कांदिवली (मुंबई): भारतीय जनता पार्टी (BJP) की कथनी और करनी में कितना बड़ा अंतर है, इसका जीता-जागता उदाहरण कांदिवली के एकता नगर में देखने को मिल रहा है। एक तरफ बीजेपी चुनाव जीतने के लिए महिला आरक्षण और सुरक्षा जैसे मुद्दों को ढाल बना रही है, तो दूसरी तरफ उन्हीं महिलाओं और उनके परिवारों की सुरक्षा को ताक पर रखकर रिहायशी इलाकों को बारूद के ढेर में तब्दील कर दिया गया है।
BJP को वोट की चिंता, जनता की परवाह नहीं!

स्थानीय नागरिकों में भारी रोष है कि जहाँ चुनाव नहीं हैं, वहाँ जनता की समस्याओं से सरकार का कोई सरोकार नहीं रह गया है। कांदिवली एकता नगर रोड पर 14 गैस सिलेंडरों से लदे वाहन बेखौफ खड़े रहते हैं। यह पूरी तरह से एक आवासीय (Residential) क्षेत्र है जहाँ हजारों परिवार रहते हैं। BJP की इस दोगली नीति पर सवाल उठ रहे हैं कि क्या महिलाओं की सुरक्षा केवल भाषणों और विज्ञापनों तक ही सीमित है?
प्रशासनिक लाचारी या मिलीभगत?
‘वशिष्ठ वाणी’ समाचार पत्र ने इस गंभीर विषय को बार-बार प्रकाशित कर अधिकारियों को कुंभकर्णी नींद से जगाने की कोशिश की है, लेकिन सत्ता के दबाव में या अपनी सुस्ती के कारण प्रशासन टस से मस नहीं हो रहा। सूत्रों के अनुसार:
- कांदिवली RTO केवल चालान काटकर अपनी जिम्मेदारी पूरी कर रहा है।
- सवाल यह है कि क्या चालान काटने से विस्फोट का खतरा टल जाएगा?
- इन वाहनों को वहां से हटाकर किसी महफूज जगह क्यों नहीं ले जाया जा रहा?
फडणवीस और शिंदे सरकार से तीखा सवाल
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, जो खुद को ‘शासन आपके द्वार’ का मसीहा बताते हैं, क्या उन्हें एकता नगर के इन परिवारों की चीखें सुनाई नहीं दे रही हैं? जनता पूछ रही है कि:
“क्या देवेंद्र फडणवीस जी के पास केवल चुनावी रैलियों के लिए समय है? क्या रिहायशी इलाकों में गैस के अवैध गोदाम और पार्किंग पर उनकी पुलिस और RTO लगाम नहीं लगा सकते? क्या बीजेपी के लिए जनता केवल एक ‘वोट बैंक’ है जिसकी जान की कीमत कौड़ियों के भाव है?”
चेतावनी: चुनाव भारी पड़ेगा!
यदि इन 14 गैस वाहनों को तुरंत यहाँ से नहीं हटाया गया, तो एकता नगर की जनता BJP की इस ‘दोहरी नीति’ का जवाब आने वाले समय में जरूर देगी। वशिष्ठ वाणी इस संघर्ष में जनता के साथ खड़ा है और जब तक समाधान नहीं होता, प्रशासन और सरकार को चैन से बैठने नहीं देगा।












