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BMC अधिकारी कुंदन वळवी से ‘वशिष्ठ वाणी’ का सीधा सवाल: साल भर तक फाइल दबाकर किसे बचाया गया?

मुंबई (मालाड): भ्रष्टाचार की हद तो तब पार हो गई जब कागजों पर कार्रवाई का नाटक किया गया, लेकिन जमीन पर माफियाओं को फलने-फूलने का पूरा मौका दिया गया। बीएमसी अधिकारी कुंदन वळवी अब जनता के घेरे में हैं। सवाल सीधा है—जब 21 मई 2025 को बीएमसी ने ‘कर्सन’ के अवैध निर्माण के खिलाफ नोटिस जारी कर दिया था, तो उस पर कार्रवाई करने में पूरा एक साल क्यों लगा दिया गया?


एक साल का ‘रहस्यमयी’ इंतजार क्यों?

बीएमसी के पास अवैध निर्माण को ध्वस्त करने के अधिकार हैं, फिर भी एक साल तक चुप्पी साधे रखना क्या यह साबित नहीं करता कि अधिकारियों और भू-माफियाओं के बीच ‘सेटिंग’ का खेल चल रहा था?

  • क्या 12 महीने का समय इसलिए दिया गया ताकि अवैध इमारतें पूरी तरह खड़ी हो सकें?
  • क्या नोटिस केवल कागजी खानापूर्ति थी ताकि ऊपर के अधिकारियों को गुमराह किया जा सके?

वशिष्ठ वाणी के पास पुख्ता सबूत

वशिष्ठ वाणी लगातार बीएमसी के आधिकारिक पत्रों और उस स्थल की लाइव तस्वीरों को साझा कर रहा है जहाँ खुलेआम नियमों की धज्जियाँ उड़ाई जा रही हैं। इन सबूतों के बाद भी प्रशासन का यह कहना कि “कार्रवाई प्रक्रिया में है”, अब जनता के गले नहीं उतर रहा।

“BMC अधिकारी कुंदन वळवी, मालाड की जनता यह जानना चाहती है कि 21 मई 2025 से लेकर अब तक बीएमसी का दस्ता ‘कोयला वाली गली’ तक पहुँचने में नाकाम क्यों रहा? क्या प्रशासन को किसी बड़े हादसे का इंतज़ार है, या फिर कर्सन का वरदहस्त इतना मजबूत है कि बीएमसी के नोटिस की कीमत रद्दी के बराबर रह गई है?”

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