मुंबई: मालाड वेस्ट के जन कल्याण नगर रोड (सेंट जूड स्कूल के सामने, दिव्या पार्क और बफिरा नगर) पर बीएमसी अतिक्रमण विभाग के वरिष्ठ निरीक्षक प्रवीण वाघेला (Praveen Vaghela) की कार्यशैली अब एक ऐसा प्रशासनिक तमाशा बन चुकी है, जिसपर सिर्फ हंसा जा सकता है। ‘वशिष्ठ वाणी’ की खबर के बाद अधिकारी प्रवीण वाघेला ने अपनी पीठ थपथपाने और मीडिया को भ्रमित करने के लिए खुद कार्रवाई की तस्वीरें भेजी थीं। उन्होंने बड़े-बड़े दावे करते हुए सीना ठोककर कहा था कि इस समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए वे “रोजाना (Daily) कार्रवाई करेंगे।”
लेकिन, साहब के उन जुबानी वादों और दावों की हकीकत धरातल पर आकर पूरी तरह बेनकाब हो गई है! आइए, आपको आईना दिखाते हैं कि 7 दिन बीतने के बाद वहां क्या नजारा है।
अधिकारी प्रवीण वाघेला के झूठे दावे: रोज कार्रवाई का जुमला और 7 दिन से गहरी नींद में सन्नाटा!
जब मीडिया ने अधिकारी प्रवीण वाघेला से यह सवाल पूछा था कि “आपके हटाने के चंद मिनटों बाद ही फुटपाथ पर दोबारा दुकानें कैसे सज जाती हैं?”, तो उनका जवाब था कि वे रोज डंडा चलाएंगे और समस्या जड़ से मिटाएंगे।
- पूरा एक हफ्ता और जीरो एक्शन: साहब के उस बयान को हवा में उड़े हुए पूरा एक हफ्ता (7 दिन) बीत चुका है। इन सात दिनों में न तो कोई बीएमसी का अमला वहां पहुंचा और न ही किसी ठेले वाले को हटाया गया।
- फुटपाथ बना सब्जी मंडी: आज भी जन कल्याण नगर का वह फुटपाथ पूरी तरह सब्जियों, फलों और अवैध अतिक्रमण सेटा पड़ा है। आम नागरिक और छोटे-छोटे स्कूली बच्चे बीच सड़क पर जान जोखिम में डालकर चलने को मजबूर हैं, और हमारे ‘एक्शन मैन’ अधिकारी साहब एसी ऑफिस में आराम फरमा रहे हैं!
ऐसे अधिकारी को क्या कहा जाए— ‘भ्रष्ट’ या ‘मलाईखोर’?
जब कोई जिम्मेदार अधिकारी कैमरे के सामने खुद को सिंघम साबित करने की कोशिश करे, फोटो-सेशन करवाकर मीडिया को गुमराह करे और धरातल पर एक तिनका भी न हिलाए, तो जनता का माथा ठनकना लाजिमी है। जनता अब सड़कों पर खुलेआम पूछ रही है कि ऐसे अधिकारियों की श्रेणी में किसे रखा जाए—भ्रष्ट अधिकारी या मलाईखोर अधिकारी? जो सिर्फ कागजी घोड़े दौड़ाते हैं, प्रेस को झूठे बयान बांटते हैं और पर्दे के पीछे अपनी तिजोरी भरने में व्यस्त रहते हैं।
‘वशिष्ठ वाणी’ इन झूठे आश्वासनों, कागजी ड्रामों और प्रशासनिक मक्कारी की पोल इसी तरह लगातार खोलता रहेगा। जब तक जन कल्याण नगर के इन फुटपाथों को इस अवैध दलदल से हमेशा के लिए मुक्त नहीं कराया जाता, तब तक इन लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ हमारा यह तीखा कटाक्ष और पहरा यूं ही जारी रहेगा!












