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१ साल से बंद रास्ते पर दौड़े डिप्टी कलेक्टर विनायक, लेकिन कार्रवाई के नाम पर ‘हाथ कांपे’; वशिष्ठ वाणी ने अब थमाया गया लीगल नोटिस!

मुंबई (विशेष ब्यूरो): खोजी पत्रकारिता का मतलब सिर्फ खबर छापना नहीं, बल्कि पीड़ितों को न्याय दिलाना और सोए हुए प्रशासन को जगाना है। ‘वशिष्ठ वाणी’ ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि जनहित के मुद्दों पर हम आखिरी दम तक लड़ते हैं। मालाड (पश्चिम) के एरंगळ विलेज, दाणापाणी इलाके में एक पीड़ित महिला अधिकारी के साथ हो रहे अन्याय के खिलाफ जब ‘वशिष्ठ वाणी’ ने प्रमुखता से खबर प्रकाशित की, तो पूरे प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया। एक साल से सोए डिप्टी कलेक्टर (उपजिलाधिकारी) विनायक पाडवी तुरंत दलबल के साथ मौके पर पहुंचने को मजबूर हो गए। लेकिन, मौके पर पहुंचकर भी कार्रवाई न करने और दबंगों के आगे घुटने टेकने के चलते अब उन्हें कानूनी शिकंजे में कस दिया गया है।


क्या है पूरा मामला? पीड़ित महिला अधिकारी १ साल से थीं बेघर

मालाड (पश्चिम) के दाणापाणी, एरंगळ विलेज स्थित बुल्लर गार्डन, योगाश्रम में रहने वाली पीड़ित महिला अधिकारी नेहा निलेश वालावलकर पिछले कई महीनों से अपने ही घर से बाहर निकलने के बुनियादी हक (राइट टू वे) के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रही थीं। कुछ स्थानीय दबंगों ने उनके घर के मुख्य रास्ते के बीचों-बीच एक अवैध दीवार खड़ी करके रास्ता पूरी तरह ‘लॉक’ कर दिया था। इस गुंडागर्दी के कारण पीड़ित महिला को अपना खुद का घर छोड़कर पूरे एक साल तक किराए के मकान में दर-दर भटकने पर मजबूर होना पड़ा।


‘वशिष्ठ वाणी’ के मालिक अभिषेक अनिल वशिष्ठ ने भेजा लीगल नोटिस!

खबर छपने के बाद डिप्टी कलेक्टर विनायक पाडवी मौके पर तो पहुंचे, लेकिन दीवार तोड़ने के बजाय मामले को टालने और दबंगों को फायदा पहुंचाने का प्रयास करने लगे। प्रशासन के इस ढुलमुल रवैये को देखते हुए ‘वशिष्ठ वाणी’ के स्वामी और प्रकाशक अभिषेक अनिल वशिष्ठ ने मामले को अंजाम तक पहुंचाने का फैसला किया। उन्होंने अपनी लीगल टीम के मुख्य कानूनी सलाहकार (Advocate) ओम प्रकाश मिश्रा के माध्यम से डिप्टी कलेक्टर विनायक पाडवी को एक कड़ा लीगल नोटिस (Legal Notice) थमा दिया है।

लीगल नोटिस के जरिए डिप्टी कलेक्टर से पूछे गए ये तीखे सवाल:

  • कार्रवाई से पीछे क्यों हटे?: जब आप मौके पर अवैध दीवार को हटाने और रास्ता साफ करने आए थे, तो बिना कार्रवाई किए पीठ दिखाकर क्यों लौट गए? आपको कार्रवाई करने से कौन रोक रहा है?
  • अवैध कब्जेदारों के आगे क्यों गिड़गिड़ा रहा है प्रशासन?: मुख्य रास्ते की दीवार तोड़ने के बजाय आप पीड़ित महिला को दूसरी जगह से रास्ता देने की बात कह रहे हैं। वह दूसरी जगह भी सरकारी जमीन है, जिस पर किसी और ने अवैध कब्जा कर रखा है। प्रशासन कानून का हंटर चलाने के बजाय उन कब्जेदारों के आगे गिड़गिड़ा क्यों रहा है?
  • कार्रवाई में मानसून का बहाना क्यों?: प्रशासन का यह तर्क हास्यास्पद है कि मानसून के कारण कार्रवाई नहीं हो सकती। रास्ते पर जो दीवार खड़ी है उसे तोड़ना है, और सरकारी जमीन को घेरकर जो जाली लगाई गई है उसे हटाना है। इसमें मानसून का क्या लेना-देना?
  • भ्रष्ट तंत्र पर सीधा तंज: अगर कोई आम नागरिक अपने रहने के लिए छोटा सा आशियाना भी बनाए, तो प्रशासन उसे तोड़ने के लिए तुरंत पहुंच जाता है। लेकिन जहाँ दबंगों ने किसी का रास्ता पूरी तरह लॉक कर दिया है, वहां कार्रवाई करने में अधिकारियों के हाथ क्यों कांप रहे हैं?

‘वशिष्ठ वाणी’ का कड़ा संदेश: यह समाचार उन सभी लापरवाह अधिकारियों के लिए एक खुली चेतावनी है जो सोचते हैं कि मीडिया में खबर आने के बाद मामला शांत हो जाएगा। ‘वशिष्ठ वाणी’ न केवल जनता का मुद्दा उठाता है, बल्कि अपने रसूख और लीगल टीम के माध्यम से लापरवाह अधिकारियों को कोर्ट के कटघरे में खड़ा करना भी जानता है। इस मामले में जब तक पीड़ित महिला को उनका रास्ता वापस नहीं मिल जाता और दोषियों पर कार्रवाई नहीं होती, हमारी कानूनी और पत्रकारिता की यह जंग जारी रहेगी।

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