मालाड पश्चिम/ जनकल्याण नगर: रियल एस्टेट सेक्टर में तेज़ी के बीच Dotom Group की बुकिंग पॉलिसी को लेकर ग्राहकों और स्थानीय लोगों में सवाल उठने शुरू हो गए हैं। जानकारी के अनुसार जनकल्याण नगर स्थित प्रोजेक्ट में फ्लैट बुकिंग दो श्रेणियों—सिल्वर और गोल्ड—में की जा रही है, जिनकी शर्तें अलग-अलग हैं।
सिल्वर बुकिंग:
इस श्रेणी में ग्राहक को केवल “बुकिंग” का स्टेटस दिया जाता है। फ्लैट नंबर या फ्लोर का आवंटन नहीं होता। यदि ग्राहक बुकिंग रद्द करता है तो राशि वापस की जाती है, हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि पूरा पैसा लौटाया जाता है या कुछ कटौती होती है।
गोल्ड बुकिंग:
इस श्रेणी की शर्तें और कड़ी हैं। यदि ग्राहक किसी भी कारण से भुगतान पूरा नहीं कर पाता या बुकिंग रद्द करता है तो “नो रिफंड पॉलिसी” के तहत जमा किया गया पैसा वापस नहीं किया जाता।
इस पॉलिसी ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। उदाहरण के तौर पर यदि कोई ग्राहक 1 करोड़ रुपये का फ्लैट बुक करता है और लगभग 30 लाख रुपये जमा करने के बाद भुगतान जारी नहीं रख पाता है तो पूरी राशि कंपनी के पास चली जाती है। दूसरी तरफ प्रोजेक्ट में वही फ्लैट आगे चलकर किसी अन्य खरीदार को अधिक भाव पर बेचा जा सकता है, जिससे कंपनी को दोहरा लाभ मिलता है।
मीडिया का सवाल है कि—
“जब फ्लैट दूसरे को बेच दिया जाता है, तो पहले ग्राहक का पैसा वापस क्यों नहीं किया जाता?”
अब सवाल यह भी उठ रहा है कि ऐसी “नो रिफंड पॉलिसी” बनाने की अनुमति बिल्डरों को कौन देता है और इस तरह की पॉलिसी कितनी पारदर्शी है?
⚖ क्या बिल्डर ऐसी नो-रिफंड पॉलिसी बना सकता है? – कानूनी स्थिति
रियल एस्टेट सेक्टर में पॉलिसी, RERA और उपभोक्ता कानूनों के दायरे में आती हैं।
✔ अगर प्रोजेक्ट RERA में रजिस्टर्ड है, तो:
- बिल्डर किसी भी तरह की शर्तें थोप नहीं सकता जो खरीदार के खिलाफ अन्यायपूर्ण हों।
- RERA की धारा 18 में स्पष्ट है कि यदि खरीदार बुकिंग/अग्रीमेंट रद्द करता है, तो उचित कटौती के बाद पैसा वापस किया जा सकता है।
- “नो रिफंड पॉलिसी” सीधे अनुचित व्यापार व्यवहार के अंतर्गत आ सकती है।
✔ कंट्रैक्ट कानून (Indian Contract Act) भी कहता है कि कोई भी कॉन्ट्रैक्ट “वन-साइडेड” या “अनकांशनेबल” हो तो उसे अदालत में चुनौती दी जा सकती है।
🛑 अगर Dotom Group ने पैसा वापस नहीं किया तो खरीदार क्या कर सकता है?
खरीदार के पास कई रास्ते हैं:
- RERA में शिकायत
- सबसे प्रभावी तरीका
- बिल्डर को नोटिस और हियरिंग होती है
- रिफंड + ब्याज तक का आदेश मिल सकता है
- उपभोक्ता आयोग (Consumer Court)
- “अनुचित व्यापार व्यवहार” व “आर्थिक हानि” के आधार पर केस
- कंपेनसेशन भी मिल सकता है
- सिविल कोर्ट
- कॉन्ट्रैक्ट चुनौती देकर रकम रिकवरी
- MAHARERA Ombudsman (महाराष्ट्र में)
- कई ऐसे केस पहले भी निपटाए जा चुके हैं
- समूह शिकायत
- कई खरीदार मिलकर शिकायत करें तो प्रभाव तेजी से पड़ता है
📌 मीडिया से उठने वाला बड़ा सवाल
Dotom Group को यह स्पष्ट करने की आवश्यकता है कि —
- ऐसी नो-रिफंड पॉलिसी की आवश्यकता क्यों पड़ी?
- इस पॉलिसी को मंजूरी किस नियामक अथॉरिटी से मिली?
- यह पॉलिसी खरीदार हितों के अनुरूप है या नहीं?

