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क्या बीएमसी कमिश्नर अश्विनी भिड़े भी कुंभकर्णी नींद में सो रहे हैं? मालाड में 53 दिनों से ‘वशिष्ठ वाणी’ की गूंज, फिर भी भू-माफियाओं का राज!

मुंबई / मालाड वेस्ट: देश की सबसे अमीर महानगरपालिका (BMC) के बड़े-बड़े दावे और ‘जीरो टॉलरेंस’ का ढोल उस वक्त पूरी तरह फट जाता है, जब ग्राउंड जीरो पर भू-माफिया सरकारी नोटिस को रद्दी का टुकड़ा समझकर हवा में उड़ा देते हैं। मामला मालाड वेस्ट के भद्रन नगर (रोड नंबर 1) स्थित ‘कोयला वाला गली’ का है, जहाँ रेलवे ट्रैक के बिल्कुल करीब, नियमों और जनसुरक्षा की धज्जियां उड़ाकर एक विशाल जानलेवा अवैध निर्माण खड़ा किया जा रहा है।

हैरानी की बात यह है कि ‘वशिष्ठ वाणी’ पिछले 53 दिनों से लगातार इस भ्रष्टाचार और अवैध निर्माण के खिलाफ सबूतों के साथ आवाज उठा रहा है, लेकिन बीएमसी के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही।

कमिश्नर अश्विनी भिड़े जी, कब चलेगा आपका हंटर?

मुंबई की कमान संभाल रहीं बीएमसी कमिश्नर अश्विनी भिड़े के प्रशासनिक अनुशासन के चर्चे तो बहुत सुने जाते हैं, लेकिन मालाड का यह मामला उनके दावों पर एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा करता है। जनता अब सीधे मैडम कमिश्नर से पूछ रही है—“आखिर इस अवैध निर्माण पर कार्रवाई कब होगी?” क्या वरिष्ठ अधिकारियों तक इस भ्रष्टाचार की फाइलें पहुँचने से पहले ही फाइलों में ‘वजन’ रख दिया जाता है, या फिर कमिश्नर कार्यालय ने भी मालाड की जनता को भू-माफियाओं के रहमों-करम पर छोड़ दिया है?


कुंभकर्णी नींद में सोए P/North वार्ड के सहायक आयुक्त कुंदन वळवी!

इस पूरे मामले का सबसे हास्यास्पद और शर्मनाक पहलू प्रशासनिक लाचारी (या कहें तो सोची-समझी खामोशी) है। पी/उत्तर (P/North) वार्ड के सहायक आयुक्त कुंदन वळवी के कार्यालय से 21 मई 2025 को ही इस अवैध निर्माण के खिलाफ आधिकारिक तौर पर हथौड़ा चलाने (तोड़ू कार्रवाई) का नोटिस जारी किया गया था।


कटाक्ष: नोटिस जारी हुए साल बीत गए, लेकिन मजाल है कि उस अवैध ढांचे की एक ईंट भी हिली हो! शायद कुंदन वळवी जी रामायण के ‘कुंभकर्ण’ से ट्यूशन ले रहे हैं, जो 53 दिनों की लगातार मीडिया रिपोर्टिंग और खुद के दफ्तर के नोटिस के बाद भी जागने का नाम नहीं ले रहे। या फिर यह माना जाए कि नोटिस सिर्फ कागजी खानापूर्ति और ‘सेटिंग का खेल’ शुरू करने का एक जरिया मात्र था?

जब स्थानीय स्तर पर सहायक आयुक्त कार्यालय पूरी तरह नतमस्तक हो चुका हो, तब अंतिम उम्मीद सिर्फ शीर्ष नेतृत्व यानी कमिश्नर अश्विनी भिड़े से बचती है। अब देखना यह है कि क्या कमिश्नर इस मामले में सीधे दखल देकर इस भ्रष्ट तंत्र पर गाज गिराती हैं, या फिर भू-माफियाओं का यह अवैध किला इसी तरह बीएमसी की नाक के नीचे फलता-फूलता रहेगा।

‘वशिष्ठ वाणी’ का साफ संकल्प है— जब तक भ्रष्ट अधिकारियों की नींद नहीं टूटेगी और इस अवैध निर्माण को जमींदोज नहीं किया जाएगा, हमारी कलम की धार कम नहीं होगी!

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