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‘सतीश राउत’ के आते ही कांदिवली ट्रैफिक विभाग पस्त, चरकोप सिग्नल पर अवैध पार्किंग मस्त!

💥 बड़ा खुलासा: एकता नगर रोड पर सरेआम ‘भारत गैस’ सिलेंडरों का अवैध साम्राज्य, क्या किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है प्रशासन?

मुंबई: जब रक्षक ही आंखें मूंद ले, तो भक्षक के हौसले बुलंद होना लाजिमी है। कांदिवली ट्रैफिक विभाग की कमान जब से सतीश राउत के हाथों में आई है, तब से चरकोप सिग्नल से एकता नगर रोड तक का पूरा इलाका अवैध पार्किंग के सिंडिकेट में तब्दील हो चुका है। आम तौर पर गाड़ियां सिग्नल देखकर रुकती हैं, लेकिन यहाँ सतीश राउत के राज में ट्रैफिक सिग्नल के ठीक नीचे ही गाड़ियों का ‘स्थायी ठिकाना’ बन गया है।


🔍 पहली तस्वीर: बीच सड़क पर ‘भारत गैस’ सिलेंडरों का अवैध साम्राज्य!

‘वशिष्ठ वाणी’ द्वारा जारी की गई पहली तस्वीर सीधे तौर पर एक बड़े हादसे को दावत दे रही है। एकता नगर रोड पर लाइन से भारत गैस के सिलेंडरों से भरी गाड़ियां खड़ी हैं, जिसने इस व्यस्त मार्ग को एक चलते-फिरते अवैध गोदाम में बदल दिया है। घनी आबादी वाले इस क्षेत्र में इस तरह ज्वलनशील गैस सिलेंडरों का अंबार लगाना सीधे तौर पर मुंबईकरों की जान से खिलवाड़ है। लेकिन आश्चर्य की बात है कि जहाँ भी जनता की सुरक्षा का मुद्दा आता है, सतीश राउत तुरंत अपना हाथ पीछे खींच लेते हैं।


लगातार हो रही इस मनमानी पर जब ‘वशिष्ठ वाणी’ ने जमीनी हकीकत उजागर की, तो व्यवस्था का एक और कड़वा सच सामने आया। सवाल अब सिर्फ एक जूनियर अधिकारी की लापरवाही का नहीं है, बल्कि सिस्टम में बैठे उन वरिष्ठ अधिकारियों का भी है जो इस अव्यवस्था पर मौन रहकर अपनी सहमति दे रहे हैं। मुंबई आरटीओ (RTO) और कांदिवली ट्रैफिक विभाग के आला अधिकारियों की यह चुप्पी साबित करती है कि कार्रवाई की मंशा सिर्फ कागजों तक सीमित है।


🔍 दूसरी तस्वीर: एकता नगर सिग्नल से गणेश नगर मार्ग पूरी तरह ब्लॉक!

दूसरी तस्वीर प्रशासनिक नाकामी का सबसे बड़ा सबूत है। एकता नगर सिग्नल से गणेश नगर की ओर जाने वाले रास्ते पर इस कदर वाहनों का अवैध कब्जा है कि आम राहगीरों और स्थानीय निवासियों का पैदल चलना भी दूभर हो चुका है। पूरी सड़क को अवैध रूप से गाड़ियों की पार्किंग बनाकर ब्लॉक कर दिया गया है, जिससे हर वक्त यहाँ ट्रैफिक जाम की स्थिति बनी रहती है।


🔍 तीसरी तस्वीर: खुद ‘चरकोप सिग्नल’ भी अवैध पार्किंग की चपेट में!

तीसरी तस्वीर यातायात नियमों का मज़ाक उड़ाती है। आम तौर पर गाड़ियां सिग्नल देखकर रुकती हैं, लेकिन सतीश राउत के राज में चरकोप सिग्नल पर ही गाड़ियों की लंबी लाइन लगी हुई है, जिन्हें नियमों को ठेंगा दिखाकर पार्क किया गया है। जब सिग्नल के ठीक नीचे ही गाड़ियों का ‘स्थायी ठिकाना’ बन जाए, तो समझा जा सकता है कि स्थानीय ट्रैफिक पुलिस कितनी मुस्तैदी से काम कर रही है।


‘वशिष्ठ वाणी’ के सीधे और तीखे सवाल: ❓

  • सवाल 1 (सतीश राउत से): सतीश राउत जी, चरकोप सिग्नल जैसी अति-संवेदनशील जगह पर ट्रैफिक ब्लॉक होने के साथ-साथ एकता नगर में भारत गैस के सिलेंडरों का अवैध गोदाम बन गया है, इस पर आपकी नजर क्यों नहीं पड़ती? जब भी जनता की जान से खिलवाड़ का मामला आता है, आप अपना हाथ पीछे क्यों खींच लेते हैं?
  • सवाल 2 (वरिष्ठ अधिकारियों से): जब जमीनी सबूतों के साथ लगातार ये शिकायतें सामने आ रही हैं, तो सतीश राउत को किस आधार पर संरक्षण दिया जा रहा है? क्या वरिष्ठ अधिकारियों को एकता नगर रोड पर किसी बड़े अग्निकांड या हादसे का इंतजार है, जिसके बाद उनकी नींद खुलेगी?
  • सवाल 3 (मुंबई आरटीओ और फायर विभाग से): आम आदमी की गाड़ियों पर तुरंत कार्रवाई करने वाला प्रशासन, बीच सड़क पर चल रहे इस ज्वलनशील गैस सिलेंडरों के अवैध नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई करने से क्यों कतरा रहा है? इस लापरवाही का जिम्मेदार कौन है?
  • सवाल 4: यदि इस अवैध पार्किंग और गैस सिलेंडरों के साम्राज्य की वजह से कोई बड़ा हादसा होता है या आपातकालीन वाहन (Ambulance/Fire Brigade) फंसने से किसी की जान जाती है, तो क्या इसका मुकदमा सतीश राउत और उनके लापरवाह वरिष्ठ अधिकारियों पर दर्ज किया जाएगा?

हमारा रुख स्पष्ट है: > खबरों की कॉपियां बदलने या दबाव बनाने से जमीनी हकीकत नहीं बदलेगी। जब तक चरकोप सिग्नल से एकता नगर रोड को इस अवैध कब्जे और मौत के गोदाम से मुक्ति नहीं मिलती, ‘वशिष्ठ वाणी’ इस मुद्दे को पूरी ताकत से उठाती रहेगी।

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