मुंबई | वशिष्ठ वाणी दैनिक
मालवाणी क्षेत्र में स्थित ओम सिद्धि विनायक सोसाइटी को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि सोसाइटी की ओर से करीब 15 वर्ष पुराने वाटर टैंक पर सिमेंट की छत बनाकर कथित अवैध गार्डन/प्लेटफॉर्म तैयार किया गया, जिसका उपयोग इवेंट, कार्यक्रम, नाच-गाना और भीड़ जुटाने के लिए किया जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस ढांचे पर सार्वजनिक कार्यक्रमों के दौरान कई लोग एक साथ खड़े होते हैं, जिससे किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है।
इस पूरे मामले में म्हाडा क्षेत्र निर्माण गोरेगांव के अधिकारी रोहित शिंदे की भूमिका पर अब गंभीर सवाल उठने लगे हैं। लोगों का आरोप है कि बार-बार शिकायतें, सवाल और समाचार प्रकाशित होने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
क्या हादसे के बाद ही जागेगा सिस्टम?
स्थानीय रहवासियों का कहना है कि जिस पुराने वाटर टैंक पर यह सिमेंट का ढांचा बनाया गया है, वहां कार्यक्रमों के दौरान भीड़ जमा होती है, लोग खड़े रहते हैं और नाच-गाना तक होता है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि यह पुराना ढांचा टूट गया, या टैंक क्षतिग्रस्त होकर नीचे धंस गया, तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?
लोग पूछ रहे हैं कि:
- क्या रोहित शिंदे तब जागेंगे जब कोई बड़ी दुर्घटना हो जाएगी?
- क्या कार्रवाई सिर्फ हादसे के बाद ही होगी?
- क्या सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़ा यह मामला इतना हल्का है कि उसे लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है?
पहले से गार्डन होने के बावजूद नया निर्माण क्यों?
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, सोसाइटी परिसर में पहले से ही गार्डन की व्यवस्था उपलब्ध थी। इसके बावजूद अलग से पुराने वाटर टैंक पर सिमेंट की छत डालकर एक नया उपयोगी ढांचा तैयार किए जाने पर सवाल उठ रहे हैं। लोगों का कहना है कि यह सिर्फ जरूरत का मामला नहीं, बल्कि मनमानी का उदाहरण है।
आरोप यह भी है कि सोसाइटी के सचिव ने ऐसा व्यवहार किया मानो वह जो चाहें, जब चाहें, जहां चाहें निर्माण कर सकते हैं और कोई उनका कुछ नहीं बिगाड़ सकता।
फेडरेशन मामले में नरमी का असर अब दूसरे मामलों में भी?
स्थानीय लोगों के बीच यह चर्चा भी है कि फेडरेशन के अध्यक्ष और सचिव पर कड़ी कार्रवाई न होने से गलत संदेश गया है। आरोप है कि जब-जब फेडरेशन के खिलाफ सख्त कदम उठाने की नौबत आई, तब-तब मामले को म्हाडा क्षेत्र निर्माण गोरेगांव के अधिकारी रोहित शिंदे द्वारा कमजोर कर दिया गया या अनदेखा किया गया। अब लोगों का कहना है कि उसी का परिणाम है कि दूसरे लोग भी क्षेत्र में मनमानी करने लगे हैं।
यही कारण बताया जा रहा है कि आज ओम सिद्धि विनायक सोसाइटी में भी कथित रूप से अवैध निर्माण को लेकर बेखौफ रवैया देखने को मिल रहा है।
रोहित शिंदे से सीधा सवाल
स्थानीय नागरिकों और रहवासियों की ओर से म्हाडा अधिकारी रोहित शिंदे से सीधा सवाल पूछा जा रहा है कि:
- आप म्हाडा में अधिकारी किस उद्देश्य से हैं?
- अवैध निर्माण को रोकने और ध्वस्त करने के लिए या उसे बढ़ावा देने के लिए?
- जब शिकायतें सामने हैं, संरचना पर सवाल हैं और सार्वजनिक सुरक्षा दांव पर है, तो फिर कार्रवाई में देरी क्यों?
- संबंधित स्थल पर ताला क्यों नहीं लगाया गया?
- कथित अवैध गार्डन/ढांचे को अब तक हटाया या तोड़ा क्यों नहीं गया?
सिस्टम पर भी उठ रहे हैं सवाल
निवासियों का कहना है कि जब अधिकारियों पर पहले भी सवाल उठ चुके है, मामलों में शिकायतें दर्ज हुई हों, यहां तक कि अदालत तक विषय पहुंचे गए हैं, उसके बावजूद यदि कार्रवाई नहीं होती, तो आम लोगों में यह संदेश जाता है कि “सिस्टम फेल है” और कोई किसी का कुछ नहीं बिगाड़ सकता।
यही सोच क्षेत्र में अवैध कब्जों, कथित मनमानी निर्माण और नियमों की अनदेखी को बढ़ावा देती है।
बड़े सवाल जो जवाब मांगते हैं
- क्या 15 वर्ष पुराने वाटर टैंक पर सिमेंट की छत/ढांचा बनाने की वैध अनुमति थी?
- यदि अनुमति नहीं थी, तो अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
- क्या इस ढांचे की इंजीनियरिंग या सुरक्षा जांच कराई गई है?
- जब इस स्थान का उपयोग कार्यक्रमों और भीड़ के लिए हो रहा है, तो सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी है?
- अगर कल को वाटर टैंक टूटता है या कोई बड़ी दुर्घटना होती है, तो उसका जिम्मेदार कौन होगा?
- रोहित शिंदे इस पूरे मामले में अब तक मौन क्यों हैं?
मीडिया का स्पष्ट रुख
वशिष्ठ वाणी स्पष्ट रूप से कहना चाहता है कि यह सवाल तब तक उठाया जाता रहेगा, जब तक संबंधित अधिकारी अपने कर्तव्य का निर्वाह ईमानदारी और निष्ठा से नहीं करते और कथित अवैध निर्माण पर ठोस कार्रवाई नहीं होती।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो इस पूरे मामले को और गंभीर स्तर पर उठाया जाएगा और संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही भी तय करने की मांग की जाएगी।












