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७२ घंटे बीते, पर कांदिवली पश्चिम छत्रपति शिवाजी राजे कॉम्प्लेक्स से नहीं हिले बारूद के ट्रक; ‘वशिष्ठ वाणी’ के खुलासे के बाद अब कोर्ट के कटघरे में होंगे लापरवाह अफ़सर!

ब्यूरो, मुंबई (वशिष्ठ वाणी): मुंबई का परिवहन और सुरक्षा तंत्र किस कदर निरंकुश और संवेदनहीन हो चुका है, इसका सबसे जीता-जागता और खौफनाक उदाहरण कांदिवली (पश्चिम) के एकता नगर में देखने को मिल रहा है। ‘वशिष्ठ वाणी’ द्वारा लगातार दो दिनों तक भारत गैस के अवैध और ज्वलनशील सिलेंडरों से भरे १० से १४ ट्रकों का पर्दाफाश किए जाने के बावजूद, आज ७२ घंटे (तीन दिन) बीत जाने के बाद भी जमीनी हालात में १ इंच का भी बदलाव नहीं आया है। मुख्य सड़क को घेरकर यमराज की तरह खड़े ये विस्फोटक वाहन आज भी प्रशासन को ठेंगा दिखा रहे हैं।

मामूली जनता पर सिंघम बनने वाली कांदिवली ट्रैफिक पुलिस यहाँ नतमस्तक क्यों?

जनता अब सड़कों पर उतरकर यह पूछ रही है कि कांदिवली ट्रैफिक चौकी के अधिकारियों को इन गैस सिलेंडरों के मालिकों और भारत गैस एजेंसी से ऐसा कौन सा ‘लगाव’ है कि वे इस जानलेवा खतरे को देखकर भी अंधे बने हुए हैं? आम मुंबईकर अगर अपनी गाड़ी दो मिनट के लिए नो-पार्किंग में खड़ी कर दे, तो ट्रैफिक पुलिस की क्रेन उसे उठाने और मोटा चालान ठोकने में पल भर की देरी नहीं करती। लेकिन यहाँ २५ हजार परिवारों की छाती पर खड़े बारूद के इन ट्रकों को देखकर ट्रैफिक विभाग की सारी हेकड़ी गायब हो जाती है। क्या इस रहस्यमयी खामोशी के पीछे कोई बहुत बड़ा प्रशासनिक घालमेल या हफ्ता-वसूली का खेल चल रहा है?

मुंबई RTO का ‘मौन व्रत’ साबित करता है दाल में कुछ काला है!

इस पूरे मामले में मुंबई आरटीओ (RTO) का रवैया किसी अपराधी से कम नहीं है। रिहायशी इलाकों में व्यावसायिक (Commercial) और विस्फोटक वाहनों की ऐसी चौबीस घंटे की पार्किंग कानूनन अपराध है। जब ‘वशिष्ठ वाणी’ की खोजी टीम ने लगातार तीसरे दिन आरटीओ के वरिष्ठ अधिकारियों से इस खुली लापरवाही पर उनका जवाब मांगा, तो उन्होंने अपनी चिर-परिचित आदत के अनुसार मौन व्रत धारण कर लिया और कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। आरटीओ द्वारा कार्रवाई की जानकारी छुपाना यह साफ करता है कि कहीं न कहीं इस अवैध पार्किंग को परिवहन विभाग के बड़े चेहरों का मूक संरक्षण प्राप्त है।

क्या किसी ‘विस्फोट’ और लाशों के ढेर का इंतजार कर रहा है तंत्र?

मुंबई में इस समय मूसलाधार बारिश का दौर जारी है। ऐसे में गाड़ियों में शॉर्ट-सर्किट होना या कोई अन्य हादसा होना आम बात है। अगर इन १०-१४ ट्रकों में रखे सैकड़ों गैस सिलेंडरों में से किसी एक में भी मामूली चिंगारी से धमाका हुआ, तो पूरा छत्रपति शिवाजी राजे कॉम्प्लेक्स पल भर में श्मशान में तब्दील हो जाएगा। क्या मुंबई आरटीओ और स्थानीय पुलिस केवल इसलिए बैठी है कि कोई बड़ा हादसा हो, लोग अपनी जान गंवाएं, और बाद में मंत्रियों के हाथों मुआवजे का चेक बंटवाकर वाहवाही लूटी जा सके?

अब अल्टीमेटम खत्म, ‘वशिष्ठ वाणी’ की लीगल टीम सीधे करेगी कोर्ट में केस!

चूंकि कांदिवली ट्रैफिक विभाग और मुंबई आरटीओ पूरी तरह से बहरे और संवेदनहीन हो चुके हैं, इसलिए ‘वशिष्ठ वाणी’ अब इनसे कोई गुहार नहीं लगाएगी। हमारी लीगल टीम ने पिछले ७२ घंटों के लगातार वीडियो और फोटो सुबूतों (Live Visual Evidence) को इकट्ठा कर लिया है। हम इस ताज़ा जमीनी सच और अधिकारियों द्वारा कार्रवाई न करने के प्रमाणों के साथ सीधे परिवहन आयुक्त कार्यालय, लोकायुक्त और माननीय उच्च न्यायालय (High Court) में जनहित याचिका (PIL) दायर करने जा रहे हैं। जनता की सुरक्षा से खिलवाड़ करने वाले इन अफ़सरों को अब कोर्ट के कटघरे में खड़े होकर जवाब देना होगा कि आखिर वे किसके इशारे पर २५ हजार लोगों की जिंदगी दांव पर लगाकर सो रहे थे।

डिस्क्लेमर (Disclaimer): यह रिपोर्ट सार्वजनिक सुरक्षा और प्रशासनिक पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए ‘वशिष्ठ वाणी’ की निरंतर जमीनी पड़ताल का हिस्सा है। हमारा उद्देश्य किसी विभाग को बदनाम करना नहीं, बल्कि नागरिकों के जीवन की रक्षा के लिए कानून का पालन करवाना है।

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