विशेष संवाददाता, मुंबई: मालवाणी स्थित सामना नगर (गेट नं. 8) की इमारत 1D (स्वप्नपूर्ति CHS) में एक मासूम नाबालिग बच्ची के साथ हुए यौन उत्पीड़न के मामले (FIR No. 1556/2026, POCSO Act) में एक बेहद शर्मनाक और संगीन पहलू सामने आ रहा है।
अदालत द्वारा आरोपी पूर्व चेयरमैन बालासाहेब भगत को संगीन धाराओं के तहत न्यायिक हिरासत (जेल) भेजे जाने के बावजूद, स्थानीय सूत्रों के अनुसार, बीजेपी के कुछ कार्यकर्ताओं और आरोपी के साथियों (चेलों-चपाटों) द्वारा उसे बचाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगाया जा रहा है।
आरोपी के कृत्य पर जनता में गहरा रोष, वहीं रसूखदार बचाने में जुटे: सामना नगर और आसपास के क्षेत्र में जैसे-जैसे इस घिनौने कृत्य की जानकारी लोगों तक पहुँच रही है, स्थानीय निवासियों और आम जनता में इस आरोपी के प्रति भारी गुस्सा, तीखा धिक्कार और गहरा असंतोष है। हर आम नागरिक इस दरिंदगी की कड़े शब्दों में निंदा कर रहा है। लेकिन सूत्रों का दावा है कि जहाँ पूरी जनता इस हरकत पर सख्त ऐतराज़ और धिक्कार जता रही है, वहीं इसके कुछ करीबी साथी और बीजेपी के कुछ कार्यकर्ता आरोपी की ढाल बनकर इसे ‘साजिश’ बताने और लोगों को गुमराह करने में लगे हुए हैं।
अफ़वाह फैलाने वालों के ‘फंसाने’ वाले दावों की निकली हवा: पीड़ित परिवार के समर्थकों और सूत्रों ने ‘झूठा फंसाने’ की अफ़वाह फैलाने वालों की नीयत पर बड़ा सवाल उठाया है। पीड़ित परिवार का स्पष्ट कहना है:
“अगर हमारा मकसद किसी को झूठा फंसाना होता, तो हम सीधे पुलिस थाने जाते, आरोपी के घर क्यों जाते? घटना के बाद जब पीड़ित परिवार आरोपी के घर जाकर बात करने गया कि ‘हमारी बच्ची के साथ ऐसा घिनौना कृत्य क्यों किया?’, तो आरोपी और उसके परिवार ने उन्हें धक्के मारकर वहां से भगा दिया। इसके बाद ही मजबूर होकर परिवार को पुलिस में शिकायत दर्ज करानी पड़ी।”
आरोपी की पत्नी के बयान ने खोली पुरानी करतूतों की पोल: पीड़ित परिवार का मीडिया के सामने यह भी कहना है कि जब वे आरोपी के घर बात करने पहुंचे, तो आरोपी की पत्नी ने खुद कहा था कि- “मेरा पति पहले ऐसा था, लेकिन अब सुधर गया है।” पत्नी के इस बयान से यह साफ उजागर होता है कि आरोपी की यह कोई पहली हरकत नहीं थी, बल्कि वह पहले से ही इस तरह के घिनौने आचरण में लिप्त रहा है। इसके बावजूद अफ़वाह फैलाने वाले लोग आंखें मूंदकर आरोपी को बचाने में लगे हैं।
जनता में भारी रोष- अफ़वाहबाजों पर कड़े पुलिस एक्शन की मांग: इस रवैये को लेकर स्थानीय निवासियों में गहरा असंतोष व्याप्त है। सूत्रों के अनुसार, नागरिकों ने पुलिस प्रशासन से गुहार लगाई है कि:
“जो बीजेपी कार्यकर्ता और आरोपी के साथी एक मासूम बच्ची के न्याय के रास्ते में रोड़ा अटका रहे हैं और झूठी अफ़वाहें फैलाकर समाज व पुलिस को गुमराह कर रहे हैं, पुलिस उन अफ़वाहबाजों पर भी तुरंत कड़ा कानूनी एक्शन (Strict Action) ले, ताकि पीड़िता को न्याय मिल सके और कोई भी आरोपी की ढाल बनने की हिम्मत न करे।”
(नोट: कानून के अनुसार पीड़िता की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी गई है।)










