मुंबई: मालाड पश्चिम स्थित बिलाबॉन्ग हाई इंटरनेशनल स्कूल और रॉयल ओएसिस सोसाइटी के बाहर की सड़क अब हादसों का हॉटस्पॉट बन चुकी है। ‘वशिष्ठ वाणी’ द्वारा सुरक्षा का मुद्दा उठाने के बाद बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) ने ‘MARG’ (मैनेजमेंट एंड रिड्रेसल ऑफ़ ग्रिवांस) सिस्टम पर शिकायत तो दर्ज कर ली, लेकिन धरातल पर नतीजा आज भी ‘शून्य’ है।
सिस्टम पर शिकायत नंबर जनरेट हुए दिन बीत गए, लेकिन सड़क पर एक गिट्टी तक नहीं हिली है। रफ्तार से दौड़ती गाड़ियों के बीच हर दिन स्कूल जाने वाले मासूम बच्चे और बुजुर्ग अपनी जान जोखिम में डालकर सड़क पार करने को मजबूर हैं।
आए दिन हो रहे एक्सीडेंट, पर बीएमसी बेफिक्र स्पीड ब्रेकर न होने की वजह से इस रोड पर आए दिन गाड़ियां आपस में टकरा रही हैं और पैदल यात्री हादसों का शिकार हो रहे हैं। निवासियों और पीड़ित परिवारों का गुस्सा अब सातवें आसमान पर है।
- आंसुओं में जनता का सवाल: “क्या बीएमसी के ठंडे बस्ते में पड़े अधिकारियों की नींद तभी खुलेगी जब यहां कोई बहुत बड़ी अनहोनी या जानलेवा हादसा हो जाएगा?”
- सिस्टम या खानापूर्ति: ‘MARG’ जैसे हाइटेक सिस्टम सिर्फ कागजी खानापूर्ति का जरिया बन चुके हैं। अधिकारियों को आम जनता की सुरक्षा और परेशानियों से कोई सरोकार नहीं है।
नेता का फोन आते ही जगता है प्रशासन, आम जनता की कोई कीमत नहीं? बीएमसी की दोहरी नीति पर स्थानीय लोगों ने तीखा हमला बोला है। निवासियों का साफ कहना है कि अगर यही मांग किसी पूर्व नगरसेवक या स्थानीय विधायक (MLA) ने की होती, तो बीएमसी के अधिकारी रात-रातों-रात स्पीड ब्रेकर बनाकर खड़ा कर देते। नेताओं का हुक्म सिर-आंखों पर रखने वाला प्रशासन आम नागरिकों की गुहार पर पूरी तरह बहरा हो चुका है। जब तक किसी नेता का दबाव न हो, बीएमसी में बैठी अफसरशाही हिलने का नाम नहीं लेती।
वशिष्ठ वाणी का अल्टीमेटम ‘वशिष्ठ वाणी’ इस मुद्दे पर लगातार आवाज उठाता रहेगा। केवल कंप्यूटर स्क्रीन पर शिकायत का स्टेटस ‘एक्टिव’ दिखाने से मासूमों की जान नहीं बचेगी। बीएमसी अधिकारी अपनी कुंभकर्णी नींद छोड़ें और तुरंत स्पीड ब्रेकर का काम पूरा करें, वरना जनआक्रोश का सामना करने के लिए तैयार रहें।












