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वशिष्ठ वाणी विशेष रिपोर्ट: मुंबई में ऑटो चालकों की दबंगई, ‘बड़े भाड़े’ के खेल में पिस रहा है आम आदमी

मुंबई: देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में कहने को तो मीटर से चलने वाली ऑटो-रिक्शा सेवा को सबसे पारदर्शी माना जाता है, लेकिन हकीकत इससे बिल्कुल जुदा है। शहर के उपनगरों (Suburbs) में ऑटो चालकों की बढ़ती मनमानी अब यात्रियों के लिए सिरदर्द बन चुकी है। ‘बड़े भाड़े’ के चक्कर में छोटे रूट की सवारी को मना करना अब एक आम रिवाज बन गया है।

मॉल और सिग्नलों पर ‘अघोषित’ कब्जा

मुंबई के प्रमुख शॉपिंग मॉल्स और ट्रैफिक सिग्नलों के बाहर का नज़ारा चौंकाने वाला होता है। ऑटो चालक वहां घंटों तक कतार में खड़े रहते हैं, लेकिन जैसे ही कोई यात्री छोटे फासले के लिए उनसे पूछता है, वे साफ़ मना कर देते हैं। इनका एकमात्र उद्देश्य ऐसे ‘लंबे भाड़े’ पकड़ना है जिसमें मीटर के अलावा भी मोटी कमाई हो सके।

यात्रियों की बेबसी: घंटों का इंतजार और मानसिक तनाव

वशिष्ठ वाणी से बात करते हुए एक यात्री ने बताया, “अंधेरी और बोरीवली जैसे इलाकों में मॉल के बाहर आधे घंटे खड़ा रहना आम बात है। ऑटो वाले कतार में खड़े तो रहते हैं, लेकिन उन्हें नजदीक के स्टेशन या घर तक नहीं जाना। क्या प्रशासन सो रहा है?” इस मनमानी का सबसे बुरा असर बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और छोटे बच्चों के साथ सफर करने वाले लोगों पर पड़ रहा है।

  • यात्रियों का समय बर्बाद: 10 मिनट के सफर के लिए 40 मिनट ऑटो ढूंढने में बीत जाते हैं।
  • ट्रैफिक की समस्या: मॉल और सिग्नल के पास खड़ी गाड़ियों की वजह से सड़कों पर भारी जाम लगता है।
  • कानून का डर नहीं: कार्रवाई के अभाव में ऑटो चालकों का हौसला बढ़ा हुआ है।

वशिष्ठ वाणी की मांग: प्रशासन कब जागेगा?

यात्रियों की मांग है कि महाराष्ट्र सरकार और परिवहन विभाग (RTO) को इस पर तत्काल कड़े कानून बनाने चाहिए। फिलहाल, ‘रिफ्यूजल’ (भाड़ा मना करना) पर लाइसेंस रद्द करने या भारी जुर्माना लगाने का प्रावधान तो है, लेकिन धरातल पर इसका पालन कम ही दिखता है।

रिपोर्ट की मुख्य मांगें:

  • स्पेशल टास्क फोर्स: पीक ऑवर्स के दौरान मॉल्स और प्रमुख जंक्शनों पर सादे कपड़ों में पुलिसकर्मियों की तैनाती हो, जो ‘भाड़ा मना’ करने वालों पर तुरंत जुर्माना ठोकें।
  • भारी जुर्माना: छोटे डिस्टेंस के लिए मना करने पर कम से कम ₹2000 से ₹5000 तक का ऑन-द-स्पॉट जुर्माना होना चाहिए।
  • डिजिटल ब्लैकलिस्टिंग: एक ऐसा ऐप या हेल्पलाइन नंबर जिस पर यात्री तुरंत फोटो के साथ शिकायत करें और 24 घंटे के भीतर कार्रवाई हो।
  • परमिट रद्दीकरण: जो चालक बार-बार नियम तोड़ते हैं, उनका परमिट और लाइसेंस स्थायी रूप से रद्द किया जाए।

निष्कर्ष

यदि समय रहते प्रशासन ने इस अराजकता पर लगाम नहीं लगाई, तो मुंबई की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था पूरी तरह चरमरा जाएगी। सरकार को केवल नियम बनाने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि सड़कों पर ‘स्पेशल स्क्वाड’ तैनात कर इन ‘मनमर्जी’ चलाने वाले ऑटो चालकों पर नकेल कसनी होगी।

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