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विशेष ग्राउंड रिपोर्ट: चमचमाती ‘क्वींस नेकलेस’ पर गंदगी का दाग: मुंबई पुलिस की नाक के नीचे कचरपट्टी बना मरीन ड्राइव, कार्रवाई के नाम पर केवल गरीबों पर गाज क्यों?

मुंबई: मुंबई की पहचान और देश-विदेश के पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र Marine Drive (क्वींस नेकलेस) इन दिनों अपनी खूबसूरती के लिए नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही और पर्यटकों की गैर-जिम्मेदाराना हरकत के कारण सुर्खियों में है। बीते कल ‘वशिष्ठ वाणी’ की टीम ने मरीन ड्राइव का जमीनी दौरा (Ground Reporting) किया, जिसमें चौंकाने वाली और शर्मनाक तस्वीरें सामने आईं।

हैरानी की बात यह है कि जिस जगह पर कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए 24 घंटे मुंबई पुलिस की तैनाती रहती है, ठीक उसी जगह पर लोग सरेआम कचरा फैलाकर देश की छवि को धूमिल कर रहे हैं। बाहर से आने वाले सैलानियों के बीच यह संदेश जा रहा है कि भारतीय लोग अपनी ही सबसे खूबसूरत धरोहरों को गंदा करने से बाज नहीं आते।

कार्रवाई के नाम पर ‘ना रहेगा बांस, ना बजेगी बांसुरी’ का खेल

इस जमीनी रिपोर्ट के बाद अब देखना यह है कि मुंबई पुलिस और बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) के आला अधिकारी क्या कदम उठाते हैं? हमेशा का ढर्रा तो यही रहा है कि प्रशासनिक अधिकारी मुख्य समस्या को हल करने के बजाय ‘शॉर्टकट’ रास्ता अपनाते हैं।

संभावना यही है कि इस खबर के बाद बीएमसी और पुलिस का डंडा उन गरीब फेरीवालों पर चलेगा जो वहां घूम-घूम कर चाय, पानी की बोतल या चना बेचकर अपना पेट पालते हैं। अधिकारी ‘ना रहेगा बांस, ना बजेगी बांसुरी’ की तर्ज पर इन छोटे व्यापारियों का धंधा बंद करवा देंगे—ताकि न बेचने वाले रहें और न कचरा दिखे। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि गंदगी फैलाने वाले उन असली गुनहगारों (पर्यटकों/नागरिकों) पर सख्त कार्रवाई क्यों नहीं की जाती, जो कचरा फैलाकर चले जाते हैं?


BMC का नियम क्या कहता है? (The Legal Reality)

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि बीएमसी के ‘स्वच्छता उप-नियम’ (Cleanliness Bye-laws) के तहत सार्वजनिक स्थानों पर गंदगी फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी प्रावधान हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर इनका पालन न के बराबर होता है:

  • सरेआम कचरा फेंकने पर जुर्माना (Littering): बीएमसी के नियमों के मुताबिक, यदि कोई व्यक्ति सार्वजनिक स्थान, फुटपाथ या सड़क पर कचरा, प्लास्टिक या बोतल फेंकता हुआ पाया जाता है, तो उस पर ₹200 से ₹500 तक का ऑन-द-स्पॉट जुर्माना (Fine) लगाने का प्रावधान है।
  • थूकने पर पाबंदी (Spitting): मरीन ड्राइव जैसे सार्वजनिक प्रोमनेड पर थूकने वाले व्यक्तियों पर ₹200 का जुर्माना तय है।
  • क्लीन-अप मार्शल की जिम्मेदारी: इन नियमों को लागू करने और जुर्माना वसूलने के लिए बीएमसी ‘क्लीन-अप मार्शलों’ को तैनात करती है। कानूनन, मार्शल का काम कचरा फैलाने वाले नागरिक को पकड़ना है, न कि केवल फेरीवालों को निशाना बनाना।

वशिष्ठ वाणी का प्रशासनिक सवाल

प्रशासन को यह समझना होगा कि समस्या चाय या पानी बेचने वाले गरीब नहीं हैं, बल्कि समस्या कचरा डस्टबिन में न डालकर समुद्र किनारे फेंकने वाली नागरिक चेतना की कमी है। अगर बीएमसी और मुंबई पुलिस सच में मरीन ड्राइव को साफ रखना चाहती है, तो फेरीवालों की रोजी-रोटी छीनने के बजाय कचरा फैलाने वाले रईस और गैर-जिम्मेदार नागरिकों पर भारी जुर्माना क्यों नहीं ठोकती?

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