लेख: अभिषेक अनिल वशिष्ठ
आज एक बेहद शर्मनाक दौर से हमारा लोकतंत्र गुजर रहा है। जिस राजनीति को सेवा का माध्यम होना चाहिए था, वह आज केवल सौदेबाजी का अड्डा बनकर रह गई है। क्या आपने गौर किया है कि आपके द्वारा चुने गए नेता आज अपनी विचारधारा, अपना दल और अपनी निष्ठा को इतनी आसानी से क्यों बदल रहे हैं?
लोकतंत्र की हत्या का खेल
नेताओं का एक दल से दूसरे दल में जाना अब नीति नहीं, एक ‘व्यापार’ बन चुका है। ईडी (ED) और सीबीआई (CBI) के डर से अपनी खाल बचाने के लिए या सत्ता के लालच में दल बदलने वाले ये नेता, आपकी समस्याओं के लिए राजनीति में नहीं आए हैं। ये केवल अपनी कुर्सी और अपने भविष्य की सुरक्षा सुनिश्चित कर रहे हैं।

• लेख: अभिषेक अनिल वशिष्ठ •
(वशिष्ठ मीडिया हाउस प्राइवेट लिमिटेड के चेयरमैन एवं समूह दैनिक समाचार पत्र के स्वामी/प्रकाशक)
जिस तरह से आज सांसदों और विधायकों को ‘खरीदा और बेचा’ जा रहा है, वह स्पष्ट करता है कि उनके लिए आपका वोट, आपकी समस्याएं और आपका भविष्य कोई मायने नहीं रखता। जिस बीजेपी की राजनीति ने इस ‘दल-बदल’ के खेल को एक नई ऊंचाई दी है, उसे समझने का समय आ गया है। अगर आज जनता ने इस खेल को नहीं समझा, तो कल बहुत देर हो जाएगी।
आपकी चुप्पी, उनका हौसला
जनता अक्सर यह कहकर शांत हो जाती है कि “सब ऐसे ही हैं” या “क्या फर्क पड़ता है”। यही वह सोच है जिसका फायदा उठाकर ये नेता पांच साल तक आपकी अनदेखी करते हैं। याद रखिए, जब आप चुप रहते हैं, तो आप इस भ्रष्टाचार को मौन सहमति देते हैं।
वशिष्ठ वाणी का आह्वान: इन चेहरों को याद रखें
‘वशिष्ठ वाणी’ का जन्म सत्य के लिए हुआ है। हम जानते हैं कि सत्ता से सवाल पूछने की कीमत हमें चुकानी पड़ सकती है, शायद हमारा अखबार बंद करने की धमकी भी दी जाए, लेकिन हम पीछे नहीं हटेंगे।
हमारा आपसे निवेदन है:
- सूची बनाएं: दल बदलने वाले उन सभी नेताओं के नाम लिखकर रखें जो आज आपकी समस्याओं को दरकिनार कर अपनी सत्ता की रोटियां सेंक रहे हैं।
- बहिष्कार करें: जब ये नेता पांच साल बाद फिर से वोट मांगने आएं, तो इन्हें बताएं कि जनता अब जाग चुकी है। ऐसे अवसरवादी नेताओं का पूर्ण बहिष्कार ही लोकतंत्र की रक्षा का एकमात्र तरीका है।
- सत्ता के खेल को समझें: यह सिर्फ एक पार्टी का सवाल नहीं, यह आपके भविष्य का सवाल है।
अगर आपने इन्हें अभी सबक नहीं सिखाया, तो समझ लीजिए कि आने वाले समय में आपकी फरियाद सुनने वाला कोई नहीं होगा। याद रखिए, लोकतंत्र में मालिक आप हैं, और इन नेताओं को आपकी उंगलियों के निशान (वोट) से ही ताकत मिलती है।
वशिष्ठ वाणी—सत्य जो कोई नहीं कह पाता, वह हम कहेंगे।














