मुंबई, मालाड: क्या BMC के अधिकारी जनता की सेवा के लिए हैं या भू-माफियाओं की चाकरी करने के लिए? मालाड पी-उत्तर वार्ड के अधिकारी कुंदन वाल्वी की कार्यप्रणाली पर अब गंभीर सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि जनता के पसीने की कमाई से वेतन लेने वाले ये अधिकारी, मालाड की ‘कोयला वाली गली’ में कानून को गिरवी रख चुके हैं।
कुर्सी प्रशासन की, वफादारी माफिया की?

‘वशिष्ठ वाणी’ पिछले कई दिनों से भदरण नगर में हो रहे अवैध निर्माण और माफिया कर्सन के आतंक को उजागर कर रही है। लेकिन कुंदन वाल्वी जैसे अधिकारियों की आँखों पर शायद ‘गुलाबी नोटों’ की पट्टी बंधी है। सरकारी जमीन पर माफिया की इमारतें खड़ी हो रही हैं, और अधिकारी दफ्तर में बैठकर फाइलें दबाने में मशगूल हैं।

खून से सने हैं माफिया के हाथ, फिर भी अधिकारी मौन!
जब एक जागरूक नागरिक इस अवैध निर्माण के खिलाफ आवाज उठाता है, तो उस पर जानलेवा हमला होता है। क्या कुंदन वाल्वी इस हमले की नैतिक जिम्मेदारी लेंगे? एक तरफ प्रशासन ‘स्वच्छ मुंबई’ का ढोंग करता है, वहीं दूसरी तरफ ऐसे भ्रष्ट अधिकारी माफियाओं को जमीन निगलने की खुली छूट दे रहे हैं।
जनता पूछे सवाल: कब जागेगा प्रशासन?
क्या कुंदन वाल्वी को अपनी वर्दी और पद की मर्यादा याद है? या फिर माफिया कर्सन के खौफ (या लालच) ने उनके जमीर को मार दिया है? मालाड की जनता अब आर-पार की लड़ाई के मूड में है। अगर अवैध निर्माण नहीं गिरा और दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो जनता सीधे मंत्रालय का घेराव करेगी।














