मुंबई | विशेष संवाददाता (वशिष्ठ वाणी)
मालवणी गेट नंबर 8 स्थित स्वप्नपूर्ति सोसायटी इन दिनों अपनी अव्यवस्थाओं के कारण नहीं, बल्कि प्रशासन की रहस्यमयी चुप्पी के कारण चर्चा में है। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि सोसायटी और फेडरेशन के अध्यक्ष बालासाहेब भगत की मनमानी ने आम रहवासियों का जीना मुहाल कर दिया है। चौंकाने वाली बात यह है कि म्हाडा उपनिबंधक अधिकारी बी.एस. कटरे के पास शिकायतों का अंबार होने के बावजूद, अब तक कोई ठोस कार्रवाई न होना कई गंभीर सवाल खड़े करता है।
🔴 मासूम की जान से खिलवाड़: दोबारा लगाया गया ‘खूनी’ बोर्ड
सोसायटी के मुख्य गेट पर लगा भारी लोहे का फेडरेशन बोर्ड पहले भी एक मासूम बच्ची को घायल कर चुका है। नियमतः इसे तत्काल हटाया जाना चाहिए था, लेकिन आरोप है कि सत्ता के रसूख के चलते इसे दोबारा उसी खतरनाक स्थिति में लगा दिया गया है। रहवासी आज भी इस बोर्ड के नीचे से गुजरते वक्त खौफ के साये में रहते हैं।
🔴 बिल्डिंग 1D या अवैध स्टैंड?
बिल्डिंग 1D के परिसर को कथित तौर पर एक अवैध ऑटो रिक्शा स्टैंड में तब्दील कर दिया गया है। रात के समय यहाँ रिक्शों का जमावड़ा न केवल रास्ता रोकता है, बल्कि सुरक्षा के लिहाज से भी एक बड़ा खतरा बन गया है। महिलाओं और बुजुर्गों को इस रास्ते से गुजरने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
🔴 15 साल का ‘अघोषित साम्राज्य’
लोकतंत्र में बदलाव जरूरी है, लेकिन स्वप्नपूर्ति सोसायटी में बालासाहेब भगत पिछले 15 वर्षों से काबिज हैं। निवासियों का सवाल है कि क्या इस लंबे कार्यकाल के दौरान नियमों और पारदर्शिता का पालन किया गया? म्हाडा प्रशासन ने अब तक इस एकाधिकार की जांच क्यों नहीं की?
🔴 अधिकारी कटरे की भूमिका संदिग्ध?
निवासियों का आरोप है कि जब भी जब भी म्हाडा क्षेत्र निर्माण (गोरेगांव) के अधिकारी कार्रवाई की कोशिश करते हैं, तब-तब सोसायटी अध्यक्ष ने म्हाडा उपनिबंधक बी.एस. कटरे का हवाला देकर कार्रवाई से बचने का प्रयास किया।
🔥 वशिष्ठ वाणी के सीधे सवाल:
- बी.एस. कटरे जवाब दें: शिकायतों के बावजूद बालासाहेब भगत पर कार्रवाई क्यों रुकी हुई है?
- सुरक्षा का जिम्मेदार कौन? अगर उस भारी बोर्ड से दोबारा कोई हादसा होता है, तो क्या प्रशासन इसकी जिम्मेदारी लेगा?
- अवैध स्टैंड पर चुप्पी क्यों? बिल्डिंग परिसर में रिक्शा स्टैंड चलाने की अनुमति किसने दी?
- पारदर्शिता कहाँ है? 15 साल के कार्यकाल का ऑडिट और चुनाव नियमों के तहत क्यों नहीं कराया जा रहा?
“हमारा काम सच को सामने लाना है। स्वप्नपूर्ति सोसायटी के निवासियों को न्याय मिलने तक ‘वशिष्ठ वाणी’ इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाती रहेगी।”













