाया जाए कि पूरी अफसरशाही सीधे रास्ते पर आ जाए!











