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बड़ी खबर: ४८ घंटे बाद भी एकता नगर में डटे हैं ‘मौत के ट्रक’; कांदिवली ट्रैफिक पुलिस और RTO की रहस्यमयी चुप्पी!

प्रशासनिक नाकामी: ‘वशिष्ठ वाणी’ की लगातार चेतावनियों के बाद भी छत्रपति शिवाजी राजे कॉम्प्लेक्स के बाहर नहीं बदला परिदृश्य।

ब्यूरो, मुंबई (वशिष्ठ वाणी): कांदिवली (पश्चिम) के एकता नगर स्थित छत्रपति शिवाजी राजे कॉम्प्लेक्स के २५ हजार परिवारों को खतरे में डालने वाले भारत गैस के अवैध सिलेंडरों से भरे ट्रकों का मामला अब पूरी तरह से प्रशासनिक ढिठाई का शिकार हो चुका है। ‘वशिष्ठ वाणी’ द्वारा इस गंभीर जनहित के मुद्दे को लगातार उठाए जाने के बाद आज ४८ घंटे से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन जमीनी हकीकत गवाही दे रही है कि व्यवस्था इस बारूद के ढेर को हटाने के मूड में बिल्कुल नहीं है। मुख्य सड़क पर यमराज बनकर खड़े ये ज्वलनशील वाहन आज भी उसी सीनाजोरी के साथ डटे हुए हैं।

कांदिवली ट्रैफिक विभाग की ‘रहस्यमयी’ खामोशी: क्या हो रही है कोई कार्रवाई?

जनता के बीच अब यह बड़ा और तीखा सवाल उठ रहा है कि क्या कांदिवली ट्रैफिक विभाग वाकई इस अवैध पार्किंग के खिलाफ कोई ठोस कदम उठा रहा है, या फिर सिर्फ फाइलों को इधर से उधर घुमाया जा रहा है? धरातल पर ट्रकों की यथास्थिति को देखकर यह अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं है कि विभाग की कथित ‘कार्रवाई’ सिर्फ कागजों तक सीमित है। आम जनता जानना चाहती है कि जिस ट्रैफिक पुलिस को आम दोपहिया या चार पहिया वाहनों पर चालान ठोकने में चंद सेकंड का वक्त लगता है, उसे रिहायशी इलाके के बीचों-बीच खड़े इन १० से १४ भारी विस्फोटक वाहनों पर सख्त कानूनी एक्शन लेने में कौन सा ‘दबाव’ रोक रहा है?

मुंबई RTO का ‘नो रिस्पॉन्स’: जवाबदेही से भागता परिवहन तंत्र

इस पूरे मामले में सबसे गैर-जिम्मेदाराना रवैया मुंबई आरटीओ (RTO) का सामने आया है। ‘वशिष्ठ वाणी’ की खोजी टीम ने जब मुंबई आरटीओ के जिम्मेदार अधिकारियों से इस खुली लापरवाही और कमर्शियल वाहनों के अवैध ठहराव पर उनका आधिकारिक वर्जन जानना चाहा, तो उनकी तरफ से कोई भी जवाब नहीं दिया गया। आरटीओ द्वारा कार्रवाई की जानकारी छुपाना और इस गंभीर विषय पर चुप्पी साध लेना साफ इशारा करता है कि तंत्र अपनी विफलताओं और भारत गैस एजेंसी के साथ अपनी कथित साठगांठ को उजागर नहीं होने देना चाहता। आखिर आरटीओ इस मामले पर जवाब देने से क्यों कतरा रहा है?

२५ हजार लोगों की जिंदगी पर भारी ‘अफ़सरशाही’

एकता नगर की जनता इस बात से बेहद आक्रोशित है कि स्थानीय नागरिकों की सुरक्षा को पूरी तरह से भगवान भरोसे छोड़ दिया गया है। किसी भी शॉर्ट-सर्किट या अप्रत्याशित हादसे की स्थिति में होने वाले भारी जान-माल के नुकसान की जिम्मेदारी किसकी होगी? क्या मुंबई आरटीओ और कांदिवली ट्रैफिक चौकी केवल किसी बड़ी तबाही के बाद ही अपनी नींद से जागेंगे?

‘वशिष्ठ वाणी’ की कानूनी टीम अब सीधे कोर्ट का खटखटाएगी दरवाजा

चूंकि स्थानीय अधिकारियों की तरफ से न तो कोई संतोषजनक जवाब मिल रहा है और न ही जमीनी स्तर पर इन खतरनाक ट्रकों को हटाया जा रहा है, इसलिए ‘वशिष्ठ वाणी’ अब इस मूकदर्शक बने सिस्टम को और अधिक वक्त देने के मूड में नहीं है। हमारी लीगल टीम इन पिछले तीन दिनों के लगातार जमीनी सुबूतों (Current Visual Evidence) और अधिकारियों की इस उदासीनता को लेकर सीधे परिवहन आयुक्त कार्यालय, लोकायुक्त और माननीय न्यायालय के समक्ष एक औपचारिक याचिका दायर करने जा रही है। अगर प्रशासन जनता के प्रति अपनी जवाबदेही भूल चुका है, तो अब कानून के डंडे से अधिकारियों की जवाबदेही तय करवाई जाएगी।

डिस्क्लेमर (Disclaimer): यह रिपोर्ट पूर्णतः जनहित और सार्वजनिक सुरक्षा को ध्यान में रखकर किया गया एक खोजी फॉलो-अप विश्लेषण है। ‘वशिष्ठ वाणी’ का उद्देश्य किसी सरकारी विभाग की छवि को ठेस पहुंचाना नहीं, बल्कि व्यवस्था में पारदर्शिता और कानून व्यवस्था की बहाली सुनिश्चित करना है।

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