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सत्ता का रसूख या जनता से विश्वासघात? मालाड की ‘कोयला वाला गली’ में नगरसेवक योगेश वर्मा का ‘मौन’ व्रत!

विशेष खोजी रिपोर्ट: वशिष्ठ वाणी ब्यूरो मालाड (मुंबई): उत्तर मुंबई के भद्रन नगर इलाके में इन दिनों एक ही यक्ष प्रश्न गूंज रहा है—क्या स्थानीय जनता की समस्याओं को रसूखदारों के आगे गिरवी रख दिया गया है, या फिर राजनीतिक रसूख ने कानून की आँखों पर पट्टी बांध दी है? मालाड वेस्ट के भद्रन नगर, रोड नंबर 1, रेलवे ट्रैक के पास स्थित ‘कोयला वाला गली’ में सीना ताने खड़ा यह अवैध निर्माण अब महज ईंट-पत्थर का बेजान ढांचा नहीं रह गया है। यह अवैध ढांचा अब स्थानीय नगरसेवक योगेश वर्मा की कार्यशैली, उनके दावों और जनता के प्रति उनकी जवाबदेही पर एक बहुत बड़ा सवालिया निशान बन चुका है।

चुनाव में बड़े-बड़े वादे, भद्रन नगर में भू-माफिया के ठाठ!

जो जनप्रतिनिधि चुनाव के समय जनता के बीच जाकर ‘सुरक्षित और सुव्यवस्थित मालाड’ का वादा करते नहीं थकते, आज उन्हीं के क्षेत्र में एक कथित माफिया ‘कर्सन’ तमाम कायदे-कानूनों को ठेंगे पर रखकर सरेआम अवैध निर्माण खड़ा कर देता है। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि ‘वशिष्ठ वाणी’ द्वारा लगातार इस सटीक लोकेशन पर निरंतर ग्राउंड रिपोर्टिंग की जा रही है, सारे सबूत और कागजात सार्वजनिक किए जा चुके हैं, लेकिन नगरसेवक योगेश वर्मा की ‘रहस्यमयी चुप्पी’ टूटने का नाम नहीं ले रही है।

बड़ा सवाल: क्या एक रसूखदार नगरसेवक इतने बेबस हैं कि अपने ही वॉर्ड के भद्रन नगर रोड नंबर 1 पर चल रहे इस खुले उल्लंघन पर कोई ठोस कदम नहीं उठा पा रहे? या फिर ‘कोयला वाली गली’ के इस खेल ने स्थानीय राजनीतिक सिस्टम की चमक को पूरी तरह से धुंधला कर दिया है?


जनता की अदालत में स्थानीय नेतृत्व से 4 तीखे सवाल:

  1. नगरसेवक जी, जवाब दीजिए: क्या आपकी साफ-सुथरी राजनीति और जनता की सुरक्षा का दावा इस भू-माफिया ‘कर्सन’ के अवैध निर्माण के आगे सरेंडर कर चुका है?
  2. वोट देने वाली जनता का अपमान क्यों?: जब मीडिया लगातार सबूतों के साथ इस गंभीर मुद्दे को उठा रहा है, तब भी स्थानीय स्तर पर इस आवाज़ को सिरे से नजरअंदाज करना क्या भद्रन नगर के मतदाताओं का खुला अपमान नहीं है?
  3. कार्रवाई को रोकने वाला ‘अदृश्य हाथ’ किसका है?: इस क्षेत्र में चल रहे इस अवैध खेल की फाइल को उच्च अधिकारियों और बीएमसी कमिश्नर की टेबल तक सही तरीके से पहुंचने से रोकने वाला वो रसूखदार आका कौन है?
  4. किसकी तिजोरी से जुड़े हैं तार?: क्या कोयला वाला गली में अवैध निर्माण करने वाले इस ‘कर्सन’ पर हाथ डालने से स्थानीय नेतृत्व इसलिए डर रहा है क्योंकि इसके तार किसी बड़ी राजनीतिक तिजोरी से जुड़े हैं?

निष्कर्ष:

लोकतंत्र में जब जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधि ही मौन साध लें, तो गलत काम करने वालों के हौसले बुलंद होना लाजिमी है। मालाड वेस्ट के भद्रन नगर का यह विवाद अब सिर्फ एक अवैध निर्माण का मामला नहीं रहा, बल्कि यह जनता के विश्वास बनाम राजनीतिक संरक्षण की लड़ाई बन चुका है। देखना यह है कि इस तीखे सच के सामने आने के बाद भी नगरसेवक योगेश वर्मा अपना ‘मौन व्रत’ जारी रखते हैं या फिर जनता के हित में मैदान में उतरते हैं।

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