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कांदिवली में ‘मौत का सौदागर’ बना सिस्टम: क्या एकता नगर में किसी ‘विस्फोट’ का इंतज़ार कर रहा है प्रशासन?

मुंबई, कांदिवली: देश की आर्थिक राजधानी मुंबई के कांदिवली स्थित एकता नगर की गलियां इन दिनों बारूद के ढेर पर बैठी हैं। यहाँ की सघन बस्तियों और रिहायशी इमारतों के बीच भारत गैस (Bharat Gas) के सिलेंडरों से लदे ट्रकों और टेंपो का अवैध जमावड़ा शासन-प्रशासन की संवेदनहीनता की पराकाष्ठा को दर्शा रहा है।

नियमों की अर्थी, सुरक्षा के साथ खिलवाड़

पेट्रोलियम एवं विस्फोटक सुरक्षा संगठन (PESO) के कड़े नियमों को ठेंगा दिखाते हुए, ये वाहन घंटों घनी आबादी वाले रोड पर खड़े रहते हैं। आश्चर्य की बात यह है कि जिस मार्ग से हज़ारों मासूम बच्चों और बुजुर्गों का आना-जाना होता है, उसे गैस ट्रांसपोर्टरों ने अपना अवैध ‘गोदाम’ बना लिया है।

सोया हुआ है तंत्र: BMC, पुलिस और सरकार की चुप्पी पर सवाल

स्थानीय निवासियों के आक्रोश के बावजूद सिस्टम की ‘कुंभकर्णी नींद’ नहीं टूट रही है:

  • BMC (नगर निगम): क्या फुटपाथ और सड़कों का अतिक्रमण केवल छोटे दुकानदारों तक सीमित है? इन ‘जहरीले’ वाहनों पर निगम की चुप्पी साठ-गांठ की ओर इशारा करती है।
  • मुंबई पुलिस: कानून-व्यवस्था का दम भरने वाली पुलिस के नाक के नीचे ये खतरनाक वाहन सुरक्षा व्यवस्था को चुनौती दे रहे हैं। क्या पुलिस किसी बड़ी अनहोनी के बाद एफ़आईआर (FIR) दर्ज करने का इंतज़ार कर रही है?
  • मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO): “जनता की सरकार” होने का दावा करने वाले नेतृत्व के पास क्या अपने नागरिकों की जान की सुरक्षा के लिए समय नहीं है?

बड़ा सवाल: ज़िम्मेदार कौन?

यदि इस संकरी सड़क पर कोई छोटी सी चिंगारी भी एक बड़े धमाके का रूप लेती है, तो क्या मुख्यमंत्री, पुलिस कमिश्नर या बीएमसी कमिश्नर इसकी ज़िम्मेदारी लेंगे? एकता नगर के लोग अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि एक्शन (Action) चाहते हैं।

निष्कर्ष: यह केवल अवैध पार्किंग का मामला नहीं है, बल्कि यह सार्वजनिक सुरक्षा के प्रति आपराधिक लापरवाही है। प्रशासन की यह खामोशी आने वाली किसी बड़ी आपदा की आहट हो सकती है।

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