मुंबई, मिथचौकी: मुंबई की सड़कों पर गड्ढे गिरगिट की तरह रंग बदल रहे हैं, लेकिन BMC की नज़रों में वो शायद ‘कलाकृति’ हैं। वहीं दूसरी ओर, मिठ चौकी सिग्नल पर किसी ‘माननीय’ का बैनर क्या पलटा, BMC के पूरे महकमे को जैसे ‘हार्ट अटैक’ आ गया। वशिष्ठ वाणी के पास मौजूद सबूत चीख-चीख कर कह रहे हैं कि यह प्रशासन जनता का नहीं, सिर्फ ‘खास चेहरों’ का गुलाम बन चुका है।
🚨 सनसनीखेज खुलासा: 4 दिन से जारी है ‘ऑपरेशन बैनर’
जनता के खून-पसीने की कमाई से मिलने वाले टैक्स का उपयोग देखिए:
तस्वीर 1: तेज़ हवा से विधायक का बैनर उल्टा होता है। कायदे से इसे हटा देना चाहिए क्योंकि यह अवैध और खतरनाक है।


तस्वीर 2: लेकिन नहीं! रातों-रात सरकारी मशीनरी सक्रिय होती है और उस अवैध बैनर को ऐसे सहलाया और सीधा किया जाता है जैसे वह शहर की कोई ‘हेरिटेज बिल्डिंग’ हो।
- तस्वीर 3: यह तमाशा पिछले 4 दिनों से लगातार जारी है। बैनर गिरता है, प्रशासन उसे ‘सलाम’ ठोककर फिर खड़ा कर देता है।
🔥 BMC कमिश्नर से ‘वशिष्ठ वाणी’ के सीधे सवाल:
- स्पेशल ड्यूटी पर कौन है? क्या मिथचौकी सिग्नल पर BMC ने विशेष रूप से ‘बैनर सीधा करने वाले इंजीनियरों’ की भर्ती की है?
- कानून का मज़ाक: हाई कोर्ट के आदेशों के बावजूद, सिग्नल और ब्रिज पर ये बैनर कैसे ज़िंदा हैं? और ऊपर से प्रशासन उनकी ‘नर्सिंग’ क्यों कर रहा है?
- गड्ढों पर चुप्पी क्यों? अगर यही फुर्ती सड़कों के गड्ढे भरने में दिखाई जाती, तो आज मुंबईकर को अपनी जान जोखिम में डालकर गाड़ी नहीं चलानी पड़ती। क्या नेताओं की फोटो जनता की जान से ज़्यादा कीमती है?
जनता का आक्रोश: “हमें सर्विस नहीं, सिर्फ चेहरा दिखाया जा रहा है”
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यह ‘प्रशासनिक बेशर्मी’ की पराकाष्ठा है। जब आम आदमी शिकायत करता है, तो फाइलें महीनों तक नहीं हिलतीं, लेकिन जब नेता जी का पोस्टर टेढ़ा होता है, तो पूरा सिस्टम ‘उल्टा’ होकर उसे सीधा करने में लग जाता है।
वशिष्ठ वाणी की चेतावनी:
“अगर यह चाटुकारिता बंद नहीं हुई, तो जनता जल्द ही इन बैनरों के नीचे खड़े होकर BMC की ‘शव-यात्रा’ निकालेगी। हम तस्वीरें दिखा रहे हैं, अब जवाब कमिश्नर साहब को देना है!”
ब्यूरो रिपोर्ट: वशिष्ठ वाणी (सत्य जो सत्ता को हिला देगा)










