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‘वशिष्ठ वाणी’ का प्रधानमंत्री मोदी से सीधा सवाल: क्या छोटे और निष्पक्ष अखबारों की खबरों का कोई मोल नहीं? आखिर भ्रष्ट अधिकारियों और भू-माफियाओं के हौसले इतने बुलंद क्यों?

मुंबई/नई दिल्ली (विशेष खोजी रिपोर्ट): “क्या देश में अब खबरें प्रकाशित होने का कोई मतलब नहीं रह गया है? क्या सरकारी महकमों में बैठे अधिकारी अब पूरी तरह से निरंकुश और बेलगाम हो चुके हैं?” ये वो कड़वे सवाल हैं जो आज मुंबई की जमीनी पत्रकारिता करने वाला निष्पक्ष मीडिया हाउस ‘वशिष्ठ वाणी’ सीधे देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और महाराष्ट्र के शीर्ष नेतृत्व के सामने रख रहा है।

अक्सर मंचों से बड़े-बड़े दावों और ‘जीरो टॉलरेंस’ की बातें की जाती हैं, लेकिन मुंबई के जमीनी हालात यह बयां कर रहे हैं कि जब से व्यवस्था में एकछत्र राज आया है, तब से भ्रष्ट अधिकारियों, रसूखदारों और भू-माफियाओं के मन से कानून का डर पूरी तरह गायब हो चुका है। मंत्रियों से लेकर संतरी तक, सबको यह गुमान हो चुका है कि मीडिया चाहे कितनी भी कड़वी सच्चाई उजागर कर दे, उनका बाल भी बांका नहीं होने वाला। प्रधानमंत्री जी, क्या आपने देश को इसी ‘डिजिटल इंडिया’ और ‘रामराज्य’ के विकास का सपना दिखाया था?

प्रधानमंत्री जी, हम आपको चुनौती देते हैं कि आप अपनी खुफिया एजेंसियों से कहें कि वे Google पर ‘Vashishtha Vani’ सर्च करें और देखें कि इस छोटे लेकिन साहसी अखबार ने जनता की सुरक्षा से जुड़े कितने बड़े मुद्दों को सबूतों के साथ उजागर किया है। लेकिन नतीजा? ढाक के वही तीन पात! हम देश के सामने ऐसे चार बड़े प्रशासनिक घपले रख रहे हैं, जहां सरकार और सिस्टम पूरी तरह सरेंडर नजर आ रहे हैं:

1. मालवणी सामना नगर: म्हाडा की जमीन पर अवैध कब्जा और अधिकारी बी.एस. कटरे की चुप्पी!

‘वशिष्ठ वाणी’ ने म्हाडा (MHADA) की खाली जमीन पर चल रहे एक बड़े अवैध पार्किंग रैकेट का भंडाफोड़ किया था। एक रसूखदार व्यक्ति ने आपातकालीन निकास (Emergency Exit Route) को पूरी तरह से लॉक कर दिया और धोखे से सोसायटियों के मालिकों से कई वर्षों तक अवैध वसूली की। यह सीधे तौर पर हजारों लोगों की जान से खिलवाड़ है। लेकिन म्हाडा के उप-निबंधक कार्यालय में बैठे अधिकारी बी.एस. कटरे ने इस पर कोई कार्रवाई करने के बजाय, उस आरोपी को बचाने और मामले को दबाने में अपनी पूरी ताकत झोंक दी। आखिर क्यों?


2. कंदिवली ट्रैफिक विभाग: अधिकारी सतीश राउत के राज में सड़कों का ‘अपहरण’

जब से कंदिवली ट्रैफिक विभाग की कमान अधिकारी सतीश राउत ने संभाली है, तब से पूरा इलाका अवैध पार्किंग और ट्रैफिक जाम का नरक बन चुका है। कंदिवली वेस्ट की मुख्य सड़कें अब आम जनता के चलने के लिए नहीं, बल्कि कमर्शियल वाहनों के अवैध अड्डों में तब्दील हो चुकी हैं। स्थानीय ट्रैफिक पुलिस आंखें मूंदकर इस तमाशे को देख रही है।


3. कंदिवली एकता नगर रोड: रिहायशी इलाके में ‘भारत गैस’ का अवैध और खतरनाक गोदाम!

सुरक्षा मानकों की धज्जियां उड़ाते हुए कंदिवली के एकता नगर रोड को ‘भारत गैस’ के सिलेंडरों से भरे वाहनों का खुला और अवैध गोदाम बना दिया गया है। किसी भी दिन यहाँ कोई बड़ा अग्निकांड हो सकता है। इस गंभीर विषय पर उपमुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस तक को लिखित रूप से सूचित किया गया, लेकिन आज तक उन बारूद के ढेरों को वहाँ से नहीं हटाया गया। क्या प्रशासन किसी बड़ी त्रासदी का इंतजार कर रहा है?


4. मालाड वार्ड 35: भू-माफियाओं का तांडव, सांसद पीयूष गोयल और तंत्र मौन!

मालाड वेस्ट के वार्ड क्रमांक 35 में एक भू-माफिया द्वारा खुलेआम अवैध निर्माण को अंजाम दिया जा रहा है। आश्चर्य की बात यह है कि इस क्षेत्र के सांसद पीयूष गोयल, स्थानीय नगरसेवक योगेश वर्मा और बीएमसी (BMC) के आला अधिकारी सब कुछ जानते हुए भी धृतराष्ट्र बने बैठे हैं। सत्ता पक्ष के इतने बड़े नेताओं के संरक्षण के बिना क्या कोई माफिया ऐसा दुस्साहस कर सकता है?


बड़े अखबारों का कॉरपोरेट मौन और ‘वशिष्ठ वाणी’ का संकल्प

यह सब इसलिए हो रहा है क्योंकि देश के बड़े और कॉरपोरेट घराने वाले अखबार इन स्थानीय और जनता से जुड़े मुद्दों को दबा देते हैं। उन्हें सिर्फ बड़े विज्ञापन और राजनीतिक नूराकुश्ती दिखाने में दिलचस्पी है। जब ‘वशिष्ठ वाणी’ जैसे स्वतंत्र और पंजीकृत प्रिंट एवं डिजिटल मीडिया संस्थान इन खबरों को पूरी ताकत से उठाते हैं, तो अधिकारी हमारे छोटे स्वरूप को देखकर हमारी खबरों को ठंडे बस्ते में डाल देते हैं।

‘वशिष्ठ वाणी’ आज साफ शब्दों में यह घोषणा करता है कि चाहे अधिकारी सुनें या न सुनें, नेता मौन रहें या माफिया धमकी दें—हम जनता की अदालत में इस लड़ाई को जारी रखेंगे। हम प्रधानमंत्री मोदी जी से मांग करते हैं कि वे इन चारों मामलों की उच्च स्तरीय जांच करवाएं और यह साबित करें कि उनका ‘सशक्त भारत’ सिर्फ नारों में नहीं, बल्कि जमीन पर भी काम करता है।

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