लोकप्रिय विषयमहाराष्ट्रसम्पादकीयकवितास्वास्थ्यअपराधअन्यवीडियो

वाराणसी में ठंड से राहत: ‘काशी की खुशियाँ’ संस्था ने जरूरतमंदों को बांटे गर्म कपड़े

वाराणसी/वशिष्ठ वाणी: कड़ाके की ठंड के बीच वाराणसी में मानवता और सेवा भाव की एक प्रेरणादायी मिसाल सामने आई है। शहर के निवासी एवं सामाजिक संस्था ‘काशी की खुशियाँ’ के संस्थापक कौशिक गुप्ता के नेतृत्व में लगभग 250 से 300 गरीब, असहाय और जरूरतमंद लोगों के बीच गर्म कपड़ों का वितरण किया गया। इस पहल से ठंड से जूझ रहे लोगों को राहत मिली और कई चेहरों पर मुस्कान लौट आई।

इस अवसर पर कौशिक गुप्ता ने कहा कि कड़कड़ाती ठंड में किसी जरूरतमंद के चेहरे पर गर्म कपड़ों की वजह से मुस्कान देखना सबसे बड़ा संतोष है। उन्होंने कहा कि काशी में बाबा विश्वनाथ का आशीर्वाद हर चेहरे में दिखाई देता है और उन्हें गर्व है कि ईश्वर ने उन्हें समाज के प्रति सेवा करने का अवसर दिया।

उन्होंने स्पष्ट किया कि यह पहल केवल कपड़ों के वितरण तक सीमित नहीं है, बल्कि मानवता, संवेदना और प्रेम को साझा करने का एक प्रयास है। साथ ही उन्होंने ईश्वर से प्रार्थना की कि सेवा का यह जज्बा निरंतर बना रहे और बाबा विश्वनाथ की कृपा सभी पर बनी रहे।

उल्लेखनीय है कि ‘काशी की खुशियाँ’ संस्था लंबे समय से समाज सेवा के क्षेत्र में सक्रिय है और ठंड के मौसम में जरूरतमंदों को राहत पहुंचाने के लिए नियमित रूप से ऐसे कार्यक्रम आयोजित करती रही है। वाराणसी में इस तरह की पहल न केवल जरूरतमंदों के लिए सहारा बनती है, बल्कि काशी की आध्यात्मिक और मानवीय परंपरा को भी और अधिक सशक्त करती है।

इस प्रकार के सामाजिक कार्य समाज में सकारात्मक संदेश देते हैं और अन्य लोगों को भी सेवा और सहयोग के लिए प्रेरित करते हैं। बाबा विश्वनाथ की नगरी काशी में सेवा भाव आज भी जीवंत और प्रेरणादायी बना हुआ है।

Join WhatsApp

Join Now

और पढ़ें

ग्राउंड रिपोर्ट: कांदिवली में सिस्टम फेल! फुटपाथ पर गाड़ियां, सड़क पर जनता; क्या सो रहा है ट्रैफिक विभाग?

वशिष्ठ वाणी विशेष: जब ‘रक्षक’ ही बनें ‘भक्षक’—मुंबई के सिग्नलों पर नेताओं का अवैध ‘शक्ति प्रदर्शन’!

वशिष्ठ वाणी की ग्राउंड रिपोर्ट: मलाड में कानून को ठेंगा! Flag’s II Veg World Cuisine के बाहर ‘अवैध पार्किंग’ का साम्राज्य, प्रशासन मौन

खुली चुनौती: क्या ‘मोदी हुंडई’ के आगे BMC और ट्रैफिक पुलिस ने टेक दिए हैं घुटने?

‘वशिष्ठ वाणी’ का सीधा सवाल: बीएमसी अधिकारी कुंदन वाल्वी, कुंभकर्ण की नींद से कब जागेंगे? क्या माफिया ‘कर्सन’ के आगे शर्म बेच खाई है?

वशिष्ठ वाणी विशेष रिपोर्ट: मुंबई में ऑटो चालकों की दबंगई, ‘बड़े भाड़े’ के खेल में पिस रहा है आम आदमी

Leave a Comment