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कांचपाड़ा सिग्नल पर ‘बैनरबाज़ी’ का कब्ज़ा: नेताओं को प्रचार की भूख, BMC अधिकारियों को लगी ‘प्रमोशन’ की मोतियाबिंद!

मुंबई: स्थानीय नागरिकों और ट्रैफिक पुलिस की कड़ी मशक्कत के बाद जैसे-तैसे कांचपाड़ा (Kanchpada) का सिग्नल अतिक्रमण और ट्रैफिक से खाली हुआ था, लेकिन अब वहां एक नया ‘सियासी ग्रहण’ लग चुका है। काम करने में शून्य और प्रचार में नंबर वन रहने वाले नेताओं ने अपनी चमचमाती तस्वीरों वाले भारी-भरकम होर्डिंग्स और बैनर सीधे सिग्नल पर ही ठोक दिए हैं।

सवाल यह उठता है कि क्या इन तथाकथित जनप्रतिनिधियों और नेताओं को जनता की सहूलियत से कोई सरोकार है, या फिर बिना काम किए सिर्फ विज्ञापन का शौक ही इनकी राजनीति की असली परिभाषा बन चुका है? अधिक से अधिक लोगों की नजरों में आने की इस सिसकती होड़ में, नियमों और जनसुरक्षा को सीधे तौर पर ताक पर रख दिया गया है।

बीएमसी (BMC) के अधिकारियों को ‘तस्वीर’ का खौफ या ट्रांसफर का डर?

इस पूरे मामले में सबसे शर्मनाक भूमिका बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) के प्रशासनिक अधिकारियों की नजर आ रही है। नियमों के मुताबिक, किसी भी सिग्नल या सार्वजनिक यातायात में बाधा डालने वाले स्थान पर अवैध होर्डिंग लगाना सख्त मना है। लेकिन जब बैनर पर बड़े-बड़े नेताओं और मंत्रियों के चेहरे मुस्कुरा रहे हों, तो बीएमसी के अधिकारियों की निष्पक्षता और कानून का डंडा गायब हो जाता है।

क्या ईमानदार अधिकारी अब इतिहास बन चुके हैं?

आज स्थिति यह हो चुकी है कि ज्यादातर अधिकारी जनता की समस्याओं को हल करने के बजाय मंत्रियों और रसूखदार नेताओं की परिक्रमा करने में व्यस्त हैं। जनसेवा को छोड़कर नेताओं के आगे-पीछे घूमने की यह चाटुकारिता सिर्फ इसलिए की जा रही है ताकि मनचाही पोस्टिंग और प्रमोशन का रास्ता साफ हो सके।

सीधे जुर्माने की कार्रवाई से क्यों बच रहा है प्रशासन?

अगर बीएमसी प्रशासन में थोड़ी भी कानूनी नैतिकता बची होती, तो इन अवैध होर्डिंग्स को देखने के तुरंत बाद संबंधित लोगों और राजनीतिक दलों पर ऐसा तगड़ा जुर्माना लगाया जाता कि दोबारा किसी की हिम्मत सिग्नल पर अपनी फोटो टांगने की न होती। मगर कार्रवाई के नाम पर यहाँ सिर्फ कागजी घोड़े दौड़ाए जाते हैं।

अब देखना यह है कि कांचपाड़ा सिग्नल पर लगा यह अवैध बैनर हटने में कितने हफ्ते या कितने महीने बीत जाते हैं, या फिर हमेशा की तरह अधिकारी कुंभकर्णी नींद में सोए रहकर किसी बड़े हादसे या जनता के बढ़ते आक्रोश का इंतजार करेंगे।

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