श्रद्धालुओं को नई सुविधाएँ, पर्यटन को नया आयाम, स्थानीय अर्थव्यवस्था को नया संबल
लोकार्पण के 4 वर्ष पूर्ण — 13 दिसंबर को 2 दिवसीय सांस्कृतिक कार्यक्रम का शुभारंभ
वाराणसी/वशिष्ठ वाणी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की निगरानी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशन में श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास द्वारा वर्ष 2024 से शुरू किए गए नवाचारों ने श्री काशी विश्वनाथ धाम को नव्य, भव्य और दिव्य स्वरूप प्रदान किया है। धार्मिक, आध्यात्मिक, सांस्कृतिक, शैक्षणिक और तकनीकी क्षेत्रों में हुए बदलावों ने श्रद्धालुओं के अनुभव को पहले से कहीं अधिक सुगम और आध्यात्मिक बनाया है।
13 दिसंबर 2021 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा लोकार्पित इस दिव्य धाम के चार वर्ष पूर्ण होने पर बाबा के प्रांगण को भव्य रूप से सजाया गया है। स्थापना दिवस के अवसर पर दो दिवसीय विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन भी किया जा रहा है।
दर्शनार्थियों में अभूतपूर्व वृद्धि, अर्थव्यवस्था को मजबूत आधार
श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास परिषद के मुख्य कार्यपालक अधिकारी विश्व भूषण मिश्र के अनुसार—
- वर्ष 2024 में धाम में 6 करोड़ 23 लाख से अधिक श्रद्धालु पहुंचे।
- वर्ष 2025 में यह संख्या बढ़कर 6 करोड़ 66 लाख को पार कर गई।
- पिछले चार वर्षों में कुल 26 करोड़ से अधिक देश-विदेश के भक्त महादेव के दरबार में नतमस्तक हुए हैं।
श्री मिश्र के अनुसार, इन दो वर्षों में किए गए नवाचारों का सीधा प्रभाव पर्यटन उद्योग, स्थानीय अर्थव्यवस्था और काशी की सांस्कृतिक पहचान पर पड़ा है।
वर्ष 2024–2025 के प्रमुख नवाचार
नीचे श्री काशी विश्वनाथ धाम में पिछले दो वर्षों में शुरू की गई प्रमुख योजनाओं और नवाचारों का विस्तृत विवरण—
1. सामाजिक सेवा और संस्कृत शिक्षा को प्रोत्साहन
- अन्नक्षेत्र से अस्पतालों व संस्कृत विद्यालयों के लिए भोजन व्यवस्था:
कैंसर अस्पताल, जिला चिकित्सालय और जनपद के संस्कृत विद्यालयों के लिए भोजन उपलब्ध कराने की व्यवस्था शुरू। - सांसद संस्कृत प्रतियोगिता और शिक्षण सामग्री वितरण:
संस्कृत संवर्धन के लिए जिलेभर के विद्यालयों में प्रतियोगिता, वाद्य यंत्र, पुस्तकें और वस्त्र वितरित।
2. काशीवासियों के लिए विशेष प्रवेश मार्ग
12 जुलाई 2024 से काशीवासियों के लिए विशेष दर्शन मार्ग शुरू।
स्थानीय पहचान पत्र दिखाकर सुबह 4–5 बजे तथा शाम 4–5 बजे धाम में सुगम दर्शन की सुविधा उपलब्ध।
3. FCRA सुविधा की शुरुआत
5 सितंबर 2024 से विदेशों में रहने वाले भक्त सीधे मंदिर न्यास के खाते में दान कर सकते हैं।
इससे वैश्विक स्तर पर मंदिर से जुड़े भक्तों की सहभागिता बढ़ी।
4. तकनीक का उपयोग — AR/VR वर्चुअल दर्शन
13 जून 2024 से AR/VR वर्चुअल दर्शन की शुरुआत।
भक्त अब धाम में उपस्थित न होकर भी बाबा विश्वनाथ की:
- मंगला आरती
- भोग आरती
- सप्तऋषि आरती
- श्रृंगार आरती
- शयन आरती
का डिजिटल अनुभव प्राप्त कर सकते हैं।
5. त्योहारों पर पुष्प वर्षा और विशेष स्वागत
श्रावण, महाशिवरात्रि सहित प्रमुख पर्वों पर कतार में लगे श्रद्धालुओं पर पुष्पवर्षा की व्यवस्था की गई।
6. प्लास्टिक मुक्त धाम अभियान
11 अगस्त 2025 से धाम में प्लास्टिक से निर्मित वस्तुओं के प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध लागू।
यह पहल धाम को और स्वच्छ व पर्यावरण अनुकूल बनाने में अत्यंत सफल रही।
7. सात्विक प्रसाद निर्माण एवं विक्रय व्यवस्था
तंदुल और बेलपत्र आधारित एकीकृत सात्विक प्रसाद प्रणाली शुरू की गई, जिससे प्रसाद की गुणवत्ता और शुचिता सुनिश्चित हो सके।
8. वृद्ध, दिव्यांग और बच्चों के लिए विशेष सुविधाएँ
- निःशुल्क गोल्फ कार्ट एवं ई-रिक्शा
- गर्मी में कैनोपी, कूलर, ORS व शुद्ध पेयजल
- बच्चों के लिए टॉफी, बिस्कुट, चॉकलेट
श्रद्धालुओं की सुविधा को प्राथमिकता देने वाला यह प्रयास व्यापक सराहना पा रहा है।
9. धाम से जुड़े प्रमुख आध्यात्मिक उपक्रम
- श्री रामेश्वरम–श्री काशी विश्वनाथ जल–अभिषेक परंपरा का शुभारंभ।
- प्रत्येक प्रदोष तिथि पर श्री नंदीश्वर पूजा का आयोजन।
- बैकुंठ चतुर्दशी, राधा अष्टमी, गंगा सप्तमी आदि पर्वों पर विशेष पूजा-अनुष्ठान।
- शंकराचार्य चौक पर सांस्कृतिक संध्या और सोशल मीडिया पर लाइव प्रसारण।
10. धार्मिक पर्वों पर अनोखी पहल
- होली 2025 पर
कृष्ण जन्मस्थान (मथुरा) एवं काशी विश्वनाथ धाम के मध्य पहली बार भेंट–आदान-प्रदान की परंपरा शुरू। - नवरात्रि में देवी श्रृंगार सामग्री भगवान विश्वेश्वर को अवलोकन के बाद मंदिरों को प्रेषित करने की नई प्रक्रिया शुरू।
11. धाम में विराजमान सभी देव विग्रहों की नियमित पूजा
विशिष्ट तिथियों पर धाम के विस्तृत परिसर में मौजूद सभी देव-विग्रहों की पूजा, रुद्राभिषेक एवं विशेष अनुष्ठान का आयोजन।
दो वर्षों में हुए इन नवाचारों ने श्री काशी विश्वनाथ धाम को आधुनिक तकनीक, प्राचीन परंपराओं और सुगम दर्शन सुविधाओं का अनोखा संगम बना दिया है।
दिव्यता, सुरक्षा, स्वच्छता और श्रद्धालुओं की सुविधा — इन चार स्तंभों पर आधारित यह यात्रा आने वाले वर्षों में और भी नए अध्याय लिखेगी।


