मुंबई: मालाड पश्चिम स्थित बिलाबॉन्ग हाई इंटरनेशनल स्कूल और रॉयल ओएसिस सोसाइटी के सामने की सड़क पर हर पल मंडराता काल अब स्थानीय निवासियों के सब्र का बांध तोड़ रहा है। ‘वशिष्ठ वाणी’ ने 1 जुलाई 2026 को ही बीएमसी (BMC) प्रशासन को इस जानलेवा सड़क की ओर ध्यान दिलाते हुए स्पीड ब्रेकर बनाने की मांग की थी। इसके जवाब में सोशल मीडिया पर @mybmcwardPN (बीएमसी पी-नॉर्थ वार्ड) के आधिकारिक ट्विटर/X हैंडलबार से जवाब तो आया और शिकायत दर्ज करने की औपचारिकता भी पूरी की गई, लेकिन हकीकत यह है कि 3 महीने बीत जाने के बाद भी धरातल पर एक इंच काम नहीं हुआ है।
अब सवाल यह उठता है कि क्या बीएमसी के अधिकारियों को स्पीड ब्रेकर अपनी जेब के पैसे से बनवाना है, जो वे इसमें इतनी आनाकानी और टालमटोल कर रहे हैं?
ट्विटर पर डिजिटल ‘ड्रामा’, जमीन पर नतीजा ‘शून्य’
1 जुलाई से लेकर अब तक इस सड़क पर कई छोटी-बड़ी दुर्घटनाएं हो चुकी हैं। रफ्तार से गुजरती गाड़ियों और स्पीड ब्रेकर के अभाव में आम लोगों, विशेषकर मासूम स्कूली बच्चों और बुजुर्गों के लिए सड़क पार करना दुश्वार (मुश्किल) हो चुका है।
- आंसुओं में डूबी जनता का आक्रोश: “जब तक सिस्टम में ऐसे लापरवाह और भ्रष्ट अधिकारी बैठे रहेंगे, तब तक आम जनता की जान सस्ती ही समझे जाएगी। बीएमसी के साहब लोगों को अपनी जेब से तो पैसे नहीं देने हैं, फिर भी काम अटका कर रखा गया है।”
- बड़ा हादसा होने का इंतज़ार?: स्थानीय निवासियों का कहना है कि प्रशासन पूरी तरह संवेदनहीन हो चुका है। ऐसा लगता है कि अधिकारी किसी बड़ी अनहोनी या जानलेवा हादसे का इंतज़ार कर रहे हैं, ताकि उसके बाद जागने का नाटक किया जा सके।
ट्विटर स्क्रीनशॉट का कड़वा सच
बीएमसी पी-नॉर्थ वार्ड द्वारा दिया गया आधिकारिक जवाब अब महज़ एक ‘कागजी ढोंग’ साबित हो रहा है। सोशल मीडिया पर त्वरित जवाब देकर जनता की आंखों में धूल झोंकना आसान है, लेकिन धरातल पर जाकर काम करना बीएमसी अधिकारियों की प्राथमिकता में शामिल ही नहीं है।
‘वशिष्ठ वाणी’ की चेतावनी
‘वशिष्ठ वाणी’ बीएमसी के इस भ्रष्ट और निकम्मे रवैये के खिलाफ चुप नहीं बैठेगा। ट्विटर पर महज़ जवाब (Reply) चिपका देने से मासूमों की सुरक्षा तय नहीं होती। जब तक बिलाबॉन्ग स्कूल और रॉयल ओएसिस के बाहर सड़क पर वास्तव में स्पीड ब्रेकर नहीं बन जाते, हम इस भ्रष्ट तंत्र और लापरवाह अफसरों को बेनकाब करते रहेंगे।












