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रविदास घाट पर आतंकी हमले की मॉक ड्रिल सफल, घाटों पर हाई अलर्ट मोड में सुरक्षा बल तैनात

  • — प्रह्लाद पांडेय की रिपोर्ट

वाराणसी/वशिष्ठ वाणी। काशी के रविदास घाट पर गुरुवार शाम आतंकवाद निरोधक मॉक ड्रिल का सफल आयोजन किया गया। यह अभ्यास संभावित आतंकी हमले की स्थिति में सुरक्षा एजेंसियों की त्वरित प्रतिक्रिया, समन्वय और तैयारी का परीक्षण करने के उद्देश्य से किया गया था।

मॉक ड्रिल में एनएसजी (ब्लैक कैट कमांडो), एटीएस, एसटीएफ, यूपी पुलिस, एनडीआरएफ और स्थानीय खुफिया इकाइयों की संयुक्त टीमों ने भाग लिया। खुफिया इनपुट के आधार पर तैयार किए गए इस परिदृश्य में दिखाया गया कि आतंकवादी एक क्रूज पर सवार होकर श्रद्धालुओं को बंधक बना लेते हैं।

शाम 4 बजे शुरू हुई इस ड्रिल में पहले चरण में एनडीआरएफ और एटीएस की टीमों ने बोट के जरिये आतंकियों को रोकने की कोशिश की। तत्पश्चात दूसरे चरण में एनएसजी कमांडो ने हेलिकॉप्टर से रैपलिंग कर क्रूज पर उतरते हुए ऑपरेशन शुरू किया। घाट पर तैनात एटीएस और एसटीएफ की टीमें स्नाइपर और ड्रोन की मदद से आतंकियों की घेराबंदी कर उन्हें ‘न्यूट्रलाइज’ करने में सफल रहीं।

पूरे ऑपरेशन को केवल 12 मिनट में सफलतापूर्वक अंजाम दिया गया, जिसमें सभी ‘आतंकियों’ को मार गिराया गया और बंधकों को सुरक्षित बचा लिया गया। इसके बाद बम डिस्पोजल स्क्वॉड ने नकली आईईडी को निष्क्रिय करने का प्रदर्शन किया, जबकि मेडिकल टीम ने तत्काल राहत और उपचार की प्रक्रिया दिखाई।

पूरी ड्रिल की ड्रोन और सीसीटीवी कैमरों से रियल-टाइम मॉनिटरिंग की गई। इस दौरान घाट पर मौजूद श्रद्धालुओं और पर्यटकों को पहले से सूचित कर सुरक्षित दूरी पर रखा गया।

ड्रिल के दौरान असली हथियारों के स्थान पर ब्लैंक फायर और स्मोक ग्रेनेड का प्रयोग किया गया, जबकि ऑपरेशन की रणनीति वास्तविक परिस्थितियों पर आधारित रही।

घटना स्थल पर वाराणसी के वरिष्ठ अधिकारी, लंका थाना पुलिस और प्रशासनिक टीम मौजूद रही। ड्रिल के अंत में सुरक्षा एजेंसियों के समन्वय और तत्परता की सराहना की गई।

एक महिला तीर्थयात्री ने कहा — “ऐसा लग रहा था मानो कोई हॉलीवुड फिल्म चल रही हो। लेकिन अब विश्वास है कि हमारी सुरक्षा व्यवस्था कितनी मजबूत है।”

यह मॉक ड्रिल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र में आयोजित सुरक्षा अभियानों के तहत ‘जीरो टॉलरेंस नीति’ का हिस्सा थी, जिसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि काशी जैसे धार्मिक और पर्यटन स्थलों पर किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए सभी एजेंसियां हर वक्त तैयार रहें।

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