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मालाड: मालवणी लगून रोड पर जे. कुमार कंपनी का ‘अवैध’ प्रकल्प, भारी धूल प्रदूषण से नागरिक बेहाल

मुंबई: मालाड (पश्चिम) के मालवणी लगून रोड पर स्थित सरकारी भूखंड (नगर भूमापन क्र. 2841, सर्वे क्र. 263) इन दिनों गंभीर विवादों के घेरे में है। सामाजिक कार्यकर्ता और शिव सम्राट फाऊंडेशन के अध्यक्ष सम्राट बागुल ने जे. कुमार कंपनी द्वारा संचालित कास्टिंग यार्ड प्रकल्प पर नियमों के उल्लंघन और अवैध संचालन के गंभीर आरोप लगाए हैं।

लीज समाप्त, फिर भी काम जारी?

शिकायत के अनुसार, यह प्रकल्प वर्ष 2015 से इस सरकारी जमीन पर चल रहा है। चौंकाने वाली बात यह है कि जिलाधिकारी द्वारा दी गई लीज वर्ष 2025 में ही समाप्त हो चुकी है। इसके बावजूद, बिना किसी वैध विस्तार या नवीनीकरण के यह प्रकल्प धड़ल्ले से जारी है, जिससे प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

स्वास्थ्य और पर्यावरण पर प्रहार

सम्राट बागुल का आरोप है कि यह प्रकल्प बिना किसी वैध Construction & Demolition (C&D) अनुमति के चलाया जा रहा है।

  • भारी धूल प्रदूषण: प्रकल्प से उड़ने वाली धूल ने स्थानीय नागरिकों का जीना मुहाल कर दिया है।
  • स्वास्थ्य संकट: धूल के कारण क्षेत्र में श्वसन संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ गया है।
  • नियमों की धज्जियाँ: सड़क पर फैली धूल और मलबे से पर्यावरण को अपूरणीय क्षति पहुँच रही है।

प्रशासनिक सुस्ती पर उठे सवाल

मामले की गंभीरता को देखते हुए श्री बागुल ने पी/उत्तर विभाग के सहायक आयुक्त कुंदन वळवी को लिखित शिकायत सौंपकर तत्काल ‘स्टॉप वर्क’ नोटिस जारी करने की मांग की है। हालांकि, विभागीय स्तर पर कार्रवाई कछुआ गति से चलती दिख रही है।

“सहायक अभियंता (घन कचरा व्यवस्थापन) सुनील पानसकर ने जांच के लिए अधिकारियों को भेजा था, लेकिन अभी तक ‘इमारत एवं कारखाना विभाग’ को काम रोकने संबंधी दस्तावेज नहीं भेजे गए हैं। आखिर प्रशासन किसे बचाने की कोशिश कर रहा है?”

— सम्राट बागुल, अध्यक्ष – शिव सम्राट फाऊंडेशन

नागरिकों की मांग: तत्काल कार्रवाई हो

स्थानीय नागरिकों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि बार-बार शिकायत के बावजूद जे. कुमार कंपनी के खिलाफ कोई ठोस कदम क्यों नहीं उठाया जा रहा। जनता का सवाल है कि क्या प्रशासन किसी राजनीतिक या आर्थिक दबाव में है?

नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने एक सुर में मांग की है कि:

  1. अवैध रूप से चल रहे इस प्रकल्प को तत्काल बंद किया जाए।
  2. नियमों का उल्लंघन करने वाली कंपनी पर भारी जुर्माना लगाया जाए।
  3. लापरवाही बरतने वाले संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।

अब देखना यह है कि बीएमसी और जिला प्रशासन इस अवैध प्रकल्प पर कब कानूनी शिकंजा कसता है या नागरिकों को इसी तरह प्रदूषित हवा में सांस लेने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।

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