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नगरसेवक योगेश वर्मा की नाक के नीचे ‘अवैध साम्राज्य’: वशिष्ठ वाणी का तीखा सवाल—जनता के रक्षक या भू-माफियाओं के संरक्षक?

मालाड (पश्चिम): मालाड वार्ड 35 की जनता आज खुद को ठगा हुआ महसूस कर रही है। जिस नगरसेवक को स्थानीय विकास और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए चुना गया, उन्हीं के कार्यक्षेत्र ‘कोयला वाली गली’ में रेलवे ट्रैक के किनारे अवैध इमारतों का जाल बिछाया जा रहा है। ‘वशिष्ठ वाणी’ पिछले 14 दिनों से लगातार इस भ्रष्टाचार को उजागर कर रहा है, लेकिन बीजेपी नगरसेवक योगेश वर्मा की चुप्पी कई गहरे राज़ बयां कर रही है।


कुंदन वाल्वी और नोटिस का रहस्य: क्यों चुप हैं योगेश वर्मा?

रिकॉर्ड के अनुसार, बीएमसी ने 21 मई 2025 को ही कर्सन के अवैध निर्माण के खिलाफ नोटिस जारी किया था। एक जागरूक नगरसेवक का कर्तव्य होता है कि वह ऐसे नोटिस पर तुरंत कार्रवाई सुनिश्चित करे। ‘वशिष्ठ वाणी’ योगेश वर्मा से पूछता है:

  • क्या आपने बीएमसी अधिकारी कुंदन वाल्वी से कभी जवाब मांगा कि नोटिस के एक साल बाद भी बुलडोजर क्यों नहीं चला?
  • क्या यह देरी किसी ‘खास समझौते’ के तहत की गई?
  • वार्ड 35 में जब जनता की सुरक्षा रेलवे ट्रैक के पास बन रही अवैध बिल्डिंगों के कारण खतरे में है, तब आप कहाँ गायब हैं?

वशिष्ठ वाणी के साक्ष्यों ने खोली पोल

वशिष्ठ वाणी लगातार बीएमसी के पत्रों और मौके की तस्वीरों को साझा कर रहा है। इन 14 दिनों में स्थानीय नगरसेवक की निष्क्रियता ने यह साबित कर दिया है कि उनके लिए जनता की सुरक्षा से ज्यादा जरूरी कुछ और है।

जनता की अदालत में सवाल: “योगेश वर्मा जी, चुनाव के समय घर-घर जाकर वोट मांगने वाले आप, आज जब ‘कोयला वाली गली’ के लोग अवैध निर्माण और संभावित खतरों से डरे हुए हैं, तो आप मौन क्यों हैं? क्या आप ये बता सकते हैं कि विपक्ष को कोसने के अलावा आपने अपने वार्ड में अवैध निर्माण रोकने के लिए क्या किया?”

चेतावनी: अब चुप नहीं रहेगी जनता

नगरसेवक यह न भूलें कि वे जनता के प्रति जवाबदेह हैं। वशिष्ठ वाणी इस मुद्दे को तब तक नहीं छोड़ेगा जब तक कुंदन वाल्वी जैसे लापरवाह अधिकारियों और कर्सन जैसे भू-माफियाओं पर कड़ी कार्रवाई नहीं होती।

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