मुंबई, कांदिवली (पश्चिम): क्या कांदिवली का एकता नगर किसी बड़ी त्रासदी के मुहाने पर खड़ा है? क्या यहाँ का प्रशासन और भारत गैस एजेंसी किसी लाशों के ढेर का इंतज़ार कर रहे हैं? कल ‘वशिष्ठ वाणी’ ने प्रमुखता से खबर प्रकाशित की थी कि कैसे सड़क को ही गैस गोदाम बना दिया गया है, लेकिन आज की जमीनी हकीकत यह है कि एक इंच भी बदलाव नहीं हुआ। गैस सिलेंडरों से लदे वाहन आज भी सड़क पर सीना ताने खड़े हैं, जो प्रशासन की लाचारी और एजेंसी की दबंगई का जीता-जागता सबूत हैं।
मुख्यमंत्री जी, क्या आपका सिस्टम ‘लाचार’ है?
एकता नगर की जनता आज सीधे महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस जी से पूछ रही है— क्या आपका प्रशासन इतना बौना हो गया है कि एक गैस एजेंसी खुलेआम नियमों की धज्जियां उड़ा रही है और कोई उसे छू तक नहीं पा रहा? सड़क पर अवैध रूप से सिलेंडरों का जमावड़ा न केवल ट्रैफिक जाम का कारण है, बल्कि यह हज़ारों घरों के लिए ‘लाइव बम’ की तरह है।

‘वशिष्ठ वाणी’ का कड़ा प्रहार: लापरवाही की पराकाष्ठा!
प्रशासन का यह रवैया साफ़ दर्शाता है कि अखबारों में छपने वाली जन-समस्याओं को रद्दी का टुकड़ा समझा जा रहा है। अगर कल को यहाँ आग लगती है या कोई सिलेंडर ब्लास्ट होता है, तो क्या मुख्यमंत्री महोदय उन अधिकारियों पर हत्या का मुकदमा दर्ज करेंगे जो आज आँखें मूंदे बैठे हैं?
- सवाल 1: भारत गैस एजेंसी को सड़क पर ‘पार्किंग और गोदाम’ बनाने का लाइसेंस किसने दिया?
- सवाल 2: क्या पुलिस और नगर निगम के पास इन अवैध वाहनों को हटाने की ताकत नहीं है, या ‘महिना’ तय है?
- सवाल 3: एकता नगर की जनता के डर और सुरक्षा का जिम्मेदार कौन?
चेतावनी: अब चुप नहीं रहेगा ‘वशिष्ठ वाणी’
अगर आज भी इन सिलेंडरों को सड़क से नहीं हटाया गया, तो यह स्पष्ट हो जाएगा कि सिस्टम और भू-माफियाओं/एजेंसियों के बीच की साठगांठ अटूट है। ‘वशिष्ठ वाणी’ इस मुद्दे को तब तक उठाता रहेगा जब तक एकता नगर की सड़कों से ‘मौत का यह सामान’ हट नहीं जाता।
जनता की आवाज़: “हम टैक्स देते हैं सुरक्षा के लिए, अपनी और अपने बच्चों की जान जोखिम में डालने के लिए नहीं। मुख्यमंत्री जी, कृपया दखल दें!”












