मुंबई: मालाड (पश्चिम) के जनकल्याण नगर में चल रहे एक पुनर्विकास प्रकल्प में नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए बड़े पैमाने पर अवैध डेब्रिज भराव का मामला गरमाता जा रहा है। सामाजिक कार्यकर्ता और शिव सम्राट फाउंडेशन के अध्यक्ष सम्राट बागुल ने इस घोटाले के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए विकासक विनायक दुबे पर तत्काल FIR दर्ज करने और निर्माण कार्य रोकने (Stop Work) की मांग की है।
क्या है पूरा मामला?
जनकल्याण नगर स्थित नगर भूमापन क्रमांक 9/14 (शिव स्नेह इमारत पुनर्विकास प्रकल्प) में पिछले एक महीने से अवैध तरीके से डेब्रिज डाला जा रहा है। आरोपों के अनुसार, विकासक द्वारा हायवा वाहनों के जरिए लगभग 50 से 60 गाड़ियां मलबा लाकर इस भूखंड पर भरा गया है।

नियमों का उल्लंघन:
- C&D वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स: बिना मनपा की अनुमति के डेब्रिज का परिवहन या भराव पूरी तरह गैरकानूनी है।
- पर्यावरण को नुकसान: खुले में डेब्रिज फेंकना प्रदूषण फैलाना है, जो दंडनीय अपराध की श्रेणी में आता है।
- MRTP एक्ट: अवैध निर्माण और भराव के विरुद्ध इस कानून के तहत सख्त कार्रवाई का प्रावधान है।
अधिकारियों की चुप्पी पर उठे सवाल
सम्राट बागुल का आरोप है कि उन्होंने इस संबंध में पी/उत्तर विभाग के सहायक आयुक्त कुंदन वळवी और घन कचरा विभाग के सहायक अभियंता सुनील पानसकर को फोटो के साथ लिखित शिकायत दी थी। इसके बावजूद, 60 गाड़ियों के अवैध भराव पर केवल एक वाहन पर खानापूर्ति के लिए दंडात्मक कार्रवाई की गई।
“जब लगातार एक महीने तक डेब्रिज डाला जा रहा था, तब उपद्रव शोधक पथक और संबंधित अधिकारी क्या कर रहे थे? क्या विकासक को अधिकारियों का संरक्षण प्राप्त है? यह भ्रष्टाचार और लापरवाही का स्पष्ट मामला है।”
— सम्राट बागुल, सामाजिक कार्यकर्ता
प्रशासन से की गई मुख्य मांगें
इस गंभीर प्रकरण को लेकर बागुल और स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन के सामने निम्नलिखित मांगें रखी हैं:
- विकासक विनायक दुबे पर एम.आर.टी.पी. (MRTP) एक्ट के तहत तत्काल गुन्हा दर्ज हो।
- पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन की उच्च स्तरीय जांच की जाए।
- प्रकल्प पर तत्काल “स्टॉप वर्क” नोटिस जारी कर काम रुकवाया जाए।
- लापरवाही बरतने वाले और विकासक को संरक्षण देने वाले अधिकारियों की भूमिका की जांच कर उन्हें निलंबित किया जाए।
- अवैध परिवहन में शामिल वाहन मालिकों पर भी कड़ी कानूनी कार्रवाई हो।
निष्कर्ष
स्थानीय निवासियों में इस मामले को लेकर भारी रोष है। यदि प्रशासन जल्द ही विकासक और भ्रष्ट अधिकारियों पर नकेल नहीं कसता, तो भविष्य में ऐसे अवैध कृत्यों को और बढ़ावा मिलेगा। अब देखना यह है कि बीएमसी (BMC) प्रशासन इस पर ठोस कार्रवाई करता है या फाइलों को दबा दिया जाता है।









