मुंबई (वशिष्ठ वाणी विशेष संवाददाता): मुंबई के मालवाणी इलाके में 2 अक्टूबर 2026 को सामने आए गंभीर POCSO मामले में जहाँ एक तरफ प्रशासनिक सुस्ती देखने को मिली, वहीं दूसरी तरफ सामाजिक न्याय और मानवीयता की एक अनूठी मिसाल भी पेश हुई। मुंबई में नए होने के कारण असहाय और भयभीत महसूस कर रहे पीड़ित परिवार के समर्थन में अधिवक्ता और समाजसेवी अपनी पूरी ताकत के साथ खड़े हो गए।
1. एडवोकेट ओमप्रकाश मिश्रा ने लगाई न्याय की गुहार, Sr. PI रानी पूरी ने दिया पूरा सहयोग
घटना की भनक लगते ही एडवोकेट ओमप्रकाश मिश्रा बिना किसी देरी के पीड़ित परिवार की मदद के लिए आगे आए। उन्होंने तत्काल मालवाणी पुलिस स्टेशन की वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक (Sr. PI) रानी पूरी से सीधे संपर्क कर मामले की गंभीरता से अवगत कराया और न्याय दिलाने की गुहार लगाई।
वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक रानी पूरी ने भी मामले की संवेदनशीलता को समझते हुए पूरी तत्परता दिखाई। जब-जब उन्हें मामले की स्थिति का पता चलता था, वे तुरंत अपने जूनियर अधिकारियों को फोन कर सही दिशा-निर्देश देती रहीं और पीड़ित परिवार को पूरा सहयोग प्रदान किया।
2. सामाजिक कार्यकर्ता सम्राट बागुल बने ढाल, एफआईआर दर्ज होने तक डटे रहे
मामले की जानकारी मिलते ही सामाजिक कार्यकर्ता सम्राट बागुल तुरंत मालवाणी पुलिस स्टेशन पहुँचे। पीड़ित परिवार पर बनाए जा रहे मानसिक व बाहरी दबाव के बीच सम्राट बागुल पूरी मजबूती के साथ उनके साथ खड़े रहे।
शाम से लेकर रात 8:54 बजे एफआईआर (FIR No. 1556) दर्ज होने तक सम्राट बागुल पुलिस स्टेशन में डटे रहे। पुलिस ने आरोपी बालासाहेब भगत के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 74 तथा POCSO अधिनियम की धारा 8 और 12 के तहत मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार किया। सम्राट बागुल ने सुनिश्चित किया कि कानून की उचित धाराओं के तहत कार्रवाई हो और पीड़ित परिवार के साथ कोई अन्याय न हो।
3. पीड़ित परिवार की आँखें हुईं नम, कहा— “मुंबई में जब तक ऐसे जनसेवक हैं, कोई अकेला नहीं”
शुरुआत में पीड़ित परिवार बेहद डरा और सहमा हुआ था। उनका मानना था कि वे मुंबई में नए हैं और आरोपी स्थानीय और प्रभावशाल व्यक्ति है। लेकिन जब उन्होंने देखा कि सच्चाई की इस लड़ाई में एडवोकेट ओमप्रकाश मिश्रा, सम्राट बागुल और वरिष्ठ पुलिस अधिकारी उनके साथ खड़े हैं, तो उनकी आँखों में आंसू आ गए।
पीड़ित परिवार ने भावुक होकर कहा:
“हम मुंबई में नए हैं और बहुत डरे हुए थे कि आरोपी ताकतवर है। लेकिन जिस तरह एडवोकेट ओमप्रकाश मिश्रा जी, सम्राट बागुल जी और Sr. PI रानी पूरी जी हमारे साथ खड़े रहे, उससे हमारा भरोसा कानून पर और बढ़ गया। जब तक मुंबई में सम्राट बागुल जैसे सच्चे समाजसेवी मौजूद हैं, तब तक किसी भी पीड़ित परिवार को घबराने की ज़रूरत नहीं है।”
4. मेडिकल व्यवस्था में सुधार की उठाई मांग
तमाम सहयोग और पुलिस की कार्रवाई के बावजूद पीड़ित परिवार ने एक महत्वपूर्ण मुद्दे पर ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि पुलिस स्टेशन और अस्पताल स्तर पर मेडिकल प्रक्रिया में बहुत अधिक समय लगा और भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
पीड़ित परिवार ने मुख्यमंत्री और गृह विभाग से अपील की कि POCSO जैसे अति-संवेदनशील मामलों में मेडिकल जांच की प्रक्रिया को सुचारू और फ़ास्ट-ट्रैक (Fast-Track) बनाया जाए ताकि किसी अन्य बच्ची और उसके परिजनों को घंटों इंतज़ार की यातना न झेलनी पड़े।












